सर ने मेरी सेक्सी माँ को चोदा (Sir Ne Meri Sexi Maa Ko Choda): freesexstory.online पर सेक्स कहानियां पढ़ रहे मेरे सभी दोस्तों, सहेलियों, भाभियों आंटियों को मेरा प्रणाम, मैं प्रभात हूँ, मेरी कहानी मेरे साथ घटी दो साल पहले की बात है, उस समय मेरी उम्र छोटी थी और में उस समय स्कूल में पढ़ रहा था।
में उस समय 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था और कॉमर्स ले रखी थी और मेरी माँ सिलाई करके घर का खर्च चलाती थी। मेरे ग़रीब होने के कारण पिछले कुछ महीनों की फीस बाकी थी इस कारण से एक्स्ट्रा क्लास से मुझे बाहर निकाल दिया गया।
स्कूल की परीक्षा से कुछ दिन पहले, मेरे सर का फोन अचानक से मेरी माँ के पास आया. उन्होंने मेरी माँ से मेरी पढ़ाई के बारे में चिंता जताते हुए उनसे कुछ बात करने के लिए शाम को एक्स्ट्रा क्लास के बाद में मेरे साथ स्कूल आने को कहा.
माँ शाम को मेरे साथ स्कूल गई लेकिन लेट होने के कारण सर घर चले गए तो उन्होंने उनसे घर पर ही आकर बात करने का कहा और घर पहुचने पर उन्होंने मेरी कमजोर पढ़ाई को लेकर चिंता जताते हुए कहा की ऐसे तो यह इस बार फ़ैल हो जाएगा.
मेरी माँ ने सर से एक्स्ट्रा क्लास के लिए कहा तो उन्होंने कहा आपके पास देने के लिए फ़ीस तो है नहीं तो कैसे होगा। मेरी माँ ने सर से कहा कि इस बार किसी भी तरह से इसे पास करा दीजिएगा. इसके लिए आप जो भी कहेगे में वह करुगी, आपका मेरे ऊपर बड़ा अहसान होगा.
सर ने कहा- आप आईये अंदर मुझे आपसे कुछ बात करनी है, फिर देखते हैं इस बारे में क्या किया जा सकता है.
मेरी माँ उस समय 40 साल से 2-3 साल कम होगी और देखने में बहुत सेक्सी हैं, मेरी माँ शायद सर का इशारा समझ रही थी हाँ आप जो चाहे चाहे वह कर सकते हो मैं तैयार हूँ.
सर ने कहा- मतलब?
माँ ने जवाब में सर से धीरे से कहा- आप मतलब नहीं समझते हैं.. मैं तो आपको सब कुछ दिखाने को राजी हूँ.
सर समझ गए और बोले- ठीक है आप अगर ऐसे ही सपोर्ट करेगी तब तो प्रभात के लिए यह बहुत ही फायदेमंद रहेगा.
सर की इस बात से मेरी माँ थोड़ी गरम हो गई,अपने माँ के बदन की इस गरमी को में भी महसूस कर रहा था.
जब हम सर के यहाँ पहुँचे, सर ने हम दोनों को अन्दर बुलाया.
मेरी माँ ने करीब कुछ सेकंड के लिए ही सर से आँखों ही आँखों में बातें कीं.. इससे सर भी बहुत गरम हो गए और उन्होंने उन्हें अंदर आकर काम समझने का कहा और मुझे बाहर बरामदे में बैठने के लिए कहा.
माँ सर के साथ घर के अंदर चली गई और सर ने मुझे कहा कि कोई आए तो कहना की मुझे कुछ जरूरी काम है तब तक में तुम्हारी माँ को घर के काम समझा देता हूँ. में बरामदे में बैठकर इधर-उधर देख रहा था और अपना टाइम पास करने की कोशिश कर रहा था.
कुछ पलों बाद जब मेरा मन नहीं लगा तो मुझे पता नहीं क्या चुल्ल मची की क्यों न अंदर झककर देखूं कि सर और माँ क्या कर रहे हैं, मैं अब बरामदे की खिड़की के पास खड़ा हो गया तो खिड़की में पतली सी झिरी दिखाई दी.
मैंने उस झिरी में अपनी आँखे गड़ाकर अंदर देखा तो सर मेरी माँ को धीरे-धीरे किस कर रहे थे. मेरी माँ ने भी उनका साथ देते हुए अपना ब्लाउज उतार दिया था. ब्लाउज उतारते ही वह बड़ी ही कटीली माल लग रही थीं.
सर मेरी माँ के बड़े-बड़े मम्मो को देखकर कुछ देर के लिए स्थिर हो गए और फिर होश में आते हुए मम्मों को अपने हाथों में लिया और उनके एक निप्पल को चूसने लगे और दूसरे को अपने हाथों से मसलने लगे.
मेरी माँ भी सर के ऐसा करते ही अपनी अंतर्वासना के अधीन कामुक होकर बड़ी मस्ती से उन्हें अपना दूध पिला ने के लिए उनके सिर को अपने हाथ से अपने मम्मो पर दबाने लगी और . फिर सर ने माँ के सभी कपड़े एक-एक कर अपने हाथों से उनके शरीर से अलग कर दिए और इस तरह से मेरी माँ पूरी तरह नंगी हो गई और बिस्तर पर लेट गई थीं.
माँ ने लेटते हुए सिर के गले में अपनी बाँहे डालकर उन्हें भी अपने बदन के ऊपर गिरा दिया और उन्हें कामुक औरत की तरह चूमते हुए अपने बदन में समाने लगी. सर ने भी माँ को थोड़ा और गरम करने और तड़पाने के लिए उनको पाँव से लेकर सर तक धीरे-धीरे ऊपर की ओर सहलाना चालू किया.
सर के ऐसा करने से माँ पूरी तरह से गरम होकर अपने बदन को बल देते हुए मुँह से ‘स्सस्सस्स.. आह.. स्सस..’ की कामुकता भरी आवाजें आने लगी थीं.
सर ने आगे बढ़कर माँ की नाभि में धीरे-धीरे उंगली करना चालू किया तो माँ और ज़्यादा तड़पने लगी. अब सर ने उन्हें नीचे चूमने के साथ प्यार से ऊपर की तरफ़ अपने हाथों से उनके मम्मों को हाथों में भरकर मसलना शुरू कर दिया था.
माँ से अब उनकी चुदास संभल नहीं रही थी और वह एकदम से मचल कर ऊपर नीचे होकर अपनी चुत को सर के अंदर दबाने लगी तो सर ने वहा से अपना मुँह ऊपर किया और माँ की नाभि के अन्दर अपनी जीभ डाल कर घुमाई.. सर माँ को तड़पा रहे थे और माँ उनके मुँह को अपने पेट में दबा रही थी.
जब माँ से सहा नहीं गया तो उन्होंने बागडोर अपने हाथों में लेते हुए डॉगी स्टाइल में होकर सर के लंड को किस करना शुरू कर दिया.. और सर के हाथ माँ की गांड को सहलाने और मस्ती से दबाने लगे.
कुछ देर लंड चुसवाने के बाद सर ने माँ को डॉगी स्टाइल में ही उनकी कमर को पकड़कर अपनी और कर दिया और उनके पीछे से गांड पर थपके देने के बाद उनकी मस्त चुत में अपना लंड डालना शुरू किया.
माँ ने बहुत सालो से कोई लंड नहीं लिया था और इस कारण से उनकी चूत छोटी थी वही सर का लंड बहुत बड़ा था इस कारण से माँ की चुत जयादा नहीं खुल पाई और वे तड़पने लगी और आगे होकर लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगी.
सर ने माँ की इस कोशिश के जवाब में अपने दोनों हाथों से उनकी कमर को जोड़ से पकड़ लिया और एक हाथ से उनकी गर्दन को पकड़कर उनके ऊपर कुत्ते की तरह से पकड़कर अपने बड़े लंड को माँ की चुत में 2-3 झटकों में पूरा घुसा दिया और बुरी तरह से झटके दे देकर उसे फाड़ना शुरू कर दिया था.
मेरी माँ अब सर के नीचे झटके खाते हुए एक कमसिन लौंडिया की तरह चीख रही थीं जैसे उनकी सील पहली बार खुल रही हो. सर ने भी बर्बरता से माँ की छोटी सी चुत के साथ घोड़े की तरह से अपने लंड से चुदाई करना चालू रखा.
कुछ देर की तकलीफ के बाद माँ ने हार मान ली या शायद मेरी माँ ने सर के लंड को पूरा खा लिया था और उसके हिसाब से फैलकर माँ की पीड़ा को खत्म कर दिया और अब उन्हें वही लंड अच्छा लगने लगा था.
मेरी माँ बहुत छरहरी और चंचल की औरत है और अब उन्हें भी सर से जोर-जोर से चुदवाना अच्छा लग रहा था और वे भी सर के साथ ताल मिलाने लगी. सर ने माँ को मस्ती के साथ हचक-हचक कर चोदा और करीब बीस मिनट बाद माँ की चुत में ही शेर की तरह घुर्राते हुए अपने लंड का सारा वीर्य छोड़ दिया था.
वीर्य छोड़ते ही मेरी माँ और सर दोनों ही थोड़ी देर के लिए एक दूसरे के ऊपर ही निढाल हो गए. सर मेरी माँ के ऊपर ही पसरे हुए थे और उनका लंड मेरी माँ की गांड की दरार के बीच में झूल रहा था. थोड़ी देर बाद माँ को होश आया तो वे फिर से गरम हो गई और सर का लंड चूसने लगी.
सर भी शायद एक बार की चुदाई से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हुए थे तो वे दोनों फिर से एक दूसरे से लिपट गए और अपने लंड और चूत के मिलन से एक दूसरे को तृप्त करने में लग गए और में खिड़की से उन्हें देखते हुए घर में से आ रही उनकी चुदाई की मधुर कामुक और मादक संगीत को बाहर से ही कान लगाकर सुनता रहा था.
जब वे दोनों पूरी तरह से थक गए तो माँ साड़ी और बाकी कपड़े पहन कर बाहर आ गईं. सर ने भी पीछे से आकर मुझे कहा आज मैंने तुम्हारी माँ को काम अच्छे से समझा दिया है कल से तुम इन्हें लेकर पढ़ाई के लिए इसी टाइम आ जाना.
मैं सर के कहने का अर्थ समझ रहा था की आज की चुदाई खत्म हुई अब कल से अपनी माँ को रोज़ चुदाने के लिए लेकर आ जाना.
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