आपने पढ़ा की कैसे मैंने मेरे दोस्त की माँ को मालिश की तो उन्होंने गरम होकर रात में दो बार मुझसे चुदाई करवाई और अगले दिन में बुआ और सुमन के साथ खेत में आकर दोपहर को आराम कर रहा था.
कहानी का पिछला भाग :
दोस्त की बहन, बुआ और माँ की चुदाई-1
दोस्त की बहन, बुआ और माँ की चुदाई-2
दोस्त की बहन, बुआ और माँ की चुदाई-3
दोस्त की बहन, बुआ और माँ की चुदाई-4
आगे की कहानी :
में गहरी नींद से जब उठा तो शाम हो गई थी और मेरा मोटा लण्ड तन कर कड़क हो, लुंगी से बाहर निकल कर मुझे सलामी दे रहा था. इतने में किसी के कदमों की आहट आई तो मैंने आँखें बंद सोने का नाटक किया.
थोड़ी देर बाद हल्की आँख खोल कर देखा तो बुआ की नज़र मेरे खड़े हुए मोटे लण्ड पर टिकी हुई थीं और वह हैरानी के साथ मेरे लम्बे, मोटे लण्ड को देख रही थीं.
कुछ देर ऐसे ही देखने के बाद उन्होंने आवाज देकर कहा, बेटा उठ जाओ, घर चलने का समय हो गया है!
मैंने हड़बड़ाकर उठने का नाटक किया तो मेरे लुंगी से बाहर निकले हुए लंड को देखकर बुआ बोली बेटे क्या तुमने कोई बुरा सपना देखा है?
मैंने नींद में ही कहा , नहीं बुआ लेकिन आपको ऐसा क्यो लगा?
वो नीचे की और इशारा कर बोली! क्या दिख रहा है? मैंने नीचे लुंगी से निकला हुआ लंड देखा और शर्म से लाल हो कर उसे अपनी चड्डी में छिपा लिया. ऐसा करते ही बुआ हँस पड़ी.
हम घर के लिए निकले लेकिन रास्ते में हमारे बीच कोई बात नहीं हुई. घर आकर में बाज़ार गया और 1 विस्की की बोतल लेकर घर पहुँचा तो रात के 9 बज रहे थे.
मेरे घर में घुसते ही बुआ ने आवाज दी, बेटा खाना खालो. मैंने जवाब दिया, बुआ अभी भूख नहीं है थोड़ी देर बाद खा लूँगा.
मैंने देखा कि घर में बुआ अकेली है और माँ और सुमन दिखाई नहीं दे रहे है तो मैंने उनके बारे में पूछा तो बुआ ने कहा कि दो गली दूर किसी रिश्तेदार के यहां रात को कीर्तन है तो वे दोनों सुबह जल्दी तक ही घर आयेगे.
मैंने खुश होते हुए कहा, ठीक है! बुआ अगर आपको बुरा ना लगे तो क्या मैं थोड़ी विस्की पी सकता हूँ.
बुआ बोलीं, तुम आँगन में बैठकर पी लो तब तक में खाना गर्म कर ले आती हूँ.
मैं आँगन में बैठ कर विस्की पीने लगा और क़रीब 3-4 पेग के बाद मुझे नशा होने लगा की तभी बुआ खाना लेकर आ गई.
बुआ ने भी मेरे साथ ही बैठकर खाना खाया और हम दोनों बुआ के कमरे में आ गए. मैंने पैंट और शर्ट निकली और सोने के लिए लुंगी पहन ली.
बुआ होकर पानी लाने गईं तो, मुझे मैंने देखा कि उन्होंने पारदर्शी नाईटी पहन रखी है और उसके अंदर ना तो ब्लाऊज़ पहना था और ना ही पेटीकोट पहना था! लाईट की रोशनी में पारदर्शी नाइटी से उनका जिस्म साफ़ दिखाई दे रहा था.
बुआ कमरे में पानी लेकर वापस आईं तो हम बैठ कर आपस में बातें करने लगे.
बुआ, लगता है तुम शहर में कसरत करते हो?
में: हाँ, बुआ रोज सुबह उठकर में सबसे पहले कसरत करता हूँ.
बुआ: तभी तुम्हारे शरीर का हर अंग काफ़ी तगड़ा और तंदरुस्त है. मैंने दोपहर में तुम्हारे अन्दर का अंग भी देखा था, बाक़ी के मर्दो से मोटा, लम्बा और तन्दरुस्त है!
बुआ की बात सुन कर मैंने शर्माने का नाटक करते हुए कहा, बुआ आप भी तो बहुत सुन्दर हो! और आपका बदन भी किसी से कम नहीं है.
बुआ मुझे झूठा मत चढ़ाओ! तुमने तो अभी तक मेरा पूरा बदन देखा ही कहाँ है?
मैं बोला, आपने मुझे तो दिखाया ही नहीं? और मेरे निचले हिस्से का दर्शन कर लिया!
उन्होंने कहा- मुझे भी अच्छी तरह से कहा तुम्हारा नीचे से दर्शन हुआ. अगर तुम मुझे अपने नीचे का हिस्सा दिखाओ तो में भी तुम्हें अपने बदन का निचला हिस्सा दिखा सकती हूँ.
मैंने बुआ के मुँह से यह सुनते ही अपनी लुंगी से लण्ड निकाला और उन्हें दिखा दिया. बुआ ने भी उसके तुरंत बाद अपनी नाईटी ऊपर कर मुझे अपनी चूत दिखाई और बोलीं, खुश हो अब!
उनकी मखमली चूत को देखते ही मेरा लण्ड खड़ा होकर आसमान मापने लगा. कुछ देर बुआ ने उसे ऐसे ही देखा और मेरे पास आकर एक झटके से मेरी लुंगी खोल दीं और अपनी नाईटी उतार कर मेरे सामने नंगी हो गईं.
अब उन्होंने पलंग पर बिठाया तो में सामने बुआ की मस्त रसीली चुचियों को देखा रहा था और मेरा लण्ड अपने पूरे जोश में उनकी चूत को सलामी दे रहा था.
बुआ मेरी दोनों जाँघों के बीचमें आकर मेरे लौड़े को सहलाने लगी और अपना सर नीचे झुककर अपने रसीले होंठों से मेरे सुपाड़े को चूमा और मुँह मे भर लिया.
मैं एकदम से चौंकते हुए बोला, यह क्या कर रही हो? तुमने मेरा लण्ड मुँह मे क्यों ले लिया है?
बुआ ने मादक अंदाज में मेरी और देखते हुए कहा- इसको चूसकर इसका रस निकालने के लिए, तुम बस लण्ड चूसाई का मज़ा लो. अगर एक बार मुझसे चूसवा लोगे तो हर बार चुसवाए बिना नहीं रहोगे.
बुआ अब मेरे लण्ड को लोलीपॉप की तरह मस्ती से चूसने लगी. उधर मुझे लण्ड चूसवाने मे कितना मज़ा आ रहा था वह बता नहीं सकता.
बुआ अपने रसीले होंठ मेरे लण्ड पर रगड़ती तो कभी अपना होंठ गोल कर मेरा पूरा लण्ड अपने मुँह में लेकर मेरे आण्ड को सहलाते हुए, सिर ऊपर नीचे कर चूसने लगती जैसे मेरे लण्ड को चोद रही हो.
अब में अपने होश खो बैठा और मैंने भी अपनी कमर हिला कर बुआ का मुँह को चोदना शुरु कर दिया.
मैं तो अब मानो सातवें आसमान पर पहुँच गया और बुआ ने अपने हाथों से मेरे चूतड़ को जकड़ लिया और अपना सिर ऊपर-नीचे करना शुरु कर दिया.
मैंने उनके सिर को पकड़ा और लण्ड पेलते हुए जोश में आकर उनके मुँह में ही निकल गया. मेरा पानी इतना तेज़ी से निकला कि बुआ के मुँह से बाहर निकल कर उनके ठुड्डी से टपक कर चुचो पर गिरने लगा.
झड़ने के बाद मैंने अपना लण्ड निकाल कर बुआ के गालों पर रगड़ना शुरू किया तो देखा की मेरा वीर्य उनके मुँह गाल होंठ से होकर रसीली चुचियों पर चमक रहा था.
बुआ ने अपनी गुलाबी जीभ होंठों पर फिराते हुए वीर्य को चाटते हुए अपनी हथेली से चुचियों को मसलते हुए कहा- क्यो मज़ा आया लण्ड चुसवाने मे!
मैंने कहा- बुआ मजा तो कम है तुमने तो मुझे जन्नत की सैर करवा दी!
बुआ बोली, अब तुम्हारी बारी है मुझे जन्नत की सैर करवाने की.
मैंने कहा- क्या मतलब? मैं कैसे आपको जन्नत की सैर करवाऊगा !
बुआ बोलीं, मेरी चूत चाटकर! इतना कहकर वह खड़ी होकर अपनी चूत मेरे चेहरे के पास लाकर मेरे होंठों होंठों से छुआकर मेरे सिर को पकड़ कर, अपनी कमर आगे पीछे करते हुए अपनी चूत मेरे नाक पर रगड़ने लगी.
में अब जोश में आ रहा था और उनकी रसीली चूत को चाटते हुए उनके दोनों चुतड़ो को अपने हाथो से पकड़कर उनकी चूत में घुसने की नाकाम कोशिश करने लगा और अपनी जीभ से उनकी रानों को भी चाटने लगा.
बुआ अपनी चूत की इस चटाई से मस्ती से भर गई और सिसकारी लेकर चूत को पूरा फैलाकर कहा जीभ से चाटो मेरे राजा! अपनी जीभ मेरी चूत में अंदर तक डाल दो और जीभ से चोदो!
उनकी नशीली चूत की खुशबू और उनकी मादक अदाओ और सिसकारियो ने मुझे पागल कर दिया और मैंने उनकी चूत को चाटते हुए ही उन्हें खींच कर पलंग पर बैठा दिया.
अब मैंने उनकी जाँघों को फैला कर अपने दोनों कंधो पर रख लिया और उनकी चूत के होंठों को जीभ से चाटने के साथ चुबलाने लगा.
बुआ अब मस्ती में आ गई और अपने चूतड़ आगे खिसका कर अपने दोनों पैरों से मेरे सिर को अपनी चूत से भिड़ा दिया तो उनके चूतड़ पलंग से बाहर हवा मे झूल रहे थे और उनकी मखमली जाँघों का पूरा दबाव मेरे कंधो पर था.
मैंने अपनी पूरी जीभ को उनकी चूत में डाल दिया और चूत की गरम हो चुकी अंदरूनी दीवारों को जीभ से सहलाते हुए उनका रस पीने लगा.
बुआ मस्ती से अपने चूतड़ उठा-उठा कर अपनी चूत मेरी जीभ पर दबाने लगी. हाय! राजा, अपनी जीभ को अ..न्दर-बाह..र करो! चो…दो रा…जा चोद…ओ! अपनी जी…भ डा…ल दो!
उनके इन कामुक सिसकियों से मुझे भी जोश आ गया और में भी बुआ जी की चूत में, जल्दी जल्दी जीभ अन्दर-बाहर कर चोदने लगा. जिं…दगी भर चुदा…ऊँगी तुझ…से! अह्हह! उईई माआ!’
वो अब झड़ने वाली थीं. मैं अपनी जीभ लप-लपा कर उनकी चूत चाट रहा था मेरी जीभ बुआ जी की भगनाशा से टकराई और बुआ का बाँध टूट गया और उन्होंने अपनी चूत को मेरे मुँह से चिपका दिया.
कुछ ही देर में उनका अमृत कलश झलककर बहने लगा और, मैं उनकी चूत की दोनों फाँकों को मुँह मे दबा कर उनका वह अमृत-रस पीने लगा.
बुआ का अमृत पीते ही मेरा लण्ड लोहे की रॉड बन गया और अपने लण्ड को सहलाते हुए बुआ को पलंग पर सीधा लेटा कर उनके ऊपर चढने लगा.
उन्होंने मुझे रोकते हुए कहा, चूत का मज़ा तो तुम चूस कर ले चुके हो! अब मैं तुम्हें दूसरे छेद का मज़ा दूँगी.
मैंने कहा- में समझा नहीं ?
बुआ बोलीं- उन्होंने उठ कर बैठते हुए मेरे लंड को सहलाते हुए अपनी चुचियों में रगड़ते रगड़कर पूरा खड़ा किया और बोली तुम अपने मोटे लंड को मेरी गांड में डालकर मुझे जमकर चोदो.
मैं हैरान होकर बोला! बुआ इतना मोटा लण्ड तुम्हारी छोटी सी गांड में कैसे जाएगा?
बुआ बोलीं- अरे मेरे राजा गांड मे ही जाएगा, बस तुम्हें थोड़ी ज़्यादा मेहनत करनी होगी.
बुआ ने ऐसा कहा और ढेर सारा थूक मेरे लण्ड पर लगा कर उसकी मालिश करते हुए बोली गांड चूत की तरह पानी नहीं छोड़ती इसलिए ज़्यादा घर्षण होता है और, लण्ड को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है.
गांड मारने में मारने वाले और मरवाने वाले दोनों को बहुत तकलीफ़ होती है. पर थोड़ी देर बाद दोनों को मजा भी बहुत मजा आता है. लेकिन गांड मारने से पहले उसकी तैयारी करनी पड़ती है.
मैंने कहा- क्या और कैसे? बुआ मुस्कुरा कर पलंग से उतरीं ड्रेसिंग टेबल से वेसिलीन की शीशी लेकर आई और उसका ढक्कन खोल वेसिलीन अपने हाथों में लेकर मेरे लौड़े को पूरा चिकना कर दिया.
अब वो कुतिया बन गई और वेसिलिन मुझे देते हुए उनके गांड के छेद को उससे अच्छे से चिकनी करने के लिए कहा. मैंने ढेर सारी वेसिलीन लेकर उनकी गांड की दरार में लगा दिया.
बुआ बोली- अरे मेरे सैंया! ऊपर से कुछ नहीं होगा उंगली से लेकर अन्दर पेल कर छेद को चिकना करते हुए ढीला करो.
मैंने उँगली पर वेसिलीन लगा कर, उनकी गांड में घुसाने की कोशिश की लेकिन मेरी कोशिश बेकार हो गई लेकिन मैंने हार नहीं मानी और दुसरे हाथ से उनके गांड के छेद को फैला कर उंगली से जोड़ लगाया तो थोड़ी सी उंगली उनकी गांड में घुस गई.
मैंने उँगली को थोड़ा बाहर निकाल कर जोड़ से झटका दिया तो, पूरी उंगली गांड में धंस गई और उनकी गांड एकदम टाइट हो गई और मेरी उंगली बाहर आने लगी.
में अब वेसिलिन लगाता और अपनी उँगली को उनकी गांड के छेद में अन्दर-बाहर करने लगा. मुझे थोड़ी देर में इस काम में मजा आने लगा.
साथियो कहानी जारी रहेगी. आगे की कहानी के लिए अगले भाग का इंतजार करे और ऐसी ही मस्त स्टोरी के लिए पढ़िये freesexstory.online पर.
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