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गाँव की गोरी और शहर का डॉक्टर-1

by mahesh srivastava
June 20, 2026
in Office Sex
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गाँव की गोरी और शहर का डॉक्टर-2

June 15, 2026

आज की इस कहानी में एक डॉक्टर साहब गाँव में रहने वाली गोरी को अपना दिल दे बैठे लेकिन उनकी बदकिस्मती ने पहले उन्हें उससे दूर कर दिया पर वक्त के साथ हालात ऐसे बदले कि साहब और उस गोरी को इतना करीब ले आया कि वे दोनों दो जिस्म से एक जान हो गए..

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम महेश है और एमबीबीएस की डिग्री मिलने के साथ ही मेरी पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के एक गाँव में हो गई। एक ऐसे गांव में जहाँ पर गाँव वासियों ने अपने जीवन में गाँव में पहली बार किसी डॉक्टर को अपने यहाँ देखा था। मेरी पोस्टिंग से पहले वह गाँव नीम हकीम, ओझाओं और झाड़ फूँक करने वालों के हवाले ही था।

नौकरी के कुछ दिनों बाद ही मेरी मेहनत और व्यवहार से लोग भगवान की तरह मेरी पूजा करने लग गए, अस्पताल में हर दिन काफ़ी मरीज़ आते थे। गाँव वाले अब हर छोटी-बड़ी सलाह के लिए भी मेरे पास आने लगे। मैं भी अपने मरीज़ों को आने के लिए कभी मना नहीं करता था!

गाँव से थोड़ा बाहर की और मेरा बंगला था और उसी बंगले में मेरी एक डिस्पेन्सरी भी थी। इस गाँव में लड़कियाँ और औरतें बहुत ही सुन्दर-सुन्दर थीं। उन्ही में से एक बहुत ही ज़्यादा ख़ूबसूरत लड़की थी उसी गाँव के मास्टर जी की।

उसका नाम गोरी था। सच कहूँ तो उसकी खूबसूरती देखते ही मेरा दिल उस पर आ गया था परंतु शायद मेरी जिंदी में कुछ और ही होना घटना घटित होनी थी ऐसा इसलिए क्योंकि गाँव के ठाकुर के बेटे का भी दिल उस पर आया और उन दोनों की शादी हो गई। इस जोड़ी का कहीं कोई मेल नहीं था क्योंकि कहाँ एक बहुत ही सुंदर बदन की मलिका गोरी और कहा एक सूखा सा मरियल सा राजन!

सच कहु तो मुझे तो उसके मर्द होने पर भी शक़ था। और बीतते वक्त के साथ-साथ मेरी मन की बात सच निकली!

ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि उनकी शादी के साल भर बाद एक दिन ठकुराइन मेरी डिस्पेन्सरी में आई, और उसने मुझसे वचन लेते हुए कहा कि उसे यह चिंता खाए जा रही है की बहू को बच्चा नहीं हो रहा।
उसने मुझसे इस बारे में पूछा कि क्या गड़बड़ हो सकता है, बेटा-बहू उसे इस बारे में कुछ बताते नहीं हैं और उसे शक है कि कहीं उसकी बहू बाँझ तो नहीं?

मैंने ठकुराइन को कहा की वो अपने बेटा-बहू को मेरे पास भेज दें तो मैं देख कर बता सकता हूँ कि क्या गड़बड़ है। ठकुराइन उसने मुझसे आग्रह किया मैं यह बात अपने तक ही रखू  क्योंकि यह घर की इज़्ज़त का मामला है।

फिर एक रात क़रीब शाम को राजन और गोरी दोनों आए। गोरी को देखकर ऐसा लगा जैसे बेचारी के साथ बहुत ही अन्याय हुआ है कहाँ वो लंबी, लचीली एकदम भरे बदन की गोरी, बला की ख़ूबसूरत लड़की और कहाँ वो राजन, काला कलूटा मारियल सा।
वे धीरे-धीरे अक्सर इलाज के दौरान मुझसे खुलते गये. राजन बहुत नर्म दिल इंसान था। उसे गोरी को ज़रा सा भी दु:ख देना मंज़ूर ना था। उसने एक दिन दबी ज़ुबान से स्वीकार किया वह अभी तक अपनी बीवी को चोद नहीं पाया है, अब मैं समझ गया कि आख़िर उसे बच्चा क्यो नहीं हो रहा है.

अचानक से मेरे मन मैं एक ख्याल आया और मुझे मेरी दबी हुई हसरत को पूरा करने का एक हसीन मौक़ा दिखा; वह था गोरी का कौमार्य लूटने का। राजन जब भी गोरी के सुन्दर और तराशे हुए नंगे जिस्म को देखता था तो वह अपने ऊपर काबू नहीं रख पाता और गोरी के सेक्स के लिए तैयार होने से पहले ही राजन उसपर टूट पड़ता था।

राजन इतना कुरूप सा था उसे देख कर गोरी बुझ सी जाती थी और जैसे ही वह अपने लण्ड को गोरी की छूत में घुसाने की कोशिश करता वैसे ही गोरी दर्द से चिल्लाने लगती थी और गोरी को चिल्लाते देख बेचारा राजन सब्र कर लेता था फिर।

सारी समस्या समझने के बाद मैंने एक दिन ठकुराईन और राजन को बुलाया और उन्हें बताया कि ख़राबी उनके बेटे में नहीं बल्कि बहू में है और उसका इलाज करना होगा। सिर्फ़ एक छोटा सा ऑपरेशन और बस… आपकी बहू ठीक हो जाएगी।

ठकुराईन यह सुनते ही खुश हो गई पर राजन ने बाद में मुझसे पूछा- डॉक्टर साहब। आख़िर कोनसा ऑपरेशन करना होगा?
“मैंने कहा राजन, बताना ज़रूरी है, नहीं तो बाद मैं तुम कुछ और समझोगे।”
“हाँ! हाँ! बोलिये डॉक्टर साहब?”
“मैंने कहा राजन, ऑपरेशन करके तुम्हारी बीवी का गुप्ताँग थोड़ा सा खोलना होगा! तभी तुम उससे संभोग कर पाओगे और वो माँ बन सकेगी।”
“राजन ने कहा क्या? क्या यह ऑपरेशन आप करेंगे और मेरी बीवी को आपके सामने नंगी लेटना पड़ेगा?”
“मैंने कहा हाँ यह मेरी मजबूरी है, पर तुम उसकी जवानी का मज़ा ऑपरेशन के बाद ही लूट पाओगे, वरना सोच लो तुम्हारी उम्र यू ही निकल जाएगी और वो कुँवारी ही रहेगी।”

यह सुनते ही राजन तुरंत तैयार हो गया- प्लीज! डॉक्टर साहब, कुछ भी कीजिए, चाहे ऑपरेशन कीजिए, या कुछ और परंतु कुछ ऐसा कीजिए कि मैं उसके साथ वो सब कर सकूँ और हमारा आँगन बच्चे की किलकारी से गूँज उठे। नहीं तो मैं तो गाँव में किसी को मुँह नहीं दिखा सकूंगा! मेरे खानदान की इज़्ज़त का मामला है डॉक्टर साहब। यह कहते हुए उसने अपने हाथ जोड़ लिए.

“मैंने कहा ठीक है! घबराओ नहीं, और अपनी पत्नी को मेरे क्लिनिक में भर्ती कर दो। ऑपरेशन के दो चार दिन में जब वो ठीक हो जाएगी तो वह घर आ जाएगी। तो बस फिर तुम उसके साथ मौज करना।”
और अगले ही दिन गोरी मेरे घर पर आ गई, वह अच्छी और मिलनसार थी, और मेरे साथ खुल सी गई थी। पर जब वो मेरे सामने होती थी तो मेरा अपने ऊपर काबू रखना मुश्किल हो जाता था। क्योंकि वह बला की कमसिन थी, जवानी तो फूट फूट कर भरी थी उसके बदन में।

मेरा लण्ड था कि नारी बदन देखते ही खड़ा हो जाता था। दूसरा यह कि मेरा लण्ड बहुत बड़ा है जब वो पूरी तरह खड़ा होता है तो क़रीब 8″ लंबा होता है और उसका सूपड़ा ऐसे कड़ा हो जाता है बिल्कुल टमाटर की तरह। और उसके पीछे लंबा और पत्थर की तरह कड़ा एकदम सीधा लंबा सा खीरे जैसा मोटा सा लण्ड!

गोरी को मेरे घर आए दिन बीत गया और क्लिनिक बंद करके रात्रि भोजन के बाद मैंने गोरी से कहा कि मुझे उससे कुछ ख़ास बातें करनी हैं उसके केस के बारे में! इसलिए वो अंदर मेरे रूम में आ जाए।

गाँव की एक साधारण वधू की तरह वो मेरे सामने बैठी थी। कपड़ों में लिपटी हुई भी वो कितनी कामवासना जगाने वाली थी।

मैंने उससे कहा “गोरी मैं जानता हूँ कि जो बातें मैं तुमसे करने जा रहा हूँ, हो सकता है वह तुम्हें ग़लत लगे, पर तुम्हारे केस को समझने के लिए और उसके सही इलाज के लिए मेरा जानना ज़रूरी है, और अकेले होने के कारण तुम सच-सच बताओगी। अब मैं तुमसे जो पूछूँ, उसका ठीक-ठीक जवाब देना।”

“तुम्हारे पति ने मुझे सब बताया है कि क्यों तुम दोनों का बच्चा नहीं हो रहा है।”
“क्या बताया उन्होंने डॉक्टर साहब?”
“राजन कहता है कि तुम माँ बनने के काबिल ही नहीं हो।”
“डॉक्टर साहब, वो मुझसे भी यह कहते हैं और जब मैं नहीं मानती तो एक-दो बार उन्होंने मुझे मारा भी है।”
“तो तुम्हें क्या लगता है कि तुम माँ बन सकती हो?”

“हाँ! डॉक्टर साहब, मेरे में कोई कमी नहीं है। मैं तो माँ बन सकती हूँ।”
“तो क्या राजन में कुछ ख़राबी है।”
“हाँ! डॉक्टर साहब, … वो … उनसे होता नहीं।”
“क्या नहीं होता राजन से?”
“वो साहब … वो …”
“हाँ हाँ, बोलो गोरी, देखो मुझसे कुछ छुपाओ मत! मैं डॉक्टर हूँ और डॉक्टर से कुछ छुपाना नहीं चाहिए।”
“डॉक्टर साहब, मुझे शरम आती है कहते हुए! आप पराये मर्द हैं ना।”

मैं उठा, कमरे का दरवाज़ा बंद कर खिड़की में भी चिटकनी लगाई और कहा- लो अब मेरे अलावा कोई सुन नहीं सकता … और मुझसे तो शरमाओ मत, हो सकता है तुम्हारा इलाज करने के लिए मुझे तुम्हें नंगी भी करना पड़े। तुम्हारी सास और पति से भी मैंने इस बारे में कह दिया है, उन्होंने कहा है कि मैं कुछ भी करूँ पर उनके खानदान को बच्चा दे दूं इसलिए मुझसे मत शरमाओ।” “डॉक्टर साहब, वो मेरे साथ कुछ कर नहीं पाते।”
“क्या?” मैंने अनजान बनते हुए कहा क्योंकि मुझे गोरी से बात करने में बड़ा मज़ा आ रहा था। मैं उस गाँव की युवती को कुछ भी करने से पहले पूरा खोल लेना चाहता था।

“वो … वो मेरे… साथ मेरी योनि में डाल नहीं पाते।”
“ओह … यूँ कहो ना कि वो तुम्हें चोद नहीं पाते।”
“हाँ, राजन कह रहा था कि तुम्हारी योनि बहुत संकरी है।”
“तो क्या आज तक उसने कभी भी तुम्हारी योनि में अपना लंड नहीं घुसाया?”
“मेरे इतना कहते ही उसने अपनी नज़रे झुकाते हुए कहा- नहीं डॉक्टर साहब!”

“तो क्या तुम अभी तक कुँवारी ही हो? तुम्हारी शादी को तो साल भर से ज़्यादा हो चुका है.”
“हाँ साहब! वो कर ही नहीं सकते, मैं तो तड़पती ही रह जाती हूँ।” यह कहते कहते गोरी रुआंसी हो उठी।
“पर वह तो कहता है कि तुम सहन नहीं कर पाती हो? और चीखने-चिल्लाने लगती हो।”
“साहब वो तो हर लड़की पहली बार में चीखती-चिल्लाती है। पर यह तो मर्द को सोचना चाहिए कि वह उसकी एक ना सुने और अपना काम करता रहे। पर ये तो कुछ कर ही नहीं सकते… ऊपर से इनका शरीर भी सूखा सा तो हैं।”

मैंने कहा “पर वो तो कहता है कि तुमको संभोग की इच्छा ही नहीं होती?”
इसपर गोरी ने कहा “ वो झूठ बोलते हैं साहब! दुनिया में किस लड़की की इच्छा नहीं होती कि कोई हट्टा कट्ठा मर्द आए और उसे प्यार से लूट ले, पर उन्हें देखते ही मेरी सभी इच्छा ख़त्म हो जाती है।”

मैंने कहा “पर गोरी मैंने तो उसका काम अंग (लंड) देखा है, ठीक ही है उसे देखकर तो लगता है कि वो संभोग कर तो सकता है. कहीं तुम्हारी योनि में ही तो कुछ समस्या नहीं?”
गोरी ने कहा “नहीं साहब नहीं, आप उनकी बातों में ना आइए, शादी से पहले तो वे हमेशा मेरे आगे पीछे घूमते थे कि मुझसे सुन्दर गाँव में कोई नहीं! पर शादी के बाद अब!” कहते हुए वह रोने  लगी।
“आप ही बताइए डॉक्टर साहब, मैं उनके रहते हुए, शादी के एक साल बाद भी कुँवारी हूँ परंतु फिर भी उस घर में सभी लोग मुझे ही ताना मारते हैं।”
“अरे नहीं गोरी.” मैंने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा- अच्छा! मैं सब ठीक कर दूँगा।

“अच्छा चलो तुम यहाँ बिस्तर पर लेट जाओ, मुझे तुम्हारा चेकअप करना होगा”
गोरी ने शर्माते हुए अपनी नजरे नीचे कर कहा “क्या देखोगे डॉक्टर साहब?”
“तुम्हारे बदन की जाँच तो करनी होगी।”
उसने नीचे देखते हुए कहा “जीईई? आपको जो भी देखना है ऊपर से ही देख लीजिए ना डॉक्टर साहब!”

मैंने कहा “तुम तो बहुत ही ज़्यादा खूबसूरत लगती हो, लगता है जैसे सामने एकदम काम की देवी खड़ी है! तुम्हें देख कर तो कोई नामर्द भी पागल हो जाए। लेकिन मुझे देखना यह है कि इसके बावजूद भी आज तक तुम कुँवारी कैसे हो। चलो लेटो बिस्तर पर और अपनी साड़ी उतारो।”
“जजज्ज़ई डॉक्टर साहब। मु… मुझे शर्म आती है!”
“डॉक्टर से शरमाओगी तो इलाज कैसे होगा?”

वो हिचकते हुए बिस्तर पर लेट गई, मैंने उसे साड़ी उतारने में उसकी मदद की और साड़ी उतारने के साथ ही एक खूबसूरत जिस्म मेरे सामने सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने बिस्तर पर था… जिसे देखते ही मेरे लंड में अचानक से हलचल होने लगी, मैंने जांच करने के लिए उसका पेटीकोट थोड़ा ऊपर को सरकाया और अपना एक हाथ अंदर डाला।
मेरी ख़ुशनसीबी देखो कि वो नीचे से पूरी तरह से नंगी थी।

इस कारण से मेरा हाथ सीधा ही उसकी छूत से टकराया. मैंने तुरंत ही एक उंगली से उसकी चूत को सहलाया, उसकी चूत के होंठ बहुत ही ज़्यादा टाइट थे, मैंने छूत की दरार पर उंगली घुमाने के बाद अचानक हल्का ज़ोर लगाते हुए अपनी उंगली अंदर घुसा दी। जैसे ही मेरी उँगली उसकी चूत में गई वैसे ही वह सिसक उठी और अपनी जाँघों से मेरे हाथ पर हल्का सा दबाव डालते हुए हल्की सी उछली… इसी के साथ एक उसके मुँह से एक हल्की सी सिसकारी निकली।

मेरी पूरी उँगली थोड़ी बहुत मुश्किल के बाद उसकी छूत में घुसी, मैंने मोके का फ़ायदा उठाते हुए अपनी उंगली को गोरी की छूत में अंदर-बाहर करना शुरू किया। गोरी साल भर से सेक्स के लिए तड़प रही थी, शायद यही कारण था कि मेरी इस हरकत ने उसे गर्म करना शुरू कर दिया।
मैंने उसकी हरकतों को देखते हुए उसे उत्तेजित करने के लिए बीच की एक उंगली से उसे छेड़ते हुए बाक़ी उंगलियों को उसकी चूत से गांड के छेद तक के रास्ते पर फिराना शुरू कर दिया था।

अब मैंने गोरी से कहा “मेरी उँगलियों से तुम्हें कैसा महसूस हो रहा है? अच्छा लग रहा है?”
“हाँ! डॉक्टर साहब।”
मैंने फिर अगला सवाल पूछा “क्या तुम्हारा पति ऐसा करता था? क्या वह तुम्हें उत्तेजित करने के लिए तुम्हारी चूत में इस तरह उंगली डालता था?”
“नहीं डॉक्टररर साहब…” गोरी ने कामुक आँह भरते हुए छटपटाते हुए अपनी लाल हो चुकी आँखों से मेरी और देखते हुए कहा।

“अगर तुम्हें छोड़ने से पहले तुम्हारा पति अगर मेरी तरह तुम्हारी छूत में उँगलियों से अक्सा करे तो तुम्हें अच्छा लगेगा?”
“हाँ अम्म … वे तो ऐसा कुछ जानते ही नहीं और अपना पूरा दोष मेरे माथे पर ही मढ़ रहे हैं।”
मैंने उसे और अधिक उत्तेजित करने के लिए कहा “अगली बार जब अपने पति के पास जाना तो यहाँ अपनी छूत पर एक भी बाल नहीं रखना, ऐसा करने पर तुम्हारे पति को बहुत अच्छा लगेगा और वह तुम्हारे ऊपर ज़रूर चढ़ेगा।”
मुझे देखते हुए गोरी ने कहा “अच्छा डॉक्टर साहब।”
“जाओ उधर बाथरूम में सब काट कर आओ। मैंने बाथरूम की और इशारा करते हुए गोरी से कहा कि वहाँ रेजर रखा हुआ है। तुम जानती तो हो ना कि सफ़ाई कैसे करनी  है? तुम्हें चुदाई करने से पहले इसे सज़ा कर अपने पति के सामने पेश करना चाहिए।”
मैंने उसकी आँखों में आँखे डालते हुए गोरी की चूत को खोदते हुए कहा।
इसपर गोरी ने धीरे से कहा “हाँ। डॉक्टर साहब, लेकिन उन्होंने तो कभी भी मुझे बाल साफ़ करने के लिए नहीं कहा।”

वो गई और करीब 10-12 मिनट बाद वापस मेरे बेडरूम में आ गई।
“हो गया?”
मैंने उसकी शरम को दूर करने और उसकी चूत को देखने के लिए उत्सुकता से कहा “तो तुम्हें रेजर इस्तेमाल करना आता है, कहीं उस नाज़ुक जगह को काट तो नहीं बैठी हो?”

उसने जमीन की और देखते हुए कहा “जी जी सही से कर दिया, शादी से पहले मैंने कई बार रेजर पहले भी इस्तेमाल किया है।”
“अच्छा आओ फिर यहाँ लेट जाओ।”

वो आई और तुरंत ही बिस्तर पर लेट गई, पिछली बार की तुलना में इस बार उसका प्रतिरोध काम था।
मैंने उसके लेटते ही उसके पेटीकोट के नाड़े को पकड़ते हुए खींचना शुरू किया और उसका पेटीकोट खुल गया। उसकी कमर बहुत ही ज़्यादा पतली और आकर्षक थी और हिप्स का तो पूछो ही मत उसे देखते ही मेरा लंड बेकाबू होने लगा। उसकी जाँघों पर ख़ूब मांसलता थी, जो परफेक्ट गोलाई और मादकता लिए हुए थी। उसके विशाल पुट्ठे के सुन्दर कामुक दृश्य ने मेरा स्वागत किया।

उसने भी तुरंत ही मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा डॉक्टर साहब, ये क्या कर रहे हैं? आप तो मुझे नंगी कर रहे हैं!
मैंने उससे कहा “अरे पहले देख तो लूं कि तुमने बाल ठीक से साफ़ किए भी या नहीं! और फिर बाल काटने के बाद वहाँ पर एक क्रीम भी लगानी है।”

अब इससे पहले कि वह कुछ बोलती या करती, मैंने उसके पेटीकोट को उसके घुटनों से नीचे तक खींच लिया था। और वहाँ का नज़ारा – उसके बारे में तो पूछो ही मत दोस्तों। इस दृश्य को देखते ही मेरे मुँह से अचानक से निकल गया – अति सुन्दर! बला की कामुक!
“तुम तो बहुत खूबसूरत हो गोरी।”

मेरी इस तारीफ़ ने उसके हाथों के ज़ोर को तुरंत ही कम कर दिया और उसी का फ़ायदा उठाते हुए मैंने उसका पूरा पेटीकोट खींच डाला और उसे दूर कुर्सी पर फेंक दिया।
यक़ीन मानो दोस्तों उसे इस तरह से देखते ही मुझे ऐसा लगा कि अभी उस पर चढ़ जाऊं। उसका वह पतला सपाट सा पेट, और छोटी सी कमर, ऊपर से उसके विशाल नितंब। अब उसका बदन मेरे सामने सिर्फ़ एक ब्लाउज पीस में रह गया था! जिसका की मैंने अच्छी तरह से निरीक्षण किया।

मेरे इस तरह से उसके बदन को निहारने पर उसने शर्म के मारे अपनी आँखों पर हाथ रख लिया और तुरंत ही पेट के बल हो गई जिससे कि में उसकी चूत न देख सकूँ।
शायद स्त्री होने के कारण अपनी चूत को मुझे दिखाने में शर्मा रही थी।

मैंने उससे कहा “ज़रा पल्टो गोरी! शर्म नहीं करते. फिर तुम तो इतनी सुन्दर हो कि तुम्हें तो अपने इस मस्त और किसी भी मर्द को पागल कर देने वाले बदन पर गर्व होना चाहिए।”
“नहीं डॉक्टर साहब, पराए मर्द के सामने मुझे बहुत शर्म आ रही है।”
“पल्टो ना गोरी!” इतना कहकर मैंने उसके पुटठों पर हाथ रखा और अपना जोड़ लगाते हुए उसे पलटा। मेरे ऐसा करते ही खूबसूरत जाँघों के बीच में उसकी वह कुँवारी चूत चमक उठी। गोरी की गोरी और गुलाबी चूत!! उसकी चूत की दोनों पंखुड़ियाँ फड़क सी रही थी। शायद उसे भी यह अनुमान लग गया था कि किसी मस्त से लंड को उसकी चूत की खुशबू लग गई है, यह शायद यही कारण था की उसकी चूत पर थोड़ी सी लाली छा गई थी।

इधर उसे इस अवस्था में देखते ही मेरे लंड में भूचाल सा आ रहा था और मेरे अंडरवीयर के लिए मेरे लंड को कन्ट्रोल में रखना मुश्किल सा हो रहा था किंतु इन सबके बावजूद भी मेरे टाइट अंडरवीयर ने मेरे लंड को छिपा रखा था।
मुझसे अब रुका नहीं जा रहा था और मैंने उत्तेजना के उस स्थिति में उसकी चूत पर उंगलिया फिराते हुए उससे पूछा- गोरी, क्या राजन तुम्हें यहाँ पर, मेरे कहने का मतलब कि तुम्हारी चूत पर चूमता है?
मेरी और उसने शर्माते हुए थोड़ी सी कामुता से देखते हुए कहा “नहीं साहब, यहाँ कैसे चूमेंगे?”
उसके जवाब में मैंने उसके गांड पर हाथ रखते हुए पूछा “तुम्हारे इन पुटठों पर?”
इस पर उसने अपनी नशीली और मादक हो रही आवाज में कहा “नहीं डॉक्टर साहब, आप कैसी बातें कर रहे हैं।” इसी के साथ मुझे यह अनुमान हो रहा था कि एक गर्म युवती अब चुदाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार थी।
“वो तुम्हें कहाँ कहाँ पर छूता है?”
जवाब में उसने इस गर्म होते माहौल में बड़े और कड़क होते हुए अपने चूचे की और इशारा करते हुए कहा “जी, यहाँ पर!” उन्हें ऐसे साँसों के साथ ऊपर-नीचे होते हुए देखकर ऐसा लग रहा था कि अगर जल्दी ही उन्हें ब्लाउज से बाहर नहीं निकाला गया तो कहीं ब्लाउज फट ही न फट जाए। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसने कोई ब्रा भी नहीं पहनी थी।

मैं अब कामवासना की गिरफ्त में आकर बिस्तर पर चढ़ गया। और तुरंत ही अपने दोनों हथेलियों को उसके उसके दोनों मम्मों पर रखने के साथ ही उन्हें कामुक अंदाज में मसलना शुरू किया।
वो तड़पने लगी- डॉक्टररर स्साहहाब क्या कर रहे ए… ए… हैं आप? यह कैसा… इलाज… कर रहे हैं?
मैंने अपनी आँखो से उसे देखते हुए कहा “कैसा लग रहा है गोरी? मुझे अच्छी तरह से देखना होगा कि राजन सही तरीके से करता है या नहीं। वह तो मुझसे कहता है तुम उसके हाथ लगाते ही चीखने लग जाती हो।”
“मुझे आपका ऐसा करना बहुत अच्छा लग रहा है साहब। पर आप से यह सब करवाना क्या अच्छी बात है?”

मैंने गोरी की इन फालतू की बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और उसकी मस्त चूचियों को कभी कोमलता के साथ तो कभी थोड़ा ज़ोर से दबाना जारी रखा ताकि वह पूरी तरह से कामुक होकर चुदने के लिए तड़प उठे।

“हाँह… आपका इनको हल्के-हल्के दबाना बहुत अच्छा लग रहा है।”
मैंने कहा – “क्या राजन भी ऐसे ही मसलता है तेरे इन खूबसूरत और कड़क स्तनों को?”
“नहीं साहब, आपके हाथों में मर्दानी पकड़ है जो उसके हाथों में नहीं।”

यह सुनते ही – “मैंने उसे कमर से पकड़ कर उठा लिया, और यह क्या, उसके बूब्स के भार से अचानक उसका ब्लाउज फट गया और उसके वो कसे-कसे दूध बाहर को उछल कर आ गये, वाह दोस्तों! क्या ख़ूबसूरत कामुक अप्सरा बैठी थी मेरे सामने और वह भी एकदम नग्न अवस्था में, 32-28-34 एकदम दूध की तरह गोरी, बला सी कमसिन।

अब मुझसे इससे ज़्यादा रुकना मुश्किल हो रहा था, अब मैंने उसके मुख को पकड़ते हुए उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया।

इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती, उसके होंठ मेरे होंठो के जकड़ में आ चुके थे। मेरे एक हाथ ने उसके पूरे बदन को मेरे बदन से से लिपटाया तो दूसरे हाथ ने ज़बरदस्ती उसकी जाँघों के बीच से जगह बनाते हुए उसके गुप्ताँग में धीरे-धीरे उंगली डाल दी, उसे जल्द ही पूरी तरह से गर्म करने के लिए मैंने उसकी क्लिटोरिस पर बहुत ही ज़बरदस्त अंदाज़ में उसको मजा देते हुए मसाज़ की, उस उसका परिणाम यह हुआ कि उसके पुट्ठे उठने लगे थे, और वो मेरी इस अदा से मतवाली हो उठी थी।

मैंने उसको परखने के लिए की वह चुदाई के लिए तैयार है या नहीं होंठों को चूमते हुए कहा- कभी राजन ने इस तरह किया तेरे साथ? और हाँ इस बारे में मुझसे बिल्कुल सच कहना गोरी?
“नहीं डॉक्टर साहब, वे तो सीधे ऊपर चढ़ जाते हैं और थोड़ी देर हिल के सुस्त पड़ जाते हैं।”
मैंने उससे कहा “यही तो मुझे देखना है गोरी। राजन कह रहा था कि तुम चिल्लाने लग जाती हो?”
जवाब में उसने कहा “वो तो मेरी प्यास अधूरी रह जाने के कारण होता था.”
“बहुत अच्छा!”

इस बार उसने कहा – “पर अब जाँच पड़ताल ख़त्म हो गई क्या डॉक्टर साहब? आप और क्या क्या करेंगे मेरे साथ?”
उसके जवाब में मैंने उसको परखने के लिए कहा – “अब मैं वही करूँगा जो एक जवान शक्तिशाली मर्द को एक सुन्दर और कामुक खूबसूरत बदन वाली जवान युवती, जो कि उसके सामने बिस्तर पर नंगी पड़ी हो, के साथ उसे करना चाहिए। मुझे ऐसा लगता है जैसे तेरा बदन भी एक साल से तड़प रहा है, और तेरा कौमार्य- वह तो कब से टूटने के लिए बेताब हुए जा रहा है और आज तुम्हारी इस इच्छा को मेरा मर्दाना काम-अंग पूरा करेगा और वह भी रात भर इसी बिस्तर पर!”

मेरे ऐसा कहते ही मेरी उंगली जो कि अभी भी उसकी चूत में थी, उसने अचानक उसने उसमे एक लसलसा सा द्रव्य महसूस किया, जो कि उसका योनि रस था जो की यह बता रहा था कि अब उसकी योनि संभोग के लिए पूरी तरह से तैयार होने है, इसी के साथ मेरी उंगली पूरी तरह से भीग गई थी और रस चूत के बाहर बहकर जाँघों को भी भिगो रहा था।

मेरी इस बात को सुनकर गोरी के बदन में एक तड़प सी हुई और उसके चूतड़ ऊपर को उठे और उसके मुंह से एक सिसकी भरी चीख निकल पड़ी। और उसके तुरंत बाद ही वह थोड़ा संयत होकर बोली- डॉक्टर साहब, पर इससे मैं रुसवा हो जाऊँगी, अगर मेरे मर्द को यह पता चल गया की मिआपके साथ सोई थी तो वह मुझे घर से निकल देगा। आप मुझे जाने दीजिए, मुझे माफ़ कीजिये।

मैंने उसके डर को समझते हुए कहा – “तू अगर मुझे मर्द समझती है तो मुझ पर भरोसा रख, मैं आज तुझे सिर्फ़ भरपूर जवानी का सुख ही नहीं दूँगा बल्कि तुझे तेरी हर मुसीबत से बचाऊँगा। मेरे इस इलाज के बाद तेरा मर्द तुझे और भी ख़ुशी-ख़ुशी रखेगा।”
उसने असमंजस की स्थिति में कहा “वो कैसे डॉक्टर साहब?”
मैंने उसके सवाल का जवाब देते हुए कहा – “क्योंकि आज के बाद वह जब भी चोदने के लिए तेरे ऊपर चढ़ेगा तो वह तेरे साथ संभोग कर सकेगा। जो काम वो तुम्हारी शादी के बाद से आज तक नहीं कर पाया वह… आज के बाद कर सकेगा और तब तू उसके बच्चे की माँ भी बन जाएगी।”
“पर कैसे डॉक्टर साहब। कैसे होगा ये चमत्कार! साहब?”
मैंने उसकी दुविधा को भांपते हुए उसकी फटी चोली को उसके मांसल चूचों से अलग करते हुए उन्हें मसलना शुरू करते हुए कहा कहा “मेरी प्यारी गोरी!” तेरी योनि का द्वार बंद है उसे आज में अपने प्रचंड और भीषण लण्ड से खोल दूँगा ताकि उसके बाद तेरा पति अपना लण्ड उसमें घुसा सके और अपना वीर्य उसमें डाल सके जिससे तू उसके बच्चे की माँ बन सकेगी।

मेरे मसलने से उसके बूब्स फिर से बड़े-बड़े होने के साथ कठोर भी होने लगे थे। उफ़्फ़्!! क्या लगती थी वो अपनी पूरी नग्नता में उन सॉलिड बूब्स पर वो गोल छोटी चूचियां भी बहुत बेचैन कर रही थी मुझे। मेरी बातो से संतुष्ट होने के साथ ही उसका पूरा बदन अब बुरी तरह तड़प रहा था, इसी के साथ उसके नशीले बदन पर पसीने की हल्की छोटी बूँदें भी उभर आई थी। इस एहसास से मेरा लण्ड बहुत ही तूफ़ानी हो रहा था और ऐसा लग रहा था की अब उसके आज़ाद होने का वक़्त आ गया था।

परंतु अगले ही पाल उसने कहा – “डॉक्टर साहब मुझे बहुत डर लग रहा है, मेरी इज़्ज़त से मत खेलिए ना! जाने दीजिए, मेरा बदन उईइ माँ!”
मैंने उसे यकीन दिलाते हुए कहा – “मुझ पर विश्वास करो गोरी … यह एक मर्द का वादा है तुझसे! मैं सब देख लूंगा। तेरा बदन तड़प रहा है एक मर्द के लिए, तेरी चूत का यह बहता हुआ पानी, तेरे कसते हुए बूब्स साफ़-साफ़ यह कह रहे हैं कि अब तुझे एक अच्छी चुदाई चाहिए।”
“साहब।”
“हाँ गोरी मेरी रानी, बोल?”
उसने आँखो में प्रश्न लेते हुए मुझसे पूछा – “मैं माँ बनूँगी ना?”
“हाँ!”
“मेरा मर्द मुझे अपने साथ रख लेगा ना। मुझे मारेगा तो नहीं ना!”
“हाँ गोरी, तू बिल्कुल चिंता ना कर।”

मेरे सवालों से कुछ हद तक संतुष्ट होकर उसने कहा – “तो साहब फिर अपनी फ़ीस ले लो आज रात, मेरी जवानी आपकी है।”
“ओह! मेरी गोरी आ जा!”

कहानी आगे जारी है

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