रीना और पुजारी की चुदाई में आप पढ़ेगे कैसे पति के एक्सीडेंट के बाद उसके और पुजारी के बीच में कैसे सेक्स का कार्यक्रम चालू हुआ और दोनों ने कैसे एक दूसरे को शांत किया।
रीना एक सीधी-सादी, भोली-भाली और भगवान में आस्था रखने वाली 24 वर्ष की महिला थी. शादी के एक साल बाद ही अचानक एक दिन उसके पति का स्कूटर से एक्सीडेंट हो गया और उसकी मृत्यु हो गई.
पति की मौत के बाद वह अपने मम्मी-पापा के साथ रहने लगी. उसके बच्चा न होने के कारण मम्मी-पापा ने उसे शादी के लिए कहा, पर वह अपने पति को भूल नहीं पा रही थी इसलिए उसने मना कर दिया था.
रीना शारीरिक रूप से ज़्यादा खूबरसूरत नहीं थी, उसकी सूरत भोली थी, और ज्यादातर चुप ही रहती थी.
उसका चेहरा गोल, रंग गोरा और लम्बाई लगभग 5 फुट 4 इंच थी, बाल काफी लंबे थे. चूचे भारतीय औरतों जैसे बड़े और कमर लगभग 31-32 इंच थी, चूतड़ गोल और बड़े 37 इंच के थे.
उसके पापा सरकारी कर्मचारी थे और उनका शहर में तबादला होने के कारण वे शहर में आकर रहने लगे, रीना सफेद या फिर बहुत हल्के रंग की साड़ी पहनती थी।
रीना की मम्मी ने भी शहर में एक स्कूल में टीचर की नौकरी कर ली. रीना की सिर्फ़ एक बड़ी बहन थी जिसकी शादी 6 साल पहले हो गई थी.
उनका घर शहर से थोड़ा दूर एक छोटी सी कॉलोनी में था. रोज़ सुबह रीना के पापा दफ्तर और मम्मी स्कूल चले जाते थे. पापा शाम 6 बजे और मम्मी 5 बजे वापस आती थीं.
उनके घर के पास ही एक छोटा सा मंदिर था. उसमे एक 36 साल का पुजारी था जो देखने में गोरा और बॉडी भी सुडौल, लंबाई 5 फुट 9 इंच. उसकी सूरत भी ठीक थी और बाल बड़े थे.
पुजारी का कमरा मंदिर में ही बिल्कुल पीछे था. मंदिर के मुख्य द्वार के अलावा पुजारी के कमरे से एक दरवाज़ा कॉलोनी की पिछली गली में जाता था जो सुनसान ही रहती थी क्योंकि उस गली में अभी कोई घर नहीं था.
एक दिन रीना की मम्मी ने उसे बताया कि पास में एक मंदिर है, उसे पूजा करनी हो तो वहाँ चली जाया करे. रीना बहुत धार्मिक थी और उसका पूजा पाठ में बहुत विश्वास था तो वह रोज़ सुबह 5 बजे उठ कर मंदिर जाने लगी.
पुजारी को लोगो से पता चला कि वह 24 साल की विधवा है. रीना पहले दिन सुबह 5 बजे मंदिर गई तो वहाँ पर सिर्फ पुजारी था. रीना ने सफेद साड़ी ब्लाउज पहन रखा था. पूजा करने के बाद वह पुजारी के पास आई.. और पुजारी के पैर छुए.
पुजारी- जीती रहो पुत्री.. क्या तुम यहाँ नई आई हो..?
रीना- जी पुजारी!
पुजारी- पुत्री.. तुम्हारा नाम क्या है?
रीना- जी, रीना!
पुजारी- तुम्हारे माथे की लकीरों ने मुझे बताया कि तुम पर क्या दुख आया है.. लेकिन पुत्री.. भगवान के आगे किसी की नहीं चलती!
रीना- पुजारी.. मेरा ईश्वर में अटूट विश्वास है.. लेकिन उसके बावजूद उसने मेरा सुहाग छीन लिया..!
ये कहते हुए रीना की आँखों में आँसू आ गए थे.
पुजारी- पुत्री.. ईश्वर की मरज़ी सर्वोच्च है.. इसलिए उसके निर्णय को स्वीकार करने में ही तुम्हारी समझदारी है.
रीना आँसू पोंछ कर बोली.
रीना- मुझे हर पल उनकी याद आती है.. ऐसा लगता है जैसे वो यहीं कहीं हैं.
पुजारी- पुत्री.. धार्मिक और ईश्वर में विश्वास रखने वालो का ख्याल ईश्वर खुद रखता है.. लेकिन कभी-कभी वो इम्तिहान भी लेता है.
रीना- पुजारी.. पता नहीं क्यों? जब मैं अकेली होती हूँ.. तो मुझे डर सा लगता है.
पुजारी- तुम्हारे घर में और कोई नहीं है?
रीना- हैं.. पापा मम्मी है लेकिन सुबह पापा दफ्तर और मम्मी स्कूल चली जाती हैं. फिर मम्मी 5 बजे आती हैं.. इस दौरान अकेले में मुझे बहुत डर सा लगता है.. ऐसा क्यों हैं पुजारी?
पुजारी- पुत्री.. तुम्हारे पति के स्वर्गवास के बाद हवन तो करवाया होगा?
रीना- नहीं.. कैसा हवन पुजारी?
पुजारी- तुम्हारे पति की आत्मा की शान्ति के लिए.. यह बहुत आवश्यक होता है.
रीना- हमें तो किसी ने नहीं बताया पुजारी..
पुजारी- तुम्हारे पति की आत्मा को अब तक शांति न मिलने के कारण वह तुम्हारे आसपास घूमता है इसीलिए तुम्हें अकेले में डर लगता है.
रीना- डरते हुए पुजारी के पैर पकड़, अपना सर उसके पैरों में झुकाते हुए कहा… कृपया आप कुछ कीजिए ताकि मेरे पति की आत्मा को शान्ति मिल सके.
इस अवस्था में पुजारी की नजर रीना की नंगी पीठ पर पड़ी, रीना के ब्लाउज के नीचे नंगी पीठ दिख रही थी.. पुजारी ने सोचा यह विधवा है.. और भोली भी.. इसके साथ बहुत कुछ किया जा सकता है.
पुजारी- पुत्री.. तुम्हारे पति की आत्मा की शांति के लिए तुम्हें मेरे कहे अनुसार एक काम करना होगा
रीना के लिए पुजारी भगवान का ही दूसरा रूप था तो उसने कहा, आप जैसा कहेगे में वैसे ही करूँगी?
पुजारी- पुत्री.. कुछ दिन तक तुम्हें रोज़ हवन करना होगा.. लेकिन वेदों के अनुसार इस हवन में सिर्फ़ स्वर्गवासी व्यक्ति की पत्नी और पुजारी ही बैठ सकते हैं और किसी तीसरे अगर हवन शुरू होने के पश्चात खबर मिल गई तो स्वर्गवासी की आत्मा को शान्ति कभी नहीं मिलेगी.
रीना- पुजारी..आप हमारे गुरू हैं आप जैसा कहेंगे, हम वैसा ही करेंगे. आप बताइए, हवन कब से शुरू करना है और इसके लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?
पुजारी- सामग्री दुर्लभ है लेकिन उसका प्रबंध मैं कर लुगा.. तुम सिर्फ एक नारियल और तुलसी ले आना.
रीना- कब से शुरू करना है?
पुजारी- हवन पवित्र स्थान पर होता है.. जैसे कि मन्दिर.. परन्तु.. यहाँ तो कोई भी तीसरा व्यक्ति विघ्न डाल सकता है. इसलिए हमे हवन को विघ्न से बचाने के लिए मन्दिर के पीछे मेरे कक्ष में करना होगा, इस तरह स्थान भी पवित्र रहेगा और और कोई विघ्न भी नहीं डालेगा.
रीना- पुजारी.. जैसा आप कहें.. किस समय करना है?
पुजारी- मंदिर दोपहर 12 से लेकर 4 बजे तक बंद रहता है.. इस समय में शांति पूर्वक हवन हो सकता है. तुम आज 12 बजे नारियल और तुलसी लेकर पीछे के दरवाज़े से आना ताकि हवन के बारे में लोगो को पता ना लगे.
पुजारी ने रीना को अपने कमरे में से एक दरवाज़ा दिखाया जो कि एक सुनसान गली में निकलता था. उसने गली में ले जाकर रीना को आने का पूरा रास्ता समझा दिया.
पुजारी- याद रहे, ये हवन विधि सबसे गुप्त रहनी चाहिये.. वरना तुम्हारे पति की आत्मा को शान्ति कभी ना मिल पाएगी.
ठीक 12 बजे रीना पुजारी के बताए हुए रास्ते से उसके कमरे के दरवाज़े पर आ गई और खटखटाया.
पुजारी- आओ पुत्री.. किसी को खबर तो नहीं हुई?
रीना- में आपके बताए रास्ते से आई हूँ और मेरे मम्मी-पापा भी जा चुके हैं.
पुजारी ने दरवाज़ा बंद करते हुए कहा, चलो फिर हवन आरम्भ करें.
पुजारी का कमरा छोटा था जिसमे एक खाट.. बड़ा सा शीशा था.. और एक 40 वाट का बल्व जल रहा था.
पुजारी ने कमरे में ईंटों का हवनकुंड बनाया था, उसी में हवन के लिए आग जलाई.. और सामग्री लेकर दोनों आग के पास बैठ गए.
पुजारी मन्त्र बुदबुदाने लगा.. रीना ने सुबह वाली साड़ी ब्लाउज पहना था.
रीना और पुजारी दोनो साथ-साथ चौकड़ी मार के बैठे थे. दोनों की टांगें एक दूसरे को टच कर रही थी.
पुजारी- ये पान का पत्ता दोनों हाथों में ले लो.
रीना ने दोनों हाथ आगे कर पान का पत्ता लिया.. पुजारी ने उसमें थोड़े चावल डाले.. फिर थोड़ी चीनी.. थोड़ा दूध डालते हुए रीना से कहा.
पुजारी- पुत्री.. अब तुम अपने हाथ को मेरे हाथ में रखो.. मैं मन्त्र पढूंगा और तुम्हें पति का ध्यान करना है. वेदों के अनुसार.. तुम्हें ये कहना होगा कि तुम अपने पति से बहुत प्रेम करती हो.. जो मैं कहूँ मेरे पीछे पीछे बोलना.
रीना ने अपने हाथ पुजारी के हाथों में रखते हुए कहा, मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ.
पुजारी- मैं उन पर अपना तन और मन न्यौछावर करती हूँ.
रीना- मैं उन पर अपना तन और मन न्यौछावर करती हूँ.
पुजारी- अब पान का पत्ता मेरे साथ अग्नि में डाल दो.
दोनों ने हाथ में हाथ लेकर पान का पत्ता आग में डाल दिया.
पुजारी- अब मैं तुम्हारे चरण धोऊंगा..रीना ने अपने पैर सीधे किये.. पुजारी ने एक गिलास में से थोड़ा पानी हाथ में लिया और रीना के पैरों को अपने हाथों से धोने लगा.
पुजारी- तुम आँखे बंद कर अपने पति का ध्यान करो.
रीना बंद आँखों से पति का ध्यान करने लगी, पुजारी ने उसके पैर थोड़े से उठाए और हाथों में लेकर पैर धोने लगा.
टांग उठने से रीना की साड़ी के अन्दर उसकी जांघें दिख रही थीं और साड़ी के अन्दर के अँधेरे में उसकी सफेद कच्छी भी हल्की सी दिखाई दे रही थी.
रीना जहाँ आँखें बंद कर अपने पति का ध्यान कर रही थी वही पुजारी का ध्यान उसकी साड़ी के अन्दर के नज़ारे पर था.
पुजारी के मुँह में अंदर का नजर देख पानी आ रहा था.. उसने सोचा लड़की को चोदने के लिए पहले गरम करना होगा. पैर धोने के बाद कुछ देर उसने मन्त्र पढ़े.
पुजारी- पुत्री.. आज इतना ही काफी है.. असली पूजा कल शुरू होगी. कल तुम्हें भगवान शिव को प्रसन्न करना है. जब वो प्रसन्न होंगे तभी तुम्हारे पति की आत्मा को शान्ति मिलेगी. अब तुम कल आना.
अगले दिन..
पुजारी- आओ पुत्री.. तुम्हें किसी ने देखा तो नहीं.. अगर कोई देख लेगा तो तुम्हारी पूजा का कोई लाभ नहीं.
रीना- नहीं पुजारी.. किसी ने नहीं देखा.
पुजारी- पुत्री.. आज तुम्हें शिव को प्रसन्न करना है इसलिए तुम्हें पूरी तरह शुद्ध होना होगा. सबसे पहले तुम्हें कच्चे दूध का स्नान करना होगा. शुद्ध वस्त्र पहनने होंगे.. और थोड़ा श्रृंगार करना होगा.
रीना- श्रृंगार पुजारी?
पुजारी- हाँ.. जब भी पार्वती जी को शिव को मनाना होता.. तो वे भी श्रृंगार करके उनके सामने जाती थी! ऐसा करने पर शिव जल्दी प्रसन्न होते है।
रीना- लेकिन पुजारी.. क्या एक विधवा का श्रृंगार करना सही रहेगा ?
पुजारी- पुत्री.. तुम विधवा सिर्फ़ समाज केलिए हो शिव के लिए तो सभी मनुष्य एक समान है।
रीना- जो आज्ञा पुजारी.
पुजारी- तुम स्नानगृह में जा कर कच्चे दूध का स्नान करो.. मैंने वहाँ पर कच्चा दूध और तुम्हारे वस्त्र दोनों ही रख दिए हैं.
पुजारी ने लाल रंग का ब्लाउज और पेटीकोट बाथरूम में रखा था.. पुजारी ने अलग ब्लाउज रखा था जिसके हुक्स पीठ की साइड में थे उन्हें पहले ही निकाल दिए थे.
रीना दूध से नहा कर सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में पुजारी के सामने आई.. लेकिन उसे इस अवस्था में शर्म आ रही थी तो उसने पुजारी से कहा मुझे इन वस्त्रों में आपके सामने शर्म आ रही है.
पुजारी- नहीं पुत्री.. ऐसा ना बोलो.. ये जोगिया वस्त्र शुद्ध हैं, यदि तुम शुद्ध नहीं होगी, तो शिव प्रसन्न कदापि नहीं होंगे और कहीं ऐसा न हो की शिव नाराज़ हो जाए.
रीना- लेकिन पुजारी..इस.. स्स.. ब..ब्लाउज के हुक्स नहीं हैं.
पुजारी- ओह.. मैंने देखा ही नहीं.. वैसे पूजा सिर्फ़ दो घंटे की ही है.. लेकिन अगर तुम ब्लाउज के हुक्स नहीं होने के कारण पूजा नहीं कर सकती को हम कल पूजा कर लेंगे.. लेकिन इससे हवन खंडित हो सकता है.
रीना- नहीं पुजारी.. पूजा शुरू कीजिये..
पुजारी- पहले तुम उस शीशे पे राखी श्रृंगार सामग्री से श्रृंगार कर लो.
रीना ने लाल लिपस्टिक.. पाउडर.. और थोड़ा परफ्यूम लगाया और पुजारी के पास आकर बैठ गई..
पुजारी- अति सुन्दर पुत्री.. तुम बहुत सुन्दर लग रही हो.
रीना शरमाने लगी.. ये फीलिंग्स उसने पहली बार अनुभव की थीं.
वो दोनों अग्नि के पास बैठे हुए थे.. पुजारी ने मन्त्र पढ़ने शुरू किए.
हवनकुंड की अग्नि से थोड़ी गरमी हो गई थी इसलिए थोड़ी देर बाद पुजारी ने अपना कुरता उतार दिया.. उसकी बॉडी पहलवानों जैसी थी और उनसे रीना को आकर्षित करने के लिए अपनी छाती पूरी शेव कर ली थी. अब वो केवल एक लुंगी में था.
इस अवस्था में पुजारी को देख रीना थोड़ा और शरमाने लगी. दोनों चौकड़ी मार के बैठे थे.
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