मम्मी को चोदकर पापा की कमी दूर की (Mummy Ko Chodkar Papa Ki Kami Dur Ki): इस स्टोरी में पापा की ट्रांसफर के बाद मम्मी को चोदकर उनकी चुदाई की प्यास को दूर करते हुए पापा की कमी को मैंने कैसे दूर किया इसके बारे में बताया है.
दोस्तो, मैं अन्तर्वासना का एक पुराना पाठक हूँ. आज मैंने सोचा कि मैं भी अपनी एक सच्ची कहानी आपके सामने रखूँ!
यह घटना मेरे साथ में उस समय घटी जब मैं 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था और दोस्तों से रोजाना मस्ती भरी बातें सुनता, मुझे शुरू में तो इन सब बातों में उतनी रुचि नहीं थी मगर दोस्तों से चुदाई की बातें सुन-सुन कर मुझे भी चुदाई करने का मन करने लगा.
मैं अपने माँ-बाप का एकलौता बेटा हूँ और अपने माँ-बाप के साथ उनके ही कमरे में उनके साथ ही सोता था. एक रात मैंने नींद में सोते हुए महसूस किया कि बिस्तर कुछ हिल रहा है. तब मैंने आँख खोलकर देखा तो पापा मम्मी के ऊपर चढ़ कर मम्मी को मस्ती से चोद रहे थे.
करीब पंद्रह मिनट तक पापा मम्मी को जोर-जोर से चोदते रहे और फिर शांत होकर लेट गए. उसके बाद मम्मी उठी और पापा का लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
मे अपनी जिंदगी में एक ही पलंग पर अपने ही पास में यह सब पहली बार देखकर हैरान था लेकिन मुझे यह सब देखकर मजा भी बहुत आ रहा था.
कुछ देर तक मम्मी ने पापा के लण्ड के को चूसा और उनके मुँह पर अपनी चुत रगड़ रही थी और पापा भी मम्मी की चुत को चाट रहे थे और फिर दोनों झड़ गए और एक दूसरे के ऊपर ही पड़े रहे और थोड़ी देर में सो गए.
उस रात का यह सीन मेरे दिमाग में बैठ गया और मेरी माँ का बदन भी इस उम्र में गुलाब के फूल की तरह खिला हुआ और मस्त था. आप खुद ही कल्पना करो कि आपके पास में ही चुदाई चल रही हो तो आपको उसे देखकर कितना मजा आएगा.
उस घटना के कुछ दिनों बाद मैं एक दिन स्कूल नहीं गया था और घर बैठकर ऐसे ही टाइम पास कर रहा था और पापा ऑफिस गए थे, घर पर मैं और मम्मी दोनों ही थे. मम्मी नहाने के लिए गई तो मेरी आँखों के सामने उस रात की चुदाई वाला दृश्य सामने आ गया.
मुझे अब मम्मी को नंगा देखने की इच्छा होने लगी तो मैंने मेरे बाथरूम के दरवाज़े में देखा तो उसमे छोटा सा छेद और नीचे से करीब एक उंगली का गैप नजर आया. मैं बाथरूम के पास कान लगाकर सुनने लगा और अन्दर से पानी गिरने की आवाज़ के साथ कुछ छींटे नीचे की दरार से बाहर आ रहे थे.
मैंने नीचे की झिरी में से अंदर देखा तो मेरी माँ पूरी तरह से नंगी होकर नहा रही थी. उसने अपने गोरे शरीर पर साबुन लगाया हुआ था और कुछ देर बाद उसने अपनी चूत पर साबुन लगाया और फिर उसे मसलने लगी, और उसके बाद पानी से उसे साफ़ कर लिया.
माँ अब टॉवल से अपने शरीर को साफ़ कर रही थी तो मुझे उनकी मस्त गाण्ड नजर आई और जब माँ घूमी तो उनका शरीर मेरे सामने फिर से पूरा नंगा नजर आ रहा था!
मैं अब तुरंत ही अपने कमरे में आया और वहाँ पर जल्दी-जल्दी मुठ मार ली और उसी दिन से में मेरे दोस्तों की बाते सुनता तो मुझे मेरी मम्मी को चोदने की इच्छा होने लगती और में इस बारे में सोचने और उनकी चुदाई की कल्पना करने लगता!
कुछ दिनों बाद ही मुझे मेरी कल्पना साकार होने की संभावना नजर आने लगी क्योंकि मेरे पापा का ट्रान्सफर कोलकाता हो गया था और अब माँ घर पर अकेली रह गई थी और चुदाई ना होने के कारण से थोड़ी उखड़ी-उखड़ी रहने लगी.
एक दिन मैंने रात को सोते वक्त जानबूझ कर अपने हाथ को माँ के चूचों पर रख दिया. मैंने देखा कि माँ ने मेरी इस हरकत पर कुछ ही हरकत नहीं की, शायद इतने दिनों से न चुदने की वजह से उन्हें भी मजा आ रहा था.
कुछ देर बाद मैंने उनके चुचो पर दबाव बढ़ा दिया लेकिन उसके बाद भी उन्होंने कुछ नहीं किया तो मैंने सोचा कि यही सही मौका है और मैंने उनकी चूचियों के ऊपर से ब्लाउज के हुक खोलने लगा तभी मैंने महसूस किया कि नीचे से कोई मेरे लण्ड को हिला रहा है.
कमरे में मेरे और माँ के अलावा कोई नहीं था तो यह तो पक्का था की ये हाथ मेरी माँ के ही थे, मैं उनका इशारा समझ गया कि आज मैं उनके साथ जो कुछ भी करना चाहता हूँ शायद माँ भी उन सबके लिए तैयार थी.
मैंने माँ का इशारा मिलते ही उनके चूचों को नंगा करके उन्हें अपने होंठों और जीभ से चूसना चालू किया तो माँ कामुक होकर तड़पने लगी. मैं मेरी जिंदगी में पहली बार किसी के चूचों को चूस रहा था तो मुझे जो आनंद आ रहा था उसे में आप लोगो को बता नहीं सकता.
नीचे से माँ मेरे लण्ड को जोर जोर से हिला हिलाकर उसकी मूठ मार रही थी. थोड़ी देर ऐसे ही उनके चूचों को चूसते रहने और उससे आगे नहीं बढ़ने पर वह तड़पकर बोली की सिर्फ़ चूचों को ही चूसेगा या असली काम भी करेगा?
मैं माँ की इस बेकरारी का मजा लेते हुए बोला- माँ आज तुम देखती जाओ में तुम्हें कैसे कैसे मजे देता हूँ बस में जो भी कर रहा हूँ उसके मजे लो!
इतना कहने के साथ ही मैंने माँ के सारे कपड़े उतार दिए और उसी के साथ अपने भी कपड़े उतारने के साथ ही माँ के गोरे बदन को चूसने लगा. माँ भी अब इसमें मेरा पूरा साथ दे रही थी और मस्ती से आँहे भरने लगी.
थोड़ी देर बाद में धीरे-धीरे उन्हें चूमता हुआ नीचे आकर उनकी नाभि को अपनी जीभ डालकर चाटने लगा और नीचे से उनकी चूत में अपनी उँगली करने लगा तो माँ को जैसे करंट लगने लगा अब मैंने और आगे बढ़ते हुए उनकी चुत को अपने होंठों में भर लिया तो ऐसा लगा जैसे मैं स्वर्ग में हूँ.
अब माँ की चुदास उनके क़ाबू से बाहर थी और वो ज़बरदस्त तड़प रही थी उनकी तड़प का अंदाज़ा में उनके शरीर के बल खाने से लगा रहा था. उनसे अब रुका नहीं गया और तुरंत ही उठकर मेरे ऊपर आ गई और मेरे लण्ड पर अपनी प्यारी और मस्त गीली हो रखी चूत को रखा और उसपर बैठती चली गई.
माँ ने मेरे लंड के ऊपर बैठने के साथ ही ख़ुद ही अपने नितंबों को आगे पीछे करते हुए अपने चूचो को दबाते हुए मेरे लंड को छोड़ना शुरू कर दिया तो मैं जैसे पागल सा गया और में भी जोश में आ गया और नीचे से जोर-जोर से उनकी छूत में धक्के लगाने लगा.
मेरे लंड के धक्को से माँ तड़पने के साथ में मजे भी ले रही थी और जोर-जोड़ से बोलने लगी- और जोर से बेटा और तेज और तेज. पापा की कमी मत महसूस होने देना बेटा, आज चोद-चोदकर अपने पापा को हरा दो और जोर से आह… आह.. ओह… यस… आह… शा…बा…श… मेरे… लाल…..!
माँ के जोर-जोर से कहने पर में और भी ज़्यादा जोश में आ गया और माँ की चुत में और जोर-जोर से धक्के मारने लगा. फिर कुछ देर बाद मैंने माँ को उल्टा करके उनकी गांड की और इशारा किया.
माँ ने भी इशारे से अपनी मौन स्वीकृति दी दी फिर क्या था मुझे तो उनका इशारा चाहिए था बस और मैंने अपने लंड से उनकी गांड मारना शुरू कर दिया और इस तरह से उनकी गांड की भी लाटरी लग पड़ी.
उस रात को मैंने मेरी माँ को रात में तीन बार चोदा. अगले दिन मैं नहाकर तैयार होने लगा तो माँ ने पास आकर मुझे किस करते हुए कहाँ- कल तो तूने कमाल कर दिया.
मैं भी माँ के मुँह से मेरी तारीफ़ सुनकर मस्त हो उठा और उसके बाद तो यह सिलसिला लगभग हर रोजाना हो लगा. उसके बाद मुझे बाहर पढ़ने जाना पड़ा.
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