रिश्तेदार चाची के साथ सुहागरात (Rishtedar Chachi Ke Sath Suhagrat): दोस्तो! मैं राज आगरा का रहने वाला हूँ और आज आपको मेरी एक सच्ची चुदाई की स्टोरी बताने जा रहा हूं। यह चुदाई मेरे और मेरी चाची के बीच में हुई थी और मैंने चाची को चोदकर उनको उनको अपने बच्चे की माँ बनाया।
बात आज से 10 साल पहले की है उस समय मैं 18 साल का था, मेरे दूर के रिश्ते में लगने वाले चाचा-चाची बरेली में रहते थे। उन्होंने क़रीब 1.5 साल पहले लव मैरिज की थी और उनके कोई बच्चा नहीं हुआ था।
एक दिन जब में उनके घर के आगे से निकल रहा था तो चाचा ने मुझे आवाज दी तो पता चला कि वो हमेशा के लिये बरेली से रहने के लिए फिर से आगरा में आ गये हैं। जब में घर आया और अपने परिवार वालो को बताया तो घर के सभी लोग उनसे मिलने गये।
जब घर वालो के साथ में भी उनके घर गया तो मैंने वहाँ पर चाची को भी देखा। चाची की उमर उस समय क़रीब 30 साल होगी। जब मैंने चाची को देखा तो उनको देखता ही रह गया।
चाची एक लम्बी, गोरी-चिटटी भरे हुए बदन, चौड़ी कमर और बाहर निकले उत्तेजक हिप्स और सबसे मस्त उनके ब्लाउज से बाहर झांकते बड़े-बड़े स्तन की मल्लिका थी और उन्हें देखकर ही मेरे मन में हलचल मचने लगी।
मेरे मन में उनको देखते ही सबसे पहले उनको बिना कपड़ो के नंगी देखने और उसके साथ ही साथ उन्हें चोदने का ख्याल भी आने लगा। और इसी ख़याल के साथ मेरे लंड ने उनके हुस्न को अपनी सलामी देना शुरू कर दिया।
मेरे चाचा अब आगरा में ही अपना व्यापार करने के बारे में सोच रहे थे। अब तो मैं अक्सर ही चाची से मिलने और उनको अपनी आँखों से चोदने के लिए चाचा से मिलने के बहाने से चला जाता था।
कुछ ही दिनों में मैं चाची से बाते करते हुए उनके साथ में खूब घुल मिल गया था और वो भी मुझसे काफ़ी लगाव रखने लगी और जब भी में चाचा के घर जाता तो वे मेरा काफ़ी ख्याल रखती थी।
एक दिन चाचा को व्यापार के काम से कुछ दिनों के लिए बाहर जाना था तो चाची बोली कि उन्हें रात को अकेले में डर लगेगा।
चाचा ने घर आकर मेरी मां से मेरे उनके घर सोने की बात की तो मां ने मुझे कहा- तुम आज से जब तक चाचा वापस नहीं आ जाते तब तक के लिए रात को चाची के पास सो जाया करो।
मैं रात को 8 बजे चाचा के घर सोने के लिए पहुँच गया। और दरवाज़ा बजाया तो चाची ने मेरे घहर में जाने के साथ ही दरवाजा बंद किया और मुझसे बोली- राज, तुम्हारे लिए अलग बिस्तर लगाऊ या तुम मेरे साथ ही सो जाओगे?
साथ में सोने के नाम से ही मेरा मन खिल उठा लेकिन मैंने उन्हें महसूस नहीं हो ऐसे देखते हुए चाची से कहा- जैसा आप ठीक समझें। मैं तो घर में कहीं भी सो जाऊंगा।
चाची ने जब मेरा जवाब सुना तो बोली- तो तुम इसी बिस्तर पर मेरे साथ ही सो जाना और रसोई में जाकर अपने काम में लग गयी।
में चाची के कमरे में बिस्तर पर बेड पर लेट गया और क़रीब 15-20 मिनट बाद काम निम्पटाकर चाची कमरे में आई और साड़ी उतारते हुए बोली- मैं तो सो रही हूं, तुम भी सो जाओ अब रात काफ़ी हो गई है।
चाची के बेड पर लेटने के साथ ही मैंने पास ही लगे हुए लाईट के स्विच को बंद बंद किया और लेट गया लेकिन मुझे नींद कैसे आ सकती थी आज जब कमसिन बदन की चाची मेरे पास में ही सो रही हो।
में ऐसे ही लेटा हुआ चुदाई के बारे में कल्पना कर रहा था तो थोड़ी देर में ही चाची लाईट जला कर बाथरूम गयी और वापिस आकर फिर से लेट गई लेकिन में हिला नहीं और अपनी आंखें बंद करके लेटा रहा।
कुछ देर बाद चाची ने मेरी और करवट की और बोली- राज क्या तुम सो रहे हो? तुम्हें नींद आ गई क्या?
मैंने अचानक से उनकी आवाज़ से हल्की नींद से जागने का बहाना करते हुए कहा- क्या हुआ चाची?
चाची मुझसे बोली मुझे अकेले सोने में डर लगता है और उसी के साथ एकदम मुझ मेरे क़रीब आकर मेरे बदन से लिपट कर सोने लगी।
मैंने उनके मेरे से सट कर सोने पर कहा- डर, लेकिन किस बात का और कैसा डर?
चाची ने कुछ जवाब नहीं दिया और मुझसे लिपटे हुए ही लेटी रही और मुझे उनके बॉब्स मेरी छाती से छूने और मेरे कंधे पर उनके सिर के एहसास से करंट सा लग रहा था और उन्होंने अपनी एक टांग भी फोल्ड कर मेरे दोनों टांगो पर रख रखी थी।
में पूरी तरह से गरम हो चुका था और उनकी और करवट लेते हुए उनकी टांग को मेरी दोनों टांगो के बीच में लेते हुए सोते हुए उनकी पीठ पर हाथ रखते हुए उनसे कहा- अब तो डर नहीं लग रहा, अब आराम से सो जाओ चाची।
चाची धीरे-धीरे मेरी बांहों में सिमटती जा रही थी और उनकी गर्म साँसे मुझे मेरे बदन पर महसूस हो रही थी और मैंने उनके हिप्स पर हाथ रखकर उन्हें धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया।
चाची को भी मेरे ऐसा करने से मजा आ रहा था शायद इसी लिए थोड़ी देर बाद चाची ने सीधे लेटते हुए मेरा हाथ अपने पेट पर रखते हुए कहा- तुम मुझ से चिपक कर ही सोना, मुझे डर लग रहा है।
चाची का इतना कहना था कि मैं भी तुरंत ही उनसे चिपक गया और उनके बूब्स पर अपना सिर रख लिया। अब में कुछ ज़्यादा ही गरम हो गया था और मेरा लन्ड पूरा खड़ा हो चुका था। मैं ज़्यादा देर तक ख़ुद को नहीं रोक सका और धीरे-धीरे उनका पेट औए फ़िर जांघ सहलाने लगा।
मेरे हाथों से सहलाने से चाची भी गरम हो गई थी पूरी तरह से और उन्होंने बहुत ज़्यादा ही गर्मी लग रही है ऐसा कहने के साथ ही अपने ब्लाउज के कुछ हुक खोल दिये और हुक के खुलते ही उनके बूब्स के निप्पल मुझे आँखो के सामने साफ़ नज़र आ रहे थे।
मैंने मौके का फायदा उठाते हुए उनके बूब्स पर हाथ रख कर उन्हें सहलाने लगा और जब चाची की सांसे तेज होने लगी तो उनके बूब्स को ब्लाऊज से पूरा निकाल कर मुंह मे लेकर दोनो हाथों से पकड़ कर मसलते हुए उनका पेटीकोट अपने पैर से ऊपर करना शुरु कर दिया।
उनकी हरकते तो मेरा साथ देने की थी लेकिन फिर भी वह बोली- राज, यह तुम क्या कर रहे हो?
मैंने जोश के साथ कहा- चाची, आपने ही तो शुरुआत की है इसकी और अब मत रोको मुझे!
खिड़की से आ रही हल्की रोशनी से उनके बदन और उनकी गोरी-गोरी जांघों को देख कर मैं अपने होश में नहीं था और हाथों को उनकी चूत पर ले गया तो उनकी रस से भरी हुई चूत बहुत ही नशीली लग रही थी।
उनकी चूत पर लगे रस को मैंने अपने होंठों से चखा और नीचे आकर उनके दोनों पैरों को खोलकर उनके बीच में आकर उनकी चूत को चाटना शुरु कर दिया और कुछ देर बाद मैंने अपने पैर भी चाची के सिर की तरफ़ कर लिये।
चाची ने मेरा इशारा समझते हुए मेरी नेकर को नीचे कर मेरा लन्ड निकाल कर उसे मस्ती के साथ मुँह में लेकर चूसने लगी। आज पहली बार कोई मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था और चाची मस्ती से चूस-चूसकर मुझे पूरा मजा दे रही रही थी।
कुछ देर बाद चाची उठी और मेरे मुँह पर आकर अपनी चुत को मेरे मुँह पर दबा दिया और मैं नीचे से चूत चाटने के साथ-साथ उनके गोरे और बड़े बड़े हिप्स सहलाने लगा थोड़ी देर में चाची ने मेरे बालों को पकड़कर जोर-जोर से चूसने को कहते हुए अपनी चुत का पानी छोड़ दिया।
उनके इस चुत-अमृत को पीकर तो में धन्य हो गया और उठकर चाची को लिटा कर, उनकी टांगें चौड़ी करके चूत में लन्ड डाल दिया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा तो चाची चुदास के मारे कराहने लगी।
चाची ने मुझे कस के पकड़ लिया और नीचे से मेरे साथ ताल मिलाते हुए कहने लगी- राज ऐसे ही अपने लंड को मेरी चूत में पूरा डाल-डालकर चोदते रहो, बहुत मजा आ रहा है।
आज से मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो गयी हूँ राज, अब मुझे हर रोज़ तुम्हारा मस्त और कड़क लन्ड अपनी चूत में चाहिये. एएऊउ स्स स्सी स्स्स आह्ह्ह ह्म्म आय हां हां च्च उई म्म मा।
कुछ देर तक में अपने लंड से धक्के लगाते हुए चाची को चोदता रहा और फिर उनकी चुत के साथ-साथ मेरे लंड ने भी अपना पानी उसमे छोड़ दिया और दोनों एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।
उस रात मैंने चाची को दो बार और चोदा और उस चुदाई में चाची ने भी मस्त हो कर मेरा बराबर साथ दिया।
अब तो जब भी चाचा काम से घर से बाहर जाते तो है हम दोनो रात को खूब मजे करते है और उस दिन से लेकर आज तक यह रिश्ता हमारे बीच में चला आ रहा है।
इस दौरान चाची ने एक लड़का और एक लड़की को भी जन्म दिया और उनका कहना है कि ये दोनो मेरे ही बच्चे हैं और यह बात हम दोनों के अलावा कोइ और नहीं जानता।
आप लोगो को कैसी लगी यह मेरी सच्ची कहानी? कमेंट में जरूर बताये और हाँ कहानी को कहने में कोई त्रुटि रह गई हो तो मुझे माफ़ करना क्योंकि में कोई राइटर नहीं हूँ जो अपने मनघड़ंत शब्दों के जाल में पिरोकर कुछ लिखू।
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