में अंकिता हूँ, जब मैंने अपने मम्मी-पापा को चुदाईं करते हुए देखा तो मेरी उम्र जवानी की अठखेलियाँ लेने लगी और मन में अपने ही पापा से चुदवाने की इच्छा जाग उठी.
मैं पापा की चुदाई देख इतनी मस्त हो गई कि अपने पापा को अपनी चुदाईं के लिए फंसाने में लग गई और एक दिन मुझे कामयाबी मिल ही गई.
मैंने पापा को अपने जाल में फंसा ही लिया. अब जब भी मुझे मौक़ा मिलता, पापा की गोद में बैठ उनसे चूचियाँ दबवा कर मज़ा लेती थी पर अभी तक पूरा मज़ा नही लिया था.
फिर एक दिन मेरे मामा की शादी में मम्मी अपने मायके जा रही थी. रात में पापा ने मुझे अपनी गोद में लेकर खड़े लण्ड पे बिठाते हुए कहा – बेटी कल जब मम्मी नहीं होगी तो तुझे पूरा मज़ा देकर जवान होने का मतलब बताएँगे.
मैं पापा की यह बात सुन ख़ुश हो गई थी.
उस रात मैंने खिड़की से देखा, पापा ने मम्मी को एक कुर्सी पर बिठाकर उनकी चूत को चाटकर दो बार झाड़ा और फिर 3 बार मस्ती के साथ चोदकर दोनों सो गए.
अगले दिन सुबह पापा मेरे कमरे में आए और मेरी चूचियों को पकड़कर दो तीन बार मेरे होंठ चूमे और लण्ड से चूत दबाते हुए कहा- तुम्हारी मम्मी को स्टेशन छोड़कर आता हूँ, आज रात तुम्हें पूरा मज़ा दूंगा.
मैंने सोचा कि जब तक पापा नही आते तब तक अपनी चूत को लण्ड के लिए उँगली से फैला लूँ.
तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया.
मैंने चूत में उँगली पेलते हुए पूछा- कौन है?
‘मैं हूँ महेश.’ महेश का नाम सुन मैं गुदगुदी से भर गई क्योंकि वह 20 साल का मेरा पड़ोसी था जो मुझे कई दिनों से फँसाना चाहता था पर मैं उसे लाइन नही दे रही थी.
वह रोज़ मुझे गंदे इशारे करता और कभी-कभी मेरी चूची दबा देता और कभी गांड पर हाथ फेर देता.
मैंने सोचा कि जब तक पापा नहीं आते तब तक क्यों ना इसी से एक बार चुदवाकर मजा लिया जाए.
यही सोचकर मैंने बिना चड्डी पहने ही दरवाजा खोल दिया.
मेरे दरवाजा खोलते ही महेश फ़ौरन अन्दर आया और मुझे नंगा देख खुश हो मेरी चूचियों को पकड़कर बोला- आज बड़ा अच्छा मौका है.
उसके अगले ही पाल उसने मेरी चूचियों को छोड़कर पलटकर दरवाजा बंद कर मुझे अपनी गोद में उठा मेरी चूचियों को मसलते हुए मेरे होंठों को चूसते हुए कहा रानी, तुम्हारी चूचियाँ तो बहुत टाइट हैं. तुमने बहुत तड़पाया है, आज तो जरूर चोदूंगा.
मैंने कहा, ‘हाय भगवान, छोड़ो पापा आ जाएंगे.’
‘डरो नहीं मेरी जान, मेरी गांड को सहलाते हुए बोला मेरा लण्ड मोटा नहीं है तो तुम्हें दर्द नहीं होगा.’ और में बहुत जल्दी से चोद लूँगा.
मैं पापा से चुदवाने के लिए पहले से ही गर्म थी. और जब महेश मेरी चूचियों और गालों को मसलने लगा तो मैं मस्ती में महेश से मजा लेने को तैयार हो गई.
उसकी छेड़छाड़ से गर्म हुई मेरी चूत लण्ड खाने को बेताब हो गई थी. वासना से पागल अपनी कमर को लचकाते हुए मैं बोली- महेश, जो करना हो जल्दी से कर लो, कहीं पापा ना आ जाएँ!
मेरा इशारा मिलते ही महेश ने मुझे बेड पर लिटाया और अपनी पैंट उतार नंगा हो बोला- रानी आज तो बड़ा मजा आएगा. ‘तुम एकदम तैयार माल हो. देखो मेरा लण्ड छोटा है ना!’
उसने अपने 4 इंच के लंड पर अपना हाथ रखा तो में उसे पकड़ मस्त हो गई. उसका लंड पापा से आधा था जिसे सहलाते हुए में बोली- हाय राम, जो करना है जल्दी से कर लो.
मेरे ऐसा कहते ही वो मेरी टांगों के बीच आया और मेरी कसी हुई कुंवारी चूत पर अपना छोटा लण्ड रख धक्का मारा, फिर 3-4 धक्के मारकर पूरा अन्दर पेल दिया.
कुछ देर बाद उसने धीरे-धीरे से चोदते हुए पूछा- मेरी जान दर्द तो नहीं हो रहा है. मजा आ रहा है ना?
‘हाय, मारो धक्के, मजा आ रहा है.’
मेरी बात सुन वो तेज़ी से धक्के मारने लगा.
मैं भी उससे चुदवाते हुए मस्त हो रही थी, उसकी चुदाई मुझे जन्नत की सैर करा रही थी.
नीचे से गांड उचकाती हुई मैं सिसयाते हुए बोली- हाय महेश, जोर-जोर से चोदो, तुम्हारा लण्ड छोटा है इसलिए जरा ताक़त से चोदो।
मेरी बात सुन महेश जोश में आ गया और मुझे जोर-जोर से चोदने लगा और उसका छोटा लण्ड सटासट मेरी चूत में आ जा रहा था.
मैं पहली बार चुद रही थी इसलिए महेश के छोटे लण्ड से भी बहुत मजा आ रहा था और उसकी यह चुदाइ मुझे जन्नत का मजा दे रही थी.
10 मिनट के बाद वो मेरी चूचियों पर लुढ़ककर कुत्ते की तरह हांफने लगा और उसके लण्ड से गरम-गरम पानी मेरी चूत में गिरने लगा.
मैं पहली बार चुदी थी और पहली बार चूत में लण्ड की मलाई से मेरी चूत टपकने लगी और मैं उससे चिपक गई. कुछ देर हम लोग अलग हुए और वो कपड़े पहन कर चला गया.
महेश भले ही मुझे ठीक से चोद नहीं पाया था, बस ऊपर से चूत को रगड़ कर चला गया था पर मैं यह जरूर जान गई थी कि चुदाई में अनोखा मजा है.
उसके जाते ही मैंने चड्डी पहन यह सोचने लगी कि जब महेश के छोटे लण्ड से इतना मज़ा आया है तो पापा अपना मोटा और तगड़ा लण्ड मेरी चूत में पेलेंगे तो कितना मजा आएगा.
महेश के जाने के 6-7 मिनट बाद ही पापा स्टेशन से वापस आए और अन्दर आते ही वे मेरी कड़ी-कड़ी चूचियों को फ्रॉक के ऊपर से पकड़ते हुए बोले- आओ बेटी, अब हम तुमको जवान होने का मतलब बताएँगे.
मैंने कहा ‘ओह पापा आपने तो कहा था कि रात को बताएँगे.’
‘अरे अब तो मम्मी चली गई हैं अब हर समय रात ही है. मेरी चुचियों को मसलते हुए पापा ने कहा- “मम्मी के कमरे में ही क्रीम लेकर आ जाओ”।
मैंने पापा के मजे लेने के लिए कहा- क्रीम क्यों?
‘अरे लेकर आओ तो बताएँगे.’ पापा मेरी चूचियों को इतनी कसकर मसल रहे थे जैसे उखाड़ ही लेंगे.
मैं क्रीम और तौलिया लेकर मम्मी के बैडरूम में पहुँची तो पापा बोले- बेटी, क्रीम टेबल पर रखकर बैठ जाओ.
मैं तुरंत ही उत्सुकता से कुर्सी पर बैठ गई, पापा मेरे पीछे आये और अपने दोनों हाथ मेरी कड़ी चूचियों पर लाये और दोनों को प्यार से दबाने लगे. पापा के के इस तरह से चूचियों को दबवाने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था.
तभी पापा ने अपने हाथ को गले की ऊपर से फ्रॉक के अन्दर डाला और नंगी चूचियों को दबाने लगे. मैंने फ्रॉक के नीचे कुछ नहीं पहना था.
पापा मेरी कड़ी-कड़ी चूचियों को मुट्ठी में भरकर दबा रहे थे और साथ में ही दोनों घुन्डियाँ को भी मसल रहे थे. मैं मस्ती से भरी हुई इसके मजे ले रही थी.
तभी पापा ने पूछा- क्यों बेटी तुमको अच्छा लग रहा है?
‘हाय पापा, बहुत मजा आ रहा है.’
‘तुम बस इसी तरह मेरा साथ दो, आज तुमको शादी वाला मजा देंगे. अब तुम जवान हो गई हो.’
‘हाय तुम लेने लायक हो गई हो. आज तुमको खूब मजा देंगे.’
‘आहह्ह् ऊऊह्ह् पापाआआ.’
‘पापा मेरी कड़ी चूचियों को निचोड़कर बोले, ‘जब मैं इस तरह से तुम्हारी चूचियों को दबाता हूँ तो तुमको कैसा लगता है?’ तो मैं उतावली हो बोली- हाय पापा, उह्ह ससीए इस तरह तो मुझे और भी अच्छा लगता है.
‘जब तुम कपड़े उतारकर नंगी होकर मजा लोगी तो और ज्यादा मजा आएगा. हाय तुम्हारी चूचियाँ छोटी और कड़क हैं.’
‘पापा मेरी चूचियाँ छोटी क्यों हैं. मम्मी की तो बहुत बड़ी हैं.’
‘घबराओ मत बेटी. तुम्हारी चुचियों को भी में मम्मी की तरह बड़ी कर दूंगा.’
‘हाय बेटी कपड़े उतारकर नंगी होकर बैठो, तुम्हें बड़ा मजा आएगा. ‘पापा चड्डी भी उतार दूँ.’ अनजान बनते हुए मैंने कहा तो पापा ने कहा, ‘हाँ बेटी चड्डी भी उतार दो.’
‘लड़कियों का असली मजा तो चड्डी में ही होता है.’
‘आज में तुमको सारी बात बताऊँगा और जब तक तुम्हारी शादी नहीं होती’ में ही तुम्हारे साथ सुहागरात मनाऊगा और तुमको शादी का मजा दूंगा.
‘तुम्हारी चूचियाँ बहुत टाइट हैं ऐसा कहते हुए पापा फ्रॉक के अन्दर हाथ डालकर दोनों चुचियों को दबाते हुए बोले ‘बेटी अब जल्दी से नंगी हो जाओ. पापा के ऐसा कहते ही मुझे यकीन हो गया कि आज पापा के लण्ड का मजा मिलेगा.
मैं उनके लण्ड को खाने की सोचते हुए मम्मी की रंगीन चुदाई को याद करती हुई कुर्सी से नीचे उतरी और कपड़े उतारने लगी और अपने कपड़े उतार नंगी हो मम्मी की तरह ही छोटी-छोटी तनी हुई चूचियाँ दिखाते हुए मादक अदा के साथ पैर फैला कुर्सी पर बैठ गई.
इस तरह बैठने से मेरी जाँघों के बीच रोएंदार चूत पापा को साफ़ दिख रही थी . पापा मेरी गदराई चूत और उसके मस्त गुलाबी छेद को बड़े ही गौर से देख रहे थे.
अगले ही पल एक हाथ से मेरी गुलाबी कली को सहलाते पापा बोले- हाय राम, बेटी तुम्हारी चूत तो जवान हो गई है.
‘अरे बेटी तुम्हारी चूत.’ ऐसा कहते हुए पापा ने चूत को दबाया. पापा के हाथ से चूत दबाये जाने पर मैं सनसना गई और मस्ती से भरी अपनी चूत को देख रही थी की तभी पापा ने अपने अंगूठे को क्रीम से चुपड़ मेरी चूत में डाला.
वो जब मेरी चूत क्रीम से चिकनी कर रहे थे तो अंगूठा जाते ही मेरा बदन गनगना गया.
तभी पापा ने चूत से अंगूठा बाहर किया तो उस पर लगे चूत के रस को देखकर बोले- हाय बेटी यह क्या है, क्या किसी से चुदकर मजा लिया है?
मैं पापा के इस अनुभव से धक्क से रह गई और घबराकर अनजान बनती हुई बोली- कैसा मजा पापा?
‘बेटी यहाँ कोई आया था?’
‘नहीं पापा यहाँ तो कोई नहीं आया था.’
‘तो फिर तुम्हारी चूत में यह गाढ़ा रस कैसा?’
मैंने बहाना बनाते हुए कहा ‘मुझे क्या पता? पापा जब आप मेरी चूचियाँ मसल रहे थे तब कुछ गिरा था शायद’.
‘लगता है तुम्हारी चूत ने एक बार पानी छोड़ दिया है. तौलिये से इसे साफ़ कर लो.’
पापा मुझे तौलिया दे चूचियों को मसलते हुए बोले.
पापा से तौलिया ले चूत को रगड़ रगड़कर साफ़ किया और इस तरह से मैंने पापा को महेश वाली बात पता नहीं चलने दी.
मैं फिर से चूचियाँ मसलवाते हुए पापा से खुलकर गन्दी बाते करने लगी चुदाई के बारे में कुछ जान सकूं.
‘बेटी जब में तुम्हारी चूचियों को दबाता हूँ तो कैसा लगता है?’
‘हाय पापा, ऐसा लगता है जैसे में स्वर्ग में आ गई हूँ.’
‘बेटी तुम्हारी चूत में भी कुछ होता है?’
‘हाँ पापा एक अजीब सी गुदगुदी हो रही है.’ मैं बेशर्म हो बोली.
‘पहले जरा तुम्हारी चूचियों को जरा सही से दबा लूँ उसके बाद तुम्हारी चूत को भी मजा दूँ.’
‘लेकिन यह बात किसी को बताना नहीं.’
नहीं पापा इस बात के बारे में हमारे सिवा किसी को पता नहीं चलेगा.’
पापा मेरी चूचियों को मसलते रहे और मैं जन्नत का मजा लेने के कुछ देर बाद मैं तड़प कर बोली- ऊओह्हछ पापा अब बंद करो चूचियाँ दबाना और अब अपनी बेटी की चूत का मजा लो.’
अब मैं भी पापा के साथ खुलकर बात कर रही थी. मेरे मुँह से चूत को मजा देने का सुनते ही पापा मेरी चूचियों को छोड़कर मेरे सामने आये तो पापा का खड़ा लंड मोटा होकर मेरी आँखों के सामने फुदकने लगा.
पापा का लण्ड वैसे तो में पहले भी देख चुकी थी पर आज इतना पास से देख रही थी तो मेरा मन उसे पकड़ने को ललचाया तो मैंने उसे पकड़ लिया और दबाने लगी.
मैंने पापा के लंड को पकड़कर कहा- शश आपका लण्ड तो बहुत मोटा है यह मेरी छोटी सी चूत में कैसे जाएगा?
पापा ने कहा- ‘अरे पगली मर्द का लण्ड ऐसा ही होता है. मोटे लंड से ही तो लड़कियों को मजा आता है.’
‘पर पापा इससे तो मेरी चूत फ़ट जाएगी.’
‘अरे बेटी तुम्हारी चूत नहीं फटेगी. एक बार जब तुम मेरे इस लंड से चुद जाओगी तो रोज चुदवाने के लिए तड़पोगी.’
‘पहले अपने पैर फैलाकर चूत को अच्छे से खोलो.’ पापा के ऐसा कहते ही मैं समझ गई कि पापा मम्मी की तरह ही मेरी चूत को भी चाटना चाहते हैं.
मैंने जब मम्मी को पापा से अपनी चूत चटवाते देखा था तभी से तरस रही थी कि काश पापा मेरी चूत भी चाटे.
मेरे दोनों पैर फैलाते ही पापा ने अपने दोनों हाथों से मेरी चूत की दरारो को छेड़कर खोल दिया और घुटनों के बल नीचे बैठते हुए मेरी रोएंदार चूत पर अपने होंठ रख उसे चूमने लगे. उनके ऐसा करते ही में गनगाना उठी।
दो चार बार चूमने के बाद पापा ने अपनी जीभ को मेरी चूत के चारो ओर चलाते हुए चाटना शुरू किया. वो मेरे छोटे-छोटे बाल भी चाट रहे थे. उनके ऐसा करने से में धीरे-धीरे अपने होश खोती जा रही थी.
पापा चूत को चाटने के साथ में मेरी क्लिट भी चाट रहे थे और में भी मस्ती में दूसरी दुनियां में जा रही थी।
महेश तो बस आया और जल्दी से चोदकर चला गया था, उसने ना तो मेरी चूची दबाई और ना ही मेरी चूत को चाटा था लेकिन पापा तो मंझे हुए खिलाड़ी की तरह पूरा मजा दे रहे थे.
पापा ने चूत चाट उसकी दरारों में जीभ चलाकर उसे गीला करने के बाद अपनी जीभ को मेरी गुलाबी चूत के लस लसाए छेद में पेल दिया.
जीभ जैसे ही चूत के छेद में गई तो मेरी हालत खराब हो गई और मैं मस्ती से तड़प उठी और मुझे इतना मज़ा आया कि मैं नीचे से चूतड़ उछालने लगी.
कुछ देर बाद पापा मेरी चूत चाटकर अलग हुए और ऊपर आते हुए मेरी चूत अपने लण्ड से रगड़ने लगे.चूत की चटाई के बाद लण्ड की रगड़ाई ने मुझे पागल बना दिया और मैं जोश में बोल पड़ी- पापा अब पेल भी दो मेरी चूत में … आह हहह ऊऊहह!
पापा ने मेरी तड़पती आवाज़ पर मेरी चूचियों को पकड़कर अपनी कमर को ऊठाकर धक्का मारा तो करारा शॉट लगने पर पापा का आधा लण्ड मेरी चूत में समा गया.
पापा का मोटा और लम्बा लण्ड मेरी छोटी सी चूत को ककड़ी की तरह चीरते हुए उसमे घुसा था.
आधा लंड अंदर जाते ही मैं दर्द से तड़पकर बोली- आआ हहह ऊऊईई ममआ मररर!! गई पापा. धीरे-धीरे पापा बहुत मोटा है आपका ल…ण्ड … चूत फट गई.
पापा का मोटा और लम्बा लण्ड मेरी चूत में कसा हुआ था. मेरे कराहने पर पापा ने धक्के मारना बंदकर मेरी चूचियों को मसलना शुरू किया. थोड़ी देर में ही मुझे मजा आने लगा और 6-7 मिनट में ही मेरा सारा दर्द ख़त्म हो गया.
अब पापा बिना रुके धक्के लगा रहे थे. अचानक से एक जोरदार झटके के साथ ही पापा का पूरा लण्ड चूत की झिल्ली फाड़ता हुआ पूरा मेरी चूत में घुस गया. मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी चूत में चाकू धँसा है और अगले ही पाल मैं दर्द से छटपटाने लगी।
मैं कमर झटकती हुई बोली- हाय पापा मेरी चूत फ़टट गई. निकालो मुझे नहीं चुदवाना.
पापा को कुछ फ़र्क़ ही नहीं पड़ा और अपना लण्ड पेलते हुए वे मेरे गाल चाटते हुए बोले- बेटी रो मत अब तो पूरा चला गया. हर लड़की को पहली बार दर्द होता है लेकिन फिर मजा भी बहुत आता है.
कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ और मेरा कराहना बंद हुआ तो पापा धीरे-धीरे मुझे चोदने लगे. मुझे अब पापा का कसा-कसा लण्ड अपनी चुत में रगड़ता हुआ महसूस हो रहा था और धीरे-धीरे मुझे सच में मजा आने लगा.
अब जब पापा ऊपर से धक्का लगाते तो मैं नीचे से गांड उछालती. महेश तो मुझे सिर्फ़ ऊपर से रगड़ कर चोदकर चला गया था पर मेरी असली चुदाई तो पापा कर रहे थे.
पापा ने लण्ड पूरा अन्दर तक पेल दिया था. जब पापा शॉट लगाते तो उनके लंड का सुपाड़ा मेरी बच्चेदानी तक जाता और मुझे जन्नत से भी अधिक मजा मिल रहा था.
तभी पापा ने पूछा- बेटी, अब दर्द तो नहीं हो रही है.’
‘हाय पापा अब तो बहुत मजा आ रहा है. आहहहछ पापा आप तो जोर-जोर से चोदिये बस.’
इसी तरह लगभग 20-25 मिनट चोदने के बाद पापा के लण्ड से गरम-गरम मलाईदार पानी मेरी चूत में गिरने लगा.
जब पापा का पानी मेरी चूत में गिरने लगा तो मैं पापा से चिपक गई और उसी के साथ में मेरी चूत भी फलफलाकर झड़ने लगी. हम दोनों साथ ही झड़ रहे थे.
पापा ने मुझे रात भर चोदा.
सुबह 12 बजे जब सोकर उठी तो मैंने पापा को देख कहा- पापा आज फिर चोदेंगे?
‘अरे मेरी जान अब तो मैं बेटीचोद बन गया हूँ. अब तो तू मेरी दूसरी बीवी है तुझे तो रोज ही चोदूँगा.’
मैंने कहा- ‘पर पापा जब मम्मी आ जाएंगी तो?’
‘मेरी जान उसे तो बस एक बार चोद दूंगा और वो ठंडी हो जाएगी फिर तेरे कमरे में आ जाया करूंगा और तुम्हें चोदा करुगा.’
बस फिर क्या था इस तरह से मैं पापा के साथ हर रात सुहागरात मनाने लगी.
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