रीना  और पुजारी जी की चुदाई-3

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दोस्तो, freesexstory.online के पिछले भाग में अब तक अपने पढ़ा कि पुजारी जी रीना से चुदाई करने के चक्कर में उसको हवन और पूजा के बहाने से फंसा चुके थे.

पुजारी रीना की तारीफ़ कर डोरे डाल रहे थे कि जब तुम बिना श्रृंगार के इतनी सुन्दर लगती हो.. तो श्रृंगार करने के बाद तो तुम बिल्कुल अप्सरा लगोगी.

अब आगे आगे की कहानी ..

पुजारी- परम्परा के अनुसार तुम्हारा श्रृंगार पवित्र हाथों से होना चाहिये.. अगर तुम्हारा श्रृंगार में करूँ तो कोई आपत्ति तो नहीं?

रीना – नहीं पुजारी जी..

पुजारी- रीना मैंने तुम्हें जो देवलिंग दिया था, उस पर पुजारी का चित्र होना चाहिये लेकिन में वह भूल गया .. इसलिए अभी इस देवलिंग पर में अपनी एक छोटी सी फोटो चिपका रहा हूँ.

रीना – ठीक है पुजारी जी.

पुजारी- एक बात और आज रात को दो बार उठ कर इस देवलिंग को जय करना.. पहली बार सोने से पहले.. और दूसरी बार मध्य रात्रि में.

रीना – जी पुजारी जी..

पुजारी ने देवलिंग पर अपनी एक छोटी सी फोटो चिपका दी.. और रीना ने पहले की तरह देवलिंग को अपनी टांगों के बीच बांध लिया..

आज की पूजा जल्दी ही खत्म हो गई और रीना अपने कपड़े पहन अपने घर चली आई..

आज दिन भर देवलिंग रीना की टांगों के बीच चुभता रहा.. लेकिन अब देवलिंग की रगड़ रीना को अच्छी लग रही थी और उसे पुजारी द्वारा की गई उसकी तारीफ़ याद आती.

रीना रात को जब सोने के लिए लेटी तो उसने अपने सलवार का नाड़ा खोल, देवलिंग को निकालकर अपने माथे से लगाया तो उसे पुजारी की फोटो को दिखाई दी, अब उसे पुजारी अच्छा लगने लगा था.

कुछ देर पुजारी की फोटो को देखने के बाद उसने देवलिंग को अपनी टांगों के बीच में रख नाड़ा लगा लिया.

लेते हुए देवलिंग रीना की चूत को टच कर रहा था.. ना चाहते हुए भी वह एक हाथ सलवार के ऊपर से ही देवलिंग पे ले गई और देवलिंग को अपनी चूत पे दबाने लगी.

उसका मन तो कर रहा था की वह उसे अपनी चुत में डाल ले.. लेकिन पाप के भय से अपना मन मारते हुए अपना हाथ उसने देवलिंग से हटा लिया.

आधी रात को उसकी आँख खुली तो उसे अपने हिप्स के बीच में कुछ लगा.. देवलिंग कल की तरह फिर रीना की हिप्स में फंसा हुआ था.

रीना ने सलवार का नाड़ा खोल देवलिंग बाहर निकाल उसे जय किया और पुजारी की फोटो को देख कर मन में कहने लगी.. अरे पुजारी जी.. पीछे क्या कर रहे थे..?

उसने देवलिंग अंदर डालते हुए हल्का सा चूत पर रगड़ा.. फिर पुजारी को याद करते हुए मन में, क्या चाहते हो..? एक विधवा के साथ ये सब करना अच्छी बात नहीं.. और अपनी गरम चूत के साथ सो गई.

अगले दिन..

पुजारी- रीना.. आज मैं तुम्हारा श्रृंगार खुद अपने हाथों से करूँगा ताकि शिव जल्द ही प्रसन्न हो.

रीना रोज़ की तरह गई और दूध से नहा आई.

पुजारी ने बाहर लिपस्टिक, रूज़, आई-लाइनर, ग्लीमर, बॉडी आयल.. श्रृंगार का सारा सामान तैयार कर रखा था

पुजारी और रीना एक दूसरे के सामने ज़मीन पर बैठ गए.. पुजारी रीना के बिल्कुल पास आ गया.

पुजारी- पहले आँखों से शुरू करते हैं कहते हुए रीना को आई-लाइनर लगाने लगा और कहने लगा तुम्हारी आँखें सुन्दर होने के साथ बहुत गहरी है. इतनी चमकीली.. प्यार बिखेरती हुई.. कोई भी इन आँखों से मन्त्र-मुग्ध हो जाए.

रीना शर्माते हुए थोड़ा मुस्कुरा रही थी.. उसे यह तारीफ़ अच्छी लग रही थी.

पुजारी ने अब आई-लाइनर लगाने के बाद गालों पे रूज़ लगाते हुए कहा. तुम्हारे गाल कितने कोमल हैं जैसे कि मखमल के बने हों.. इन पे कुछ लगाती हो क्या..ऐसा कह पुजारी रीना के गालों पर हाथ फेरने लगा.

पुजारी- रीना.. तुम्हारे गाल छूने में इतने अच्छे हैं कि शिव का भी इन्हें.. इन्हें..

रीना – इन्हें क्या पुजारी जी..?

पुजारी- शिव का भी इन गालों का चुम्बन लेने को दिल करे और अगर  एक बार चुम्बन ले तो छोड़ने का दिल ना करे.
गालों पर रूज़ लगाने के बाद अब लिप्स की बारी आई.

पुजारी- रीना .. होंठ (लिप्स) सामने करो… मेरे ख्याल से तुम्हारे होंठों पर गाढ़ा लाल रंग बहुत अच्छा लगेगा.

पुजारी ने रीना के होंठों पे लिपस्टिक लगाना शुरू किया… और बोले अपने होंठ बंद कर लिपस्टिक

लगाती हो क्या.. थोड़े होंठ खोलो..

रीना ने तुरंत ही अपने होंठ खोले.. पुजारी ने एक हाथ से रीना की ठोड़ी पकड़ दूसरे हाथ से लिपस्टिक लगाते हुए… तुम्हारे होंठ.. कितने आकर्षक हैं.. क्या बनावट है इनकी.. कितने भरे भरे और कितने गुलाबी है ये.

रीना – आप भी क्या मज़ाक कर रहे हैं पुजारी जी..

पुजारी- शिव की क़सम.. तुम्हारे होंठ तो किसी को भी आकर्षित कर ले. ‘तुम्हारे होंठ देख कर तो शिव पार्वती के होंठ भूल ललचा जाएं.. और तुम्हारे होंठों का सेवन करें.. तुम्हारे होंठों की मदिरा पिएं.

अब तो रीना अंदर ही अन्दर कामुकता से मरी जा रही थी

पुजारी- क्या आज तक तुम्हारे होंठों का सेवन किसी ने किया है?

रीना – शर्माते हुए… एक दो बार मेरे पति ने.

पुजारी- क्या तुम्हारे पति के अलावा और किसी ने नहीं..!

रीना – पुजारी जी कैसी बातें कर रहे हैं.. ऐसा करना तो पाप होता है ना.

पुजारी- यदि दबाव में किया जाए तो पाप और अगर इच्छा से किया जाए तो पुण्य.. लेकिन तुम्हारे होंठों का रस बहुत आनन्ददायक होगा.. ऐसे होंठों का रस जिसने नहीं पिया.. उसका तो जीवन अधूरा है.

रीना अपनी इतनी तारीफ़ से अन्दर ही अन्दर ख़ुशी से पागल हुई जा रही थी.

अब पुजारी ने हेयर-ड्रायर निकाला और रीना के लंबे बाल सुखाते हुए कहने लगा, तुम्हारे बाल इतने लम्बे और घने हैं कि शिव इनमें खो जाएंगे.

पुजारी ने रीना उसका श्रृंगार कर शीशा दिखाया तो रीना को यकीन ही नहीं हुआ कि वह इतनी सुन्दर भी दिख सकती है. आज से पहले उसे पता ही नहीं था कि वो भी इतनी एरोटिक लग सकती है.

पुजारी- मैंने तुम्हारे लिए खास जड़ी बूटियों का तेल बनाया है जिससे तुम्हारी त्वचा में निखार आने के साथ वह मुलायम भी हो जाएगी. अभी तुम अपने बदन पे कौन सा तेल लगाती हो?

रीना – बदन’ का नाम सुनके उसके जिस्म में सनसनी फेल गई… में बदन पे कोई तेल नहीं लगाती.

पुजारी- चलो कोई नहीं.. अब ज़रा घुटनों के बल खड़ी हो जाओ मैं तुम्हें तेल लगाऊंगा.. तुम शर्म मत करना.

ब्लाउज-पेटीकोट में घुटनों पे बैठी रीना – जी पुजारी जी..

पुजारी भी घुटनों पर होकर रीना के पेट पर तेल लगाते हुए पीछे आ गया.. और रीना की पीठ और कमर पर तेल लगाने लगा.

पुजारी- रीना तुम्हारी कमर तेल के बिना भी कितनी लचीली और चिकनी लगती है.

ऐसा कह पुजारी रीना के बिल्कुल पीछे आ गया.

अब रीना के हिप्स और पुजारी के लंड में मुश्किल से 1 इंच गजह बची थी. पुजारी पीछे से ही रीना के पेट पे लंबे लंबे हाथ फेर तेल लगाने लगा.

पुजारी- रीना.. तुम्हारा बदन तो जैसे रेशम है.. मुझे पेट पर हाथ लगाने में कितना आनन्द आ रहा है.. ऐसा लग रहा है जैसे मख़मल पे हाथ चला रहा हूँ.

पुजारी अब धीरे-धीरे पीछे से रीना के और पास आ गया.. उसका लंड रीना के चूतड़ों की दरार से रगड़ रहा था.

अब पुजारी रीना की नाभि में उंगली घुमाते हुए- तुम्हारी नाभि कितनी चिकनी और गहरी है.. जानती हो यदि शिव ने ऐसी नाभि देखी तो क्या करेगा?

रीना – क्या पुजारी जी.?

पुजारी- सीधा तुम्हारी नाभि में अपनी जीभ डालकर इसे चूसता और चाटता रहेगा.

ये सुन कर रीना कामुकता से मुस्कुराने लगी क्योंकि हर औरत को अपनी तारीफ़ सुनना अच्छा लगता है.

पुजारी ने अब आगे बढ़ते हुए एक हाथ रीना के पेट पे फेरना शुरू किया और दूसरे हाथ की उंगली रीना की नाभि में घुमाने लगा.

पुजारी अब पेट पर हाथ फेरते हुए ऊपर उठता हुआ ब्लाउज के अन्दर ले जा रहा था इससे कई बार उसकी उंगलियां रीना के मम्मों के निचले हिस्से पर टच हुईं.

रीना अब बहुत ज़्यादा गरम हो रही थी.

पुजारी- रीना .. आज की हमारी पूजा आखिरी चरण में है. परम्परा में बताये गए आसन के अनुसार, जो स्त्री अपने शरीर को शुद्ध करने के पश्चात उस आसन में लेट जाती है.. शिव उससे सदा के लिए प्रसन्न हो जाता है.

लेकिन ये आसन तुम्हें एक पुजारी के साथ में लेने होंगे ताकि कोई गलती ना हो.. पर मेरे साथ आसन लेने में तुम्हें लज्जा आ रही है तो तुम बता दो.

रीना- आपके साथ आसन.. मुझे कोई आपत्ति नहीं है..!

पुजारी- लेकिन आसन लेने से पहले तुम्हें भी मेरे बदन पर तेल लगाना होगा ऐसा कह पुजारी ने तेल की बोतल रीना के सामने घुटनों के बल आ गया.

रीना ने पुजारी की शेव की हुई छाती, पेट, पीठ और अंडरआर्म्स पे तेल लगाना शुरू किया. तेल लगाने से पुजारी बदन और चिकना हो गया. वह अब अंदर ही अंदर पुजारी के बदन से लिपटना चाह रही थी.

रीना अब पुजारी के पीछे आ उसकी पीठ के साथ पीछे से ही उसके पेट और छाती पर तेल मलने लगी. उसके ऐसा करने से चूचे हल्के-हल्के पुजारी की पीठ से टच हो रहे थे. रीना ने भी पुजारी की नाभि में दो तीन बार तेल से भरी हुई उंगली घुमाई.

पुजारी- रीना.. तुम्हारे कोमल और नर्म हाथों का स्पर्श कितना सुखदायी है.

रीना भी मन ही मन.. आपके बदन का स्पर्श भी बहुत सुखदायी है.. लेकिन शर्म की वजह से ना कह पाई.

पुजारी- चलो.. अब पहला आसन लेते हैं.. इसमें हम दोनों को एक दूसरे से पीठ मिला कर बैठना है.

पुजारी और रीना चौकड़ी मार एक दूसरे की तरफ़ पीठ से पीठ मिला कर के बैठ गए. पुजारी ने सिर्फ़ लुंगी पहन रखी थी और उसकी पीठ पहले ही नंगी थी.

रीना के ब्लाउज और पेटीकोट में होने के कारण उसकी पीठ सिर्फ़ नीचे से नंगी थी.. और ब्लाउज के हुक नहीं होने के कारण ऊपर की पीठ भी एक्सपोज्ड थी.

पुजारी- रीना .. अब तुम अपने हाथ जोड़ लो.. ऐसा कहते हुए रीना की पीठ से अपनी पीठ से रगड़ते हुए बोला. तुम्हारी पीठ का स्पर्श कितना अच्छा है.. क्या तुमने इससे पहले कभी अपनी नंगी पीठ किसी की पीठ से मिलाई है..?

रीना भी गर्म होकर पुजारी की पीठ से अपनी पीठ रगड़ते हुए – नहीं पुजारी जी.. पहली बार मिला रही हूँ.

पुजारी- अब अगले आसन में हमे घुटनों पे खड़े होकर पीठ से पीठ मिलानी है.

दोनों घुटनों के बल हो एक दूसरे की पीठ से चिपक गए.. इस पोजीशन में पीठ के साथ दोनों के हिप्स भी चिपक रहे थे.

पुजारी- अब अगले आसन में पुजारी ने इसी अवस्था में रीना की बांहो में अपनी बाँहे डाली और दोनों एक दूसरे को खींचने लगे. अब दोनों की नंगी पीठ और हिप्स आपस में चिपक गईं.

पुजारी जहाँ अपने हिप्स रीना के कूल्हों से रगड़ रहा था तो दूसरी और रीना भी अपने चूतड़ पुजारी के कूल्हों पर रगड़ने लगी.

रीना की चूत इस आपसी रगड़ाई से गरम होती जा रही थी.

पुजारी- रीना.. क्या तुम्हें मेरी पीठ के स्पर्श से आनंद मिल रहा है?

रीना ने भी इस बार शरमाते हुए बोल दिया- हाँ पुजारी जी.. आपकी पीठ का स्पर्श मुझे बहुत आनंदित कर रहा है.
पुजारी- और नीचे का..?

रीना समझ गई की पुजारी हिप्स के बारे में कह रहे है.

रीना – ह्ह..हाँ पुजारी जी..

पुजारी- रीना .. तुम्हारे चूतड़ को देखो कितने कोमल और सुडौल हैं. और मेरे चूतड़ देखो कितने कठोर हैं.

रीना – पुजारी जी.. आदमियों के थोड़े कठोर ही अच्छे लगते हैं.

साथियो अब कहानी को विराम देते है, आगे की कहानी के लिए अगले भाग का इंतजार करिए और ऐसी ही मस्त स्टोरी के लिए पढ़िये freesexstory.online.

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