मम्मी की जोरदार चुदाई- 1

मम्मी के मादक जिस्म को देख कर हर रात मेरा मन उत्तेजित होकर उनकी दमदार चुदाई के सपने देखता था लेकिन जब उनकी असल चुदाई हुई तो असली मजा सपने से ज़्यादा था।

हैलो दोस्तो, मेरा नाम सुनील है और मैं 28 साल का हूँ मेरी हाइट 5’7 और वजन 64-65 किलो है।

आज मैं आपको मेरे और मेरे मम्मी के सेक्स की कहानी सुनाता हूँ। यह बात आज से करीब 6-7 साल पहले की है जब मेरी उम्र 22 साल और मेरी मम्मी 34 की थीं।

मेरी जवानी उस समय शुरु ही हुई थी। मेरी मम्मी बहुत सेक्सी और सुन्दर थी और उनका बॉडी शेप 36-28-36 था!

वो मेरी रियल मम्मी नहीं हैं, वह मेरे डैड की सेक्रेटरी थी, लेकिन पता चलने पर मम्मी से पूछकर उससे अनओफियसली शादी कर ली।

मैं उन्हें जब भी देखता तो उनका सेक्सी फिगर देखकर मेरे मन मे गुदगुदी होती थी।

मैंने उन्हें ऑफिस के प्राइवेट रूम में (चेंजिंग रूम कम रेस्ट रूम) मैं छुप कर कपड़े चेंज करते भी हुए भी देखा था.

उनका बदन एकदम संगमरमर की तरह चिकनी था और उनकी जांघें ऐसी लगती थी जैसे दो केले का जोड़ा हो। उनके होंठ एकदम गुलाब की पंखुड़ियों की तरह और गाल एकदम कश्मीरी सेब जैसे पिंक थे।

शुरुआत में मुझे उनसे नफरत थी लेकिन उनके अच्छे व्यवहार ने मेरा माइंड चेंज कर दिया।

वो डैड के साथ घर पर फर्स्ट फ्लोर में रहती थी और उनका बेडरूम फर्स्ट फ्लोर पर था. हम लोग ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं।

डैड सोनिया(मम्मी) के साथ फर्स्ट फ्लोर पर ही सोते थे उनके बेड रूम के साथ ही एक और रूम है जो एज ए कॉमन रूम यूज़ होता था।

धीरे-धीरे मैं मम्मी के और करीब आने लगा। वह उस समय शायद मेरा इरादा नहीं समझ पा रही थीं क्योंकि वह मुझको बच्चा समझती थी पर मैं जवान हो गया था।

मेरे कॉलेज में एडमिशन लेने के बाद डैड ने मुझे ऑफिस का वर्क सिखाना शुरू कर दिया और मैं अपने फ्री टाइम में उनके साथ एसोसिएट के तौर पर ऑफिस का काम देखने लगा।

ऑफिस और घर पर जब भी मुझे मौका मिलता में उनकी जाँघों पर हाथ फेर देता, उनके चूतड़ पर रब और कभी जानबुझकर उनके बूब्स छु लिया करता।

मम्मी पता नहीं अनजाने में या जानकर भी उसे अनदेखा कर देती थी, या वह शायद मेरा उद्देश्य नहीं समझ पाती थी।

कई बार डैड में और मम्मी रात को उनके बेड रूम में ऑफिस के बारे में डिसकस करते थे उस समय मम्मी अक्सर नाईट गाऊन में होती थी और मैं आराम से उनके बदन का मुआयना करता था।

उनके बूब्स पके हुए पपीते जैसे मुझे अपनी और आकर्षित करते थे, कई बार मम्मी को भी मेरा इरादा पता चलने के बावजूद वो कुछ नहीं कहती थी।

मेरी बेचैनी हर दिन के साथ बढ़ती जा रही थी और मैंने मौके की तलाश करने के साथ मम्मी की चुदाई का पक्का इरादा कर लिया।

एक दिन डैड ने मुझे रात को 11 बजे फर्स्ट फ्लोर पर बुलाकर बताया कि उन्हें रात 2 बजे की फ्लाइट से 10 दिन के लिये जरूरी काम से बाहर जाना है और इस दौरान मुझे और मम्मी (सोनिया) को क्या करना है उसके बारे में बताने लगे।

मम्मी थोड़ा घबरा रही थीं तो डैड ने मुझसे कहा- सोनिया थोड़ी नर्वस है, तुम जरा बाहर जाओ मैं उसको समझाता हूँ।

मैं बाहर आया तो डैड ने अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया, मुझको शक हुआ कि डैड अकेले में मम्मी को क्या समझा रहे हैं?

मैं की-होल से चुपके से अंदर का नजारा देखा तो मैं स्तब्ध रह गया। डैड मम्मी को बाहों में लेकर किश कर रहे थे और जब डैड ने मम्मी के होंठ अपने होंठों से डीप किश लिया तो मम्मी भी जवाब देने लगी। डैड ने फिर मम्मी का गाऊन पीछे से खोलते हुए उनकी पीठ पर रब करना शुरू किया।

मम्मी और डैड एक दुसरे को किश करते हुए लम्बी सांसें ले रहे थे जिन्हें मैं सुन सकता था। फिर डैड ने मम्मी का गाऊन पीछे से उठाते हुए उनकी चड्डी नीचे कर मम्मी के चूतड़ पर रब करना शुरू किया।

मम्मी की पीठ दरवाजे के तरफ थी जिससे मुझे उनके संगमरमर से मुलायम और चिकने चूतड़ साफ़ नजर आ रहे थे। मम्मी उस समय मस्ती में लम्बी सांसें भरते हुए आँहे भर रही थी।

फिर अचानक डैड ने मम्मी का गाऊन आगे से ऊपर कर उनकी चूत पर उंगलियाँ फिराना शुरू करते हुए दूसरी तरफ़ पलटे इससे मम्मी की चूत वाली साइड मेरी तरफ़ हो गई और मुझे मम्मी की थोड़ी सी चूत दिखाई दी।

पर डोर से कुछ नज़र साफ नहीं आ रहा था ऊपर से मम्मी के खड़े होने के कारण चूत पूरी नजर नहीं आ रही थी बस एक छोटी लाइन दिख रही थी जहाँ डैड उंगली फिरा रहे थे।

फिर डैड नीचे झुके और मम्मी की चूत पर अपने होंठ रख दिए। और अब मम्मी उत्तेजित हो  जोर से सिसकारियाँ लेकर मजे ले रही थी।

लेकिन अचानक घड़ी पर नजर पड़ते ही डैड रुक गए और उन्होंने मम्मी को छोड़ लिप्स पर किश करते हुए बोले- डार्लिंग आई ऍम सॉरी! आई कांट गो बियॉन्ड लेट आई कम बिकॉज़? सुनील इज आल्सो आउट, एंड आई ऍम गेटिंग लेट आई ऍम वैरी सॉरी!

मम्मी भी यह सुन शांत हो अपने गाउन को ठीक करते हुए बोली, इट्स ओके पर वो असन्तुष्ट लग रही थी।

डैड ने मुझे आवाज लगाई- सुनील, आर यू देयर बेटा?, मेरा लण्ड उस समय खड़ा था और मेरी धड़कन भी नार्मल नहीं थी। लेकिन जब तक डैड डोर खोल बाहर आए तब तक मैं नार्मल हो गया था।

डैड ने दरवाजा खोलते हुए बोला- ड्राईवर को बुलाओ और मेरा सामान गाड़ी में रखो मुझे तुरंत ही निकलना है। मैं और मम्मी डैड को ड्रॉप करना चाहते थे पर उन्होने स्ट्रिक्टली मना कर दिया और हमे बेस्ट ऑफ़ लक कहते हुए किश किया।

डैड के जाने के बाद मम्मी ने कहा- सुनील आज मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है तो तुम ऊपर वाले कमरे में ही सो जाओ।

मैं तो जैसे इसी मौके की तलाश में था। लेकिन थोड़ा झिझकने का नाटक करते हुए उन्हें हाँ! कह दिया।

मम्मी और मैं फर्स्ट फ्लोर पर आ गए और मम्मी अपने बेडरूम में चली गई और मैं बाहर कॉमन रूम में लाइट ऑफ करके सो गया।

मम्मी घबरा रही थी, इसलिए उन्होंने नाईट लैंप ऑन रकते हुए दरवाजा तो बन्द किया पर लॉक नहीं किया।

मुझे नींद नहीं आ रही थी क्योंकि में तो मम्मी के साथ सपनो की दुनिया सजा रहा था। करीब आधे घंटे बाद मम्मी मेरे कमरे में आई और लाइट ओन की तो देखा कि, मैं भी जग रहा हूँ।

मम्मी बोली- सुनील लगता है, तुमको भी नींद नहीं आ रही है, 2:00 बज गए हैं! मैं थोड़ा अनकम्फर्टेबल फील कर रही हूँ।

मैंने यह सुन मम्मी से कहा कि, अगर आप बुरा ना माने तो में अन्दर आपके पास बैठता हूँ आपको शायद बातें करते हुए नींद आ जाए!

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