मेरा नाम सुनीता है और में 23 साल की एक सुंदर लड़की हूँ। मैं आपको आज जो कहानी सुनाने जा रही हूँ वो मेरी माँ और मेरे टीचर की चुदाई के लिए उन्होंने मुझे कैसे फसाया उसके बारे में बताया है।
मेरे पापा एक बैंक में मैनेजर के पद पर काम करते हैं और काम के ज़्यादा होने के कारण वे ज्यादातर समय देर रात को आते है और खाना खाकर सो जाते है।
मेरे पापा और मेरी मम्मी की आपस में बिल्कुल भी नहीं बनती है और पापा का मेरी तरफ़ भी बिल्कुल ध्यान नहीं है।
यह घटना उस समय की है जब में बारहवीं में पढ़ रही थी और 18 साल की थी।
मैं शुरू से ही मैथस में कुछ कमजोर थी और बारहवीं कक्षा में बोर्ड एग्जाम होने के कारण मेरी मम्मी ने मुझे पढ़़ाने के लिए एक मैथ टीचर रखा था, मैथ टीचर लगभग 29-30 साल का होगा और देखने में अच्छा था।
ट्यूशन के पहले ही दिन मम्मी ने टीचर के साथ मुझे अपने कमरे में बुलाया और इंस्ट्रक्शन देना शुरू कर दिया और मुझे टीचर के लिए चाय बनाने को कहा।
जब में चाय बनाने के बाद मम्मी के रूम में लेकर आई तो मैंने देखा की मम्मी के कपड़े अस्त व्यस्त थे और टीचर के कपड़ो पर मम्मी के बाल और पाउडर लगे हुए थे।
वे दोनों मुझे देखते ही पहले की तरह ही बैठ गये जैसे कि कुछ हुआ ही ना हो। लेकिन मेरी समझ में आ गया था कि टीचर मेरी मम्मी के साथ किसिंग कर रहे थे।
अब हर रोज़ शाम को 5 बजे टीचर मुझे पढ़़ाने आते थे ट्यूशन के दौरान समझाने के बहाने मेरे शरीर पर इधर-उधर हाथ फ़िराते रहते थे जो की मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था।
एक दिन टीचर ने मुझे कुछ फार्मूले याद करने के लिए कहा लेकिन में उन्हें याद नहीं कर पाई तो उन्होंने मेरी गोल चूचियों की चुटकी लेते हुए कहा – तुम बिल्कुल भी नहीं पढ़़ती हो, मैं तेरी मम्मी से बात कर के आता हूँ तब तक ये फार्मूले याद करो।
मैंने चुपके से पीछे जाकर देखा, मेरी मम्मी रसोई में खाना बना रही थी। उनके रसोई में जाते ही मम्मी ने उनसे पूछा- तुम्हारा काम हो गया क्या?
टीचर ने कहा- तेरी बेटी तो अपने शरीर पर भी हाथ नहीं रखने देती, चूत क्या देगी। मेरा तो लंड बड़ा हो गया है, अब उसे कैसे शांत करूँ।
मम्मी ने कहा- उसकी टेंशन क्यो लेते हो, मैं हूँ ना!
इतना कहने के साथ मम्मी ने घुटनों के बल बैठकर टीचर की पैंट की ज़ीप खोली और उनके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
टीचर का लंड बहुत ही ज़्यादा बड़ा था और उसे देख कर मेरी चूत में चींटियाँ रेंगने लगी और रूम में आकर अपनी चुत को सहलाते हुए रसोई का दृश्य याद करने लगी।
मेरी मम्मी द्वारा टीचर के बड़े से लंड को चूसने का वह दृश्य कई दिनों तक मेरे दिमाग़ में छाया रहा और मैं रात भर टीचर का लंड याद करती हुई कभी अपनी चूचियों को सहलाती तो कभी चूत को… और जब मेरे बुर से पानी झरने लगता तभी मुझे नींद आती थी।
मैं अब यह सोचने लगी कि शायद लंड को चूसना अच्छा लगता होगा जैसे की हाथों से अपनी चुत को सहलाने पर मुझे भी मजा आता था. अब में मन ही मन सोचने लगी कि कोई मेरी भी बुर चाटे।
सेक्स की इन्ही बातो को सोचते हुए मेरी चूत में खलबली मच जाती थी और में अपने हाथों से ख़ुद को संतुष्ट कर देती। अब मैं भी सेक्स के बारे में सोच-सोचकर अपने टीचर का लंड चूसने बेताब हो गई।
एक दिन टीचर ने एक हार्ड मैथ का फ़ॉर्मूला सीखने के बहाने मुझे अपने पास बिठाकर फ़ॉर्मूला सिखाने के बहाने मेरी चूचियों को सहलाना शुरू किया तो में गरम होने लगी और अनजाने में अपनी टाँगें फैला दीं।
मेरे टाँगे फैलाते ही उन्होंने अपना हाथ मेरी पेंटी के ऊपर रखा और मुझे किस करने लगे और धीरे-धीरे मेरे बटन खोलने लगे।
मैंने कहा- सर अभी कुछ मत करो, मेरी मम्मी आ जाएगी!
टीचर ने कहा- उसकी टेंशन तुम मत लो, तेरी मम्मी भी मुझ से खूब चुदवाती है अगर वह आ जाएगी तो तेरे साथ में उसे भी चोद दुगा।
टीचर ने मुझे पूरी नंगी कर दिया और मुझे किस करने के बाद नीचे आकर मेरी चूचियों और बुर को चाटने लगे और 69 पोजीशन में आकर अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया।
आज इतने दिनों बाद इतना बड़ा लण्ड पाकर मानो मेरी तो मन की मुराद पूरी हो गई और में मज़े से पूरा अंदर लेकर उस बड़े लंड को चूसने लगी।
तभी अचानक से रूम का गेट खुला और मेरी मम्मी ग़ुस्से से लाल होकर बोली- तुम मुझे यह बताओ की यहाँ पर पढ़ाई करते हो की चुदाई।
टीचर ने कहा- अरे मेरी रानी मैं तुम्हारी बेटी को भी चुदाई के लिए तैयार कर रहा हूँ। इधर तो आओ और देखो इसकी चूत कितनी मीठी है तुम भी इसका रस चखो और देखो में सही कह रहा हूँ या नहीं।
मेरी ने टीचर के इतना कहते ही अपना असली चेहरा दिखाते हुए अपना मुँह मेरी चूत पर रखा और उसे मस्ती के साथ अंदर तक जीभ घुसाकर चाटने लगी।
मुझे मेरी मम्मी का अपनी जीभ को मेरी चूत में पूरा अंदर घुसाकर चाटने से बहुत मजा आ रहा था और में उनके सिर को पकड़कर अपनी चुत को सिर पर दबाने लगी।
उधर टीचर ने मौक़ा देखा और मेरी मम्मी को पीछे से नंगा कर एक झटके से अपना पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत में घुसा दिया।
टीचर के लंड के झटके के साथ ही मेरी मम्मी ने एक आँह भरी और अगले ही पल अपनी जीभ घुसाकर मेरी चूत को तब तक चाटा जब तक की में उनके मुँह में नहीं झड़ गई।
मम्मी के साथ इस चूत चटाई से मुझे मजा तो बहुत आया मगर मन में यह बात भी है कि मेरी अपनी ही मम्मी ने मुझे सेक्स के लिए इस्तेमाल किया।
तो दोस्तो, ये थी मेरी और मेरी मम्मी की चुदाई की कहानी. यह कहानी आपको कैसी लगी इसके बारे में ज़रूर बताये?
साथियो, ऐसी ही मस्त स्टोरी के लिए पढ़िये freesexstory.online पर, आप अपने कमेंट्स कर सकते हैं।
गाँव की गोरी और शहर का डॉक्टर-1
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