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दोस्त की बहन, बुआ और माँ की चुदाई-2

by mahesh srivastava
July 27, 2026
in Aunty Sex, Family Sex
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आज की कहानी में आप पढ़ेगे की बुआ की खेत में मालिश के बाद रात को कैसे मैंने मालिश करते हुए मेरे दोस्त की माँ को गरम करते हुए चुदाई के लिए तैयार किया

कहानी का पिछला भाग : दोस्त की बहन, बुआ और माँ की चुदाई-1

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मैंने बाजार से वापस आते हुए रास्ते में दुकान से बीयर की बोतलें ली. घर आकर मैं हाथ-पैर धोने के बाद लुंगी पहन कर अपने कमरे में जाकर बीयर  की 4 बोतलें ख़ाली कर दी और मुझे नशा होने लगा.

कुछ देर बाद बुआ ने खाने के लिए आवाज लगाईं तो हम सबने साथ में बैठ कर खाना खाया और थोड़ी देर बाहर घूमने के बाद हम सभी उनके बरामदे में बैठ कर बाते करने लगे.

बातों के दौरान ही बुआ, माँ से बोलीं, भाभी- महेश बहुत अच्छी मालिश करता है. आज खेत में काम करते हुए मेरी कमर में दर्द हुआ तो इसने मेरी ऐसी मालिश की की कुछ ही देर में मुझे आराम आ गया.

माँ हँसते हुए अजीब नज़रो से मेरी और देखने लगी तो मैंने अपना सिर झुका लिया.

कुछ देर बाद बहन और बुआ सोने चली गईं लेकिन मैं और माँ वही पर बैठे हुए बातें करते रहे. तो माँ ने मुझसे कहा मेरे पैर दुख रहे हैं. क्या तुम इनकी मालिश कर दोगे?

मैंने कहा कि अगर सरसो का तेल हो तो लेकर आ जाओ उससे आपको जल्दी आराम मिलेगा.

माँ ने कहाँ चलो कमरे में चलते है तेल भी वही पर पड़ा है और में भी वही पर सोती हूँ.

कमरे में जाने के बाद माँ ने साड़ी खोल दी और अब केवल ब्लाऊज़ और पेटीकोट में आ गई और तेल की शीशी मुझे देते हुए बिस्तर पर लेट गईं.

मैं भी लुंगी और बनियान में उनके पैर के पास बैठ गया और उनके पेटीकोट को थोड़ा ऊपर कर पैर पर तेल लगा कर मालिश करने लगा.

माँ बोली, बेटा तेरे हाथो में तो जादू है जरा पिंडली में भी जोर लगा कर मालिश करो. मैंने उनके  दाएँ पैर को अपने कंधे पर रखा और उनकी पिंडली में मालिश करने लगा. मेरे ऐसा करते ही उनके पेंटी नहीं पहनी होने के कारण मुझे उनकी झांटो में छिपी हुई चूत के दर्शन हो रहे थे.

उनकी चूत को देखते ही मेरा लण्ड लुंगी में ही हरकत करने लगा. थोड़ी देर बाद माँ ने पेटीकोट को घुटनों के थोड़ा ऊपर करते हुए और ऊपर मालिश करने का कहा.

मैं अब पिंडली के ऊपर मालिश कर रहा था अब मुझे उनकी चूत साफ़ दिखाई दे रही थी और मेरा लण्ड फूल कर कड़ा और सख्त होकर चड्डी से बाहर निकलने को बेताब हो रहा था.

मैं मालिश करते हुए अपनी उँगलियों को कभी-कभी उनकी जाँघों के पास ले जाता और जैसे ही मेरी उंगलियाँ उनके जाँघों से स्पर्श करती तो, उनके मुख से हाआ! हाअ! की आवाज निकलती थी.

मैंने उनकी ओर देखा, उनकी आँखे बंद थी और वो अपने होंठों पर जीभ फेर रही थीं.

मैंने इस सुनहरे मौके का फ़ायदा उठाने का सोचा और उनके मन में क्या चल रहा है यह जानने के लिए उनसे कहा, मेरे हाथ तेल से चिकने होने के कारण काफ़ी फिसल रहे है. अगर आप को अच्छा नहीं लग रहा है तो मालिश बंद कर दूँ?

बेटा तुम मालिश करते रहो, मुझे मालिश से आराम मिल रहा है. फिर मैंने उनकी उत्तेजना को देखने के लिए घुटनों के ऊपर मालिश करते हुए अपनी उँगलियों से उनकी चूत के इलाके के पास छूने लगा. तो वो आँखें बंद किए हुए ही आहें भर रही थीं.

अब मैंने आगे बढ़ने का सोचा और उनकी चूत को छूने की सोची और थोड़ी देर बाद मैंने अपनी उँगली से उनकी चूत को सहलाया, अगले ही पाल अपनी उँगली उनके चूत से हटाते हुए उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए उनकी और देखा लेकिन उनकी आँखें बंद थी.

एक और माँ कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी वही मेरा लण्ड सख्त होकर चड्डी के बाहर निकलने को बेताब हो रहा था.

मैंने माँ से कहा, मुझे प्यास लगी है में थोड़ी देर में पानी पीकर आता हूँ बाक़ी की मालिश बाद में करुगा.

माँ बोली, बेटा तू तो बहुत अच्छा मालिश करता है. मन कर रहा है रात भर तू मेरी मालिश करता रहे. मैंने कहा में पानी पीकर आ जाऊ उसके बाद जब तक कहोगी मैं मालिश करुँगा.

में पानी पीकर जब वापस आ रहा था तो, बुआ के कमरे से निकलते हुए मुझे उनकी आवाज सुनाई दी तो मैंने उत्सुकता से इधर उधर देखने की कोशिश की तो थोड़ी सी खुली हुई खिड़की दिखाई दी.

मैंने खिड़की से अंदर देखा, बुआ चारपाई पर नंगी सोईं हुई थी और चूत में ककड़ी डाल कर अन्दर-बाहर करते हुए मोन करते हुए हा! हाआ! हाअ! की आवाज निकाल रही थीं.

यह सीन देख कर! मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया और मैं तेज कदमों के साथ माँ के कमरे में चला गया. मुझे कमरे में देखकर माँ ने कहा, डिम लाईट जला दो ताकि मालिश करवाते हुए अगर मुझे नींद आ जाए तो तुम भी मेरे बगल में सो जाना.

माँ बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थीं और मैंने अपने हाथों पर तेल लगाया और पेटीकोट को गाण्ड के ऊपर उठाते हुए उनके पैरों की मालिश करने लगा.

मैंने मालिश की शुरुआत पिंडली से की फिर, धीरे-धीरे घुटनों के ऊपर जाँघों के पास चूतड़ों के नीचे मालिश करने लगा तो मुझे उनकी झाँटो के साथ गाण्ड का छेद नज़र आने लगा. मैंने हिम्मत कर उनका पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया.

मेरे ऐसा करने पर भी माँ कुछ नहीं बोली और उनकी आँखें बंद होने के कारण मैंने सोचा कि उनको नींद आ गई होगी.

उनकी मस्ट गाण्ड और चूत के बाल को देखते हुए मैं तेल से भरी हुई उँगली को गाण्ड के छेद के ऊपर लगाने लगा वो लेकिन वो कुछ नहीं बोलीं तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई.

इस प्रकार मालिश करते हुए सामने का नज़ारा देखने से मेरा लण्ड टाईट हो गया और चूत में घुसने के लिए बेताब हो रहा था कि तभी माँ ने कहा कि, बेटा मेरी कमर पर भी मालिश कर दो.

में खड़ा हुआ और अपनी चड्डी उतार कर उनकी कमर पर मालिश करते हुए उनसे कहा कि, तेल से आप का ब्लाऊज़ खराब हो जाएगा क्यों न आप अपने ब्लाऊज़ को थोड़ा ऊपर उठा ले?

मेरे कहने पर उन्होने अपने ब्लाऊज़ के बटन खोलते हुए उसे ऊपर उठा दिया और मैं उनकी कमर की मालिश करने लगा और इस दौरान मेरी हथेली कई बार साईड से उनके बूब्स को छू जाती थी.

मेरी इस तरह से मालिश करने से वो पूरी तरह से कामुक हो गई थी और करवट बदल कर सीधी हो गईं.

मैंने देखा! उनकी आँखें अब भी बंद थी और उनके ब्लाऊज़ के सारे बटन खुले होने से उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ साँसों से साथ ऊपर नीचे होती हुई साफ़-साफ़ दिखाई दे रही थी.

तभी उन्होंने नशीली आवाज में धीरे से कहा- बेटा तुम भी मालिश करते हुए थक गए होगे, आओ और मेरे पास ही लेट जाओ.

मैं हिचकिचाया तो उन्होंने मेरी परेशानी को भाँपते हुए कहा –तुम अपनी बनियान उतार दो और हर रोज जैसे सोते हो उसी तारा से मेरे पास सो जाओ! शरमाओ मत!

मैं बनियान उतार कर उनके पास लेट गया और उस स्थिति में उनका आधा नंगा शरीर मेरे बिल्कुल पास था. में उनकी और करवट लेकर लेता हुआ था, मुझे मेरे सामने उनकी दोनों चूचियाँ बिल्कुल नंगी दिखाई दे रही थी, ऐसे में मेरा ख़ुद पर क़ाबू कम होता जा रहा था!

इतने में माँ बोली- इतने महीने से आज मालिश होने से शरीर को काफ़ी आराम मिला है!

इसी के साथ उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर धीरे से खींचते हुए अपनी ऊपर की और उठी हुई चूची पर रख दिया और कहा मुझे यहाँ पर कुछ खुजली हो रही है, इसको भी सहलाते हुए मालिश कर दो.

मैंने अपने एक हाथ से उनकी चूची को सहलाना शुरु किया तो मेरे हाथ की रगड़ से उनके निप्पल कड़े हो गए. अचानक उन्होंने अपनी पीठ मेरी तरफ़ की और बोलीं- बेटा मेरा ब्लाऊज़ खोल दो और अच्छे से सहलाओ.

मैंने काँपते हुए हाथों से उनके सहयोग से ब्लाऊज़ खोल कर उनके बदन से अलग कर दिया.

अब उन्होंने मुझे दोनों हाथों से उनकी नंगी चूचियों को सहलाने के लिए कहा तो मैंने पीछे से ही उन्हें पकड़ा तो उन्होंने कहा थोड़ा कस कर दबाओ ना! मैं तुरंत ही जोश में आकर उनकी रसीली चुचियों के साथ जम कर खेलने लगा.

में मेरी जिंदगी में पहली बार किसी औरत की चुचियों को छू रहा था, क्या कड़ी और बड़ी-बड़ी चूचियाँ थी उनकी और उनके ऊपर मस्त निप्पल्स. मेरे दबाने से वो भी बेकाबू हो गई और हल्की हल्की आवाजे निकलने लगी.

उनकी चुचियों को मसलते हुए में पीछे से उनके बदन से चिपक गया और मेरा खड़ा हुआ लण्ड लुंगी से बाहर आकर उनकी जाँघों में रगड़ मारने लगा था.

अब उन्होंने कहा- बेटा तुम्हारा लण्ड बहुत लम्बा और मोटा लग रहा है. क्या मैं हाथ लगा कर देखूँ? और इसी के साथ उन्होंने अपना हाथ मेरे लण्ड पर रखा और उसको मापने लगी.

मेरे लंड को महसूस करते हुए अपनी मुठ्ठी में मेरे लण्ड को कस बोली अरे ये तो बहुत कड़क है. अब वो मेरी तरफ़ घूमी और अपने हाथ से मेरे लण्ड को कस कर पकड़ कर उसकी चमड़ी को नीचे किया तो सुपाड़ा बाहर निकल गया.

सुपाड़े की साईज और उसकी मोटाई को देख कर वो हैरान होते हुए बोली- बेटा इसे कहाँ छुपा रखा था? मैंने अपनी जिन्दगी में आज तक ऐसा लंड नहीं देखा.

मैंने कहा- अगर आप ट्रेन में गहरी नींद में नहीं होतीं तो शायद महसूस कर लेती क्योंकि रात में मेरा सुपाड़ा आप की चूत को रगड़ रहा था.

मुझे क्या पता था कि, तुम्हारा लौड़ा इतना बड़ा होगा! इसी के साथ उन्होंने मेरे लण्ड को अपने हाथ में लेते हुए खींचते हुए कस कर दबाया और अपने पेटीकोट को कमर के ऊपर उठा कर मेरे तने हुए लण्ड को अपनी जाँघों के बीच में ले कर रगड़ने लगी.

अब उन्होंने उत्तेजित होकर एक चूची को मेरे मुँह मे देते हुए उसे चूसने को कहा तो मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी चूचियों को पकड़ते हुए एक-एक कर मुँह मे भर कर चूसने लगा.

आज अच्छे से मज़े लेकर मेरी चुचियों और कड़े निप्पलों को चूसकर उनका पूरा रस निकाल दो और मुझे तृप्त कर दो. उनके मुँह से ओह! ओह! अह! शी! शी! की आवाज निकल रही थी.

इसी के साथ में उन्होंने कहा, आज में पूरी तरह से तुम्हारी हूँ तुम चाहे जो करो लेकिन मुझे संतुष्ट कर दो.

साथियो आगे की कहानी के लिए अगले भाग का इंतजार करिए और ऐसी ही मस्त स्टोरी के लिए पढ़िये freesexstory.online.

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