आप सभी freesexstory.online के पाठकों को मेरा नस्कार। कैसे हैं आप लोग? में भी क्या पूछ रही हूँ आप सभी तो मजे में ही होगे।
आप सभी को तो में यह बता रही हूँ की आज ही मैंने अपनी चूत के बाल साफ़ किये है और बालों के बोझ से मुक्त होने के बाद अब फ़िर से मेरी यह निगोड़ी चूत एक बार फिर से किसी गोरी कमसिन लड़की की चूत की तरह से तनतना रही है।
तो दोस्तो अब आपको ज़्यादा बोर ना करते हुए, अब मैं अपनी कहानी के बारे में बताती हूँ की कैसे एक बार फ़िर से मेरे अब्बु और भैया ने मुझे फिर से चोदा।
दरअसल एक दिन मेरी अम्मी नानी के घर गई हुई थी और में ब्लू फ़िल्म देखकर बहुत ही ज़्यादा चुदासी हो गई थी। अब आप लोगो से क्या छिपाना, मेरी पहली चुदाई भी मेरे अब्बु ने ही की थी और फ़िर मेरी अम्मी ने भी मेरे भैया से चुदवाया था और अब वो लोग जब कभी भी मौक़ा मिलता है तो मुझे चोदा करते थे।
में ब्लू फ़िल्म देखकर अपनी चुत को सहला रही थी मगर दूसरी और बहुत दिन से मेरे अब्बु अम्मी की फ़ैली हुई चूत को चोदने में मस्त थे और मेरे भैया ने भी कोई दूसरी गर्ल फ़्रेन्ड फ़ंसा ली थी और शायद इसी वजह से दोनों ने ही मुझ पर ध्यान देना छोड़ ही दिया था
आज जब मेरी अम्मी जब नानी के घर गई तो उनके घर से बाहर जाते ही मैंने सबसे पहले अपनी झांटे बनाई और ब्लू फ़िल्म देखकर अपनी प्यारी चुत को सहलाकर कामुक होकर चुदाई की आस लिए रात को अब्बु के कमरे में गई।
अब्बु उस समय कोई मूवी देख रहे थे और मुझे कमरे में देख कर बोले- बेटी, क्या हुआ आज बहुत दिन बाद तुझे अपने अब्बा की याद आई?
तब मैंने अब्बा से कहा- आप तो सिर्फ़ अम्मी जान की चूत की चुदाई में ही लगे रहते हैं आपको अपनी इस नाजुक और भरे हुए बदन वाली बेटी का जरा भी खयाल नहीं रहता है! अब आप ही बताओ आपने कितने दिनों से मेरी इस रस से भरी हुई चुत को नहीं चोदा है।
मेरी इस नाराजगी को सुनकर अब्बु ने प्यार जताते हुए कहा- ऊऊओह्ह ह्ह मेरी प्यारी रानी बेटी बहुत दिनों से चुदाई के लिए तरस गई है-आजा, आज तुझे फिर से छोड़कर तेरी इस प्यास को मिटा देता हूँ !
और इतना कहने के साथ ही उन्होंने डीवीडी को बदल कर उसमें ब्लू फ़िल्म लगा दी। उस ब्लू फ़िल्म में एक छोटी सी लड़की को एक साथ में सात आदमी चोद रहे थे। उस लड़की की ऐसी चुदाई को देख कर मेरी आँखें बाहर आ गई और मैंने अपने अब्बु से कहा- अब्बा यह बच्ची इन सातो लोगो को एक साथ कैसे झेल रही है उसको तो कितना मज़ा आ रहा होगा, ऊपर से इसकी उम्र भी अभी ज्यादा नहीं लग रही है।
तब अब्बु ने मेरी उत्सुकता को शांत करते हुए कहा- मेरी बच्ची, ये साले अंग्रेज लोग ऐसे ही मजे लेते हैं। तुम ख़ुद ही देखो इस लड़की को-साली इतनी सी है और देखो कैसे मज़े ले लेकर इस सभी लोगो के लण्डों का मज़ा एक साथ ले रही है। जबकि इसमें एक तो इसका बाप है और एक भाई है उसके अलावा सभी उनके दोस्त हैं।
मेरी आँखो के सामने टीवी पर चल रहे यह सब दृश्य देखकर मेरी प्यारी सी चूत में भी चुदाई की भूख जगने लगी और मेरे हाथ उसे सहलाते हुए उसकी चुदाई का भरोसा देने लगे।
मैंने अपनी चुत पर हाथ फैरते हुए अपने अब्बु से कहा- अब्बु, मैं तो अभी सिर्फ़ आप से और भैया से ही चुदवाकर अपने लिए पनाह मांग लेती हूँ।
अब्बु ने भी मेरी गरमी को भाँपते हुए कहा- उठ कर जा और बगल के कमरे से अपने भाई को बुला ला। वह भी अभी तक नहीं सोया होगा और अपने लण्ड को अपने हाथ में पकड़ कर उसे सुलाने की कोशिश कर रहा होगा।
पापा का आदेश सुन मैं भैया के कमरे की तरफ़ बढी तो कमरे में देखा की सच में मेरा भाई अपने लण्ड को हाथ में लेकर उसका सड़का मार रहा था।
मैं जल्दी से दौड़कर उसके पास पहुची और उससे बोली- क्या भैया, आप भी-क्यो अपने हाथो को कष्ट दे रहे हो। जब घर में इतनी खूबसूरत बहन के होते हुए भी अगर तुम्हें यह सब करना पड़े तो लानत है मेरी इस जवानी पर!
मैंने अब आगे बढ़कर तुरंत ही उनका लण्ड अपने कोमल हाथों में लेकर उसे बड़े प्यार से सहलाने लगी और जल्दी-जल्दी हाथ को आगे पीछे करके उसकी मूठ मारने लगी और कुछ ही देर में उसे मुँह में लेकर चूसने लगी।
मेरी इस बेताबी को देखकर भैया का लण्ड अपनी पूरी औकात में आने लगा और उन्होंने मेरे बालों को अपने मजबूत हाथों से पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारते हुए मेरे मुँह को अपने लंड से चोदने लगे और कुछ समय में ही उनका पानी मेरे मुँह में गिर गया जिसे की में चटकारे लेते हुए चाट गई और उनसे बोली- चलो आपको अब्बु उनके रूम में बुला रहे हैं।
आज फ़िर से तुम दोनों मिलकर मुझे रात भर चोद-चोदकर मुझे और मेरी चूत की आग को ठंडा कर दो। इसी के साथ मैंने भैया का लण्ड पकड़ा और उसे अब्बु के कमरे में ले आई और भैया को देखते ही अब्बु ने कहा- मैंने कहा था तुझसे यह साला अपने रूम में मुठ मार रहा होगा।
मैंने जवाब में कहा- अब्बु, मान गई आपके तजुरबे को में तो, सच में भैया अपने लंड का सड़का ही मार रहे थे।
में तो पहले से ही चुदाई की आग में गरम थी तो मैंने तुरंत ही अपने अब्बु का लण्ड अपने मुँह में ले लिया और मेरे भैया भी अब कहा मानने वाले थे, वे भी पीछे से मेरी गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ते हुए उसे मेरी छूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगे।
मैंने अब्बू का लंड चूसते हुए उन्हें मादक निगाहों से देखते हुए कहा- अब्बु जी, आज मैं भी ब्ल्यू फ़िल्म वाली लड़की की तरह पांच-सात लोगो से एक साथ ही चुदना चाहती हूँ।
अब्बू ने हैरानी से मेरी और देखते हुए कहा- बेटी, तू अभी नहीं झेल पायेगी एक साथ इतने लोगो को।
मगर मैं तो अब पूरी तरह से चुदाई के लिए तैयार थी, मैंने गुस्से का नाटक करते हुए कहा- आप दोनों मेरी बात को गौर से सुन लो आप दोनो को मुझे पांच-सात लोगो से एक साथ चुदवाना है तो चुदवाना ही है। अभी के लिए तो ठीक है लेकिन अगर आपने कल मुझे पांच-सात लोगो से एक साथ नहीं चुदवाया तो बहुत बुरा होगा।
अब्बु ने मुझे बहलाते हुए कहा- अच्छा-अच्छा मेरी रानी बेटी, मैं तो यह सब तेरे भले के लिये ही कह रहा था। अगर एक साथ दो-दो लंड तेरी चूत और गांड में गए और वह फ़ट गई तो परेशानी तो हमीं दोनों को होगी। मगर अगर तू मानने के लिए ही तैयार नहीं है तो वही सही लेकिन अभी तो हम दोनों को ही झेल कर दिखा दे फिर देखते है!
अब्बू ने इतना कहते ही एक झटके में ही फ़िर से अपना मूसल जैसा लण्ड मेरे मुँह में अचानक से मेरे मुँह के अन्दर तक धकेल दिया और में इस झटके से संभल पाती उससे पहले ही भैया ने भी पीछे से मेरी गाण्ड फ़ैलाकर इतनी जोर से धक्का मारा कि मेरी आँखों के सामने तारे नज़र आने लगे ऊऊउईई… माआआ… मर… गई आआ…ह्हहह… भैया जरा धीरे से ध…क्का मारो तू तो मुझे आज नानी याद दिला रहा है।
अब्बु ने गरजते हुए सख्ती के साथ कहा- बेटी, चाहे जिसका नाम ले पर अपनी नानी का नाम ना ले।
तब चौंककर मैंने अब्बू से कहा- क्यूं?
अब्बु तुरंत ही भारी आवाज में बोले- तेरी नानी की चूत तो मैंने बहुत बार मारी थी और कई साल तक मैं उसकी चूत चोदता रहा था।
अब्बू के इठा कहते ही मेरे साथ-साथ मेरे भैया का मुँह भी खुला का खुला रह गया, भैया ने उत्सुकता से कहा- अब्बु, क्या आपने सच में नानी को चोदा है?
अब्बु ने कहा- हां मेरे बेटे, मेरी सास मेरी जवानी में बहुत ही ज़्यादा हसीन और मस्तानी थी। तुझे तो पता होगा की तेरी अम्मी की बहुत ही कम उमर में मेरे साथ में शादी हुई थी। मेरी शादी के समय मैं 19 साल का और तेरी अम्मी सिर्फ़ 18 साल की थी और तेरी नानी उस समय सिर्फ़ 34 साल की थी।
मगर मेरे ससुर यानी की तेरे नाना की उमर उस समय करीब 42 साल थी, और वे तुम्हारी नानी को खुश भी नहीं कर पाते थे तो उन्होंने मेरे साथ में अपनी जवानी के मजे लेना शुरू कर दिया। खेर अभी जाने दो इन बातों को और अभी तो अपनी चुदाई के मझे लो। उनकी चुदाई के बारे में फ़िर कभी वक़्त मिला तो बताऊँगा।
मैंने मेरी चुदाई पर ध्यान देना ही सही समझा और इस समय मेरे भैया पीछे से ज़ोर ज़ोर से मेरी गाण्ड मार रहे थे तो आगे से अब्बु मेरे मुँह में अपने लण्ड से धक्के लगा-लगाकर उसे चोद रहे थे।
मेरी आँखों के सामने वही फ़िल्म चल रही थी और दोनों और से चल रही चुदाई के कारण मुझे भी मस्ती आने लगी और मैं अपने मुँह और गाण्ड को आगे पीछे करते हुए उनके धक्को के साथ कदमताल मिलाने लगी और कुछ ही समय में मेरे भैया झड़ गये मगर मेरे अब्बु अभी भी नहीं झड़े थे।
भैया के झड़ते ही अब्बू ने मुझे बेड पर खड़ा होने को कहा तो में तुरंत ही अब्बू के कहे अनुसार खड़ी हो गई और अब्बु ने मेरे दोनों पैर अपने कन्धे के दायें बायें करते हुए मेरी चूत को पूरा अपने मुँह में भर लिया और मस्त चूसने लगे। मैं अब्बू के ऐसा करने से बुरी तरह तड़प रही थी और उनका मुँह जोर-जोर से अपनी चूत पर दबाने लगी।
अब्बू ने मेरे दोनों हाथों की अंगुलियों में अपनी अंगुलिया फ़साई और मेरी चूत में जीभ डाले हुए ही खड़े होने की कोशिश करने लगे तो मेरा बैलेन्स बिगड़ने लगा और मैंने घबरा कर कहा- आआअह्हह अब्बु क्या कर रहे है मैं गिर जाऊँगी !
मगर अब्बु को बहुत ही ज़्यादा तजुर्बा था और वे नहीं माने और वे मुझे अपने कंधे पर बैठा कर खड़े हो गये। अब मेरी दोनों टांगे उनकी गर्दन में कसकर अपनी पकड़ बनाए हुए थी थी और मेरे ना चाहते हुए भी मेरी चूत में उनकी पूरी जीभ घुसकर इधर उधर घूम रही थी और उधर मेरे भैया आंख फाड़कर हम दोनों को इस पोज़ को देख रहा था, क्या बताऊ दोस्तों-कसम से अब्बू ने तो आज मुझे जन्नत दिखा दी थी।
मेरी जिंदगी में इस तरह से पहली बार कोई मेरी चूत चाट रहा था और में इसे ज़्यादा देर नहीं सह पाई और कुछ ही देर मैं ऊऊ…ओहह्ह… ऊओह्ह आह्हह… आआ…अह्ह करते हुए उनके मुँह पर झड़ने लग गई और मेरा सारा रस अब्बु के मुँह से होकर बहता हुआ उनके लंड तक बहने लगा।
अब्बु ने मेरे झड़ते ही मुझे नीचे उतारते हुए बेड पर लेटाकर तुरंत ही अपने लण्ड को मेरी दोनों चूचियों के बीच में रगड़ने लगे और अपने दोनों हाथों से मेरी चुचियों को दबा रहे थे और मैं हर झटके के साथ उनके लण्ड की टोपी को अपने मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी। पर अब्बु बहुत जल्दी-जल्दी लंड को आगे-पीछे कर रहे थे।
कुछ देर की कोशिश के बाद जब मुझे उनके लंड की टोपी को मुँह में लेने में सफलता नहीं मिली तो झलाते हुए उनसे कहा- अब्बु, अपना लण्ड मेरे मुँह में दीजिये। अब्बु ने मेरे इतना कहते ही अपने लण्ड को दोनों चूची के बीच से हटाया और मेरे मुँह में डाल दिया और मेरी चूची दबाने लगे और कुछ ही समय में उनके लण्ड रस की धार निकालने लगी जिसे मैं चाट गई।
अब्बु ने कुछ देर आराम किया और फिर मेरे बदन को सहलाते हुए उठकर अपना लण्ड मेरी गाण्ड में ठूंस दिया और ज़ोर-ज़ोर से मेरी गांड मारने लगे, उस दिन अब्बु और भैया दोनो ने मेरी गाण्ड ही मारी थी।
मेरी बुर के साथ उन्होंने कुछ भी हरकत नहीं की थी और फ़िर रात एक बार फिर से दुबारा मुझे उठाकर फिर से मेरी गाण्ड एक-एक बार और मारी और सारी रात मेरी गाण्ड फ़ड़फ़ड़ाती रही।
सुबह जब में उठी तो अब्बु ने कहा- क्यों मेरी रानी बेटी, क्या खयाल है? क्या अब भी पांच-सात लोगो से एक साथ चुदवाओगी क्या?
मैंने रात भर चुत चुदाई ना होने के कारण से गुस्से से कहा- साला बेटीचोद भोसड़ी वाले, एक बार कहा ना चुदवाना है तो चुदवाना है बस बात खत्म। तब अब्बु मेरी और मुस्कुरा कर बोले- कोई बात नहीं, आज रात तैयार रहना, आज में मेरे पाँच दोस्तों को लेकर आऊँगा!
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