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सानिया आंटी की चूत चुदाई

by freesexstory.co.in
August 6, 2026
in Aunty Sex
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सानिया आंटी की चूत चुदाई (Saniya Aunty Ki Chut Chudai): दोस्तो, मेरा नाम विकास है और में नोएडा में रहता हूं। आज की यह स्टोरी मेरे और मेरी किरायेदार सानिया आंटी की चुदाई की हसीन दास्तान है जब उन्होंने मुठ्ठ मारते हुए देखकर अपने साथ चुदाई करने को कहा तो मैंने उन्हें मस्ती से और कैसे चोदा।

जब में 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था और मेरे बदन में जवानी का जोश भर ही रहा था तो हमारे घर पर नए किरायेदार रहने के लिए आए और वे हिमाचल के रहने वाले थे और आंटी तो बहुत ही ज़्यादा सुन्दर थी।

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उसका नाम सानिया था और उनकी उम्र करीब 26 -27 साल की होगी और उनका रंग एकदम दूध की तरह सफ़ेद था जिसे छूने मात्र से ही वह गजह लाल हो जाती थी। उनके बूब्स जैसे उनके सूट से बाहर आने को तैयार रहते थे एकदम गोल बूब्स थे उनके सेब की तरह से।

उन दिनो मैं मुझे एडल्ट बुक्स बुक्स के बारे में पता ही चला था और मुझे एडल्ट बुक्स पढ़ने की आदत सी और गई और इसी वजह से मुझे 17 साल की छोटी सी उमर में की सेक्स के बारे में काफ़ी नोलेज़ हो गयी थी।

चुदाई की कहानियाँ पढ़-पढ़कर अब मेरे दिल में बस हर समय चूत मारने का ही ख्याल चलता था और जब में सानिया आंटी को देख लेता था तो मेरा लंड पैंट फाड़कर बाहर आने को तैयार हो जाता था।

में सानिया आंटी को चोदने के लिए मन ही मन में प्लान बनाता रहता लेकिन उनके कुछ भी कहने में भी डर लगता था क्योंकि वो तो मुझे उस समय तक बच्चा ही समझती थी। इसलिये मुझे ना चाहते हुए भी मुट्ठी मार कर ही काम चलाना पढ़ता था।

मैं तो सानिया आंटी के बूब्स देखने के लिये हर समय बेचैन रहता था और जब वो अपने रूम में झुककर झाड़ू लगाती थी तो मुझे उनके सेक्सी और टाइट बूब्स के दर्शन हो जाते और मन को कुछ शांति मिलती लेकिन उसी के साथ चुदाई की प्यास भी बढ़ जाती थी।

दोस्तो कई बार आपकी दुआए क़बूल हो जाती है और ऐसा ही मेरे साथ हुआ, अभी तक तो मैं सिर्फ़ उनके बूब्स ही देखता रहता था लेकिन एक दिन मेरी किस्मत खुली और मैंने सानिया आंटी को बिल्कुल नंगा देखा।

यह मौका मुझे तब मिला जब हर रोज़ की तरह उनके रूम में इस आशा से गया कि मैं उनको क़रीब से देख सकुं, उस दिन मुझे मेरी मम्मी ने मुझे सानिया आंटी को कुछ सामान देने के लिये भेजा था तो मेरे पास में कारण भी था।

मैं जल्दी-जल्दी में दरवाजे को बिना नोक किए ही सानिया आंटी के रूम में घुस गया, जैसे ही मैंने उनके रूम का दरवाजा खोला तो वे अपने कपड़े बदल रही थी और दरवाज़े की और मुँह किए हुए ही बिल्कुल नंगी खड़ी थी।

मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो उनको उस हालत में देखकर तो मेरे सारे शरीर में एक जोर की तरंग चलने लगी, उन्होंने भी मुझे अचानक से देखा तो तुरंत ही शरमाकर बेड के पीछे छिप गयी और मुझे मेरी गलती का एहसास होते ही में भी रूम से बाहर आ गया।

में बाहर तो आ गया था लेकिन मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था क्योंकि मैंने इतना हसीन नजारा मेरी जिंदगी में पहली बार जो देखा था और ऊपर से सानिया आंटी का दूध जैसा सफेद बदन जैसे कोई अंग्रेजन देख ली हो मैंने।

मुझे मन ही मन यह तो लगा की वे मेरे बारे में क्या सोच रही थी लेकिन जब से मैंने उन्हें नंगा देखा था उसी दिन से तो बस में हर समय उनको चोदने के सपने ही देखता रहता था और मेरी उन्हें चोदने की तम्मना भी इस हद तक बढ़ गई कि वो रात को मेरे सपनों में आती और में उनके साथ में चुदाई करता था।

सानिया आंटी के पति फ़ौजी थे और उनकी पोस्टिंग भी वही थी लेकिन उनकी ड्युटी 15 दिन की होती थी और 15 दिन रात की। जब उनकी रात की ड्युटी होती थी तो सानिया आंटी अकेले सोने में डर लगने के कारण मुझे अपने रूम में सोने के लिये बुला लेती थी।

वो मुझे उस समय तक सिर्फ़ एक बच्चा समझकर सोने के लिये बुलाती थी लेकिन उन्हें इस बात की जरा भी भनक नहीं लगी थी कि जिन्हें वो बच्चा समझती है वही रोज़ उनको अपने सपनों में चोदने के साथ-साथ उन्हें याद कर अपने लंड की मुट्ठी मारता है।

रात को कई बार जब वो गहरी नींद में होती थी तो मैं कई बार हिम्मत कर धीरे-धीरे से उन्हें मालूम चले बिना उनके बूब्स और कूल्हों पे हाथ फेरकर उनके बदन को महसूस करता तो मेरा दिल करता था कि अभी के अभी उनके ऊपर चड़कर उन्हें चोद दूं लेकिन मन ही मन डरता था कि वो कहीं मेरे घर में न बता दे।

एक दिन मैं उनके साथ रात को उनके रूम में सो रहा था और सानिया आंटी शाड़ी में मेरे पास ही सो रही थी और उनके ब्लाउज़ में से उनके सेक्सी सेव जैसे सफेद बूब्स कुछ ज़्यादा ही बाहर की और झाँक रहे थे।

उनके बूब्स को आधे से ज़्यादा बाहर देखकर मेरे लंड का तो बहुत ही ज़्यादा बुरा हाल हो रहा था और मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने वही सोते हुए ही अपना लंड बाहर निकालकर उसकी मुट्ठी मारने लगा तो पता नहीं कब सानिया आंटी नींद से जग गयी और मेरे लंड की और देखकर बोली- यह क्या कर रहा है तू?

मैं उनके अचानक से मुझे लंड की मुठ्ठ मारते हुए देखकर डर गया और बोला- मैं तो कुछ नहीं कर रहा और उसी के साथ अपने लंड को निकर में डालकर दूसरी और करवट लेकर मैं चुपचाप से सो गया।

सुबह जब में उठा तो में सानिया आंटी से नजर तक नहीं मिला पा रहा था और मन ही मन इस बात से भी डर रहा था कि कहीं वो रात की बात मेरे घर में किसी को बता न दे।

उन्होंने जब मुझे ख़ुद से नज़रे चुराते हुए देखा तो मेरे पास आकर बैठ गई और मुझसे बोली- सच-सच बताना रात को क्या कर रहा था?

मैं तो कुछ भी नहीं समझ पा रहा था और इसी कारण से चुप रहा, और कुछ नहीं बोला।

सानिया आंटी ने जब मुझे शांत देखा तो बोली कि मुट्ठी मार रहे थे न अपने लंड की?

जब मैंने यह सुना तो मेरे पास सच कहने के सिवाय कोई चारा नहीं था और मैंने कहा- हां।

उन्होंने अपना अगला प्रश्न दागते हुए पूछा- किसके बारे में सोच कर मुट्ठ मार रहे थे?

मैंने बिना सोचे कहा कि आपके बारे में और किसके बारे में सोचो में।

मेरे मुँह से यह सुनते ही उनकी आँखो में एक अजीब सी चमक आ गई और वो बोली, ‘अच्छा ठीक है, लेकिन तुझे इसके लिए मुट्ठी मारने की जरूरत नहीं है तू मेरे साथ कर ले तुजे जो कुछ भी करना है वह। आज रात को जब तू मेरे साथ में सोएगा तो हम दोनों फुल एंजोय करेंगे, ठीक है।

सानिया आंटी के मुँह से रात को चुदाई करने का सुनकर मुझे तो यकीन ही नहीं हुआ लेकिन जब उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर पूछा क्या हुआ, तू कहा खो गया तो मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा।

में तुरंत ही भागकर अपने कमरे में चला गया और उस सारे दिन मैंने रात होने का कितना इंतज़ार किया उसे सिर्फ़ में ही समझ सकता हूँ, वह दिन मुझे किसी साल से कम नहीं लगा और कितनी मुश्किल से रात हुई थी।

रात को खाना खाते ही में तुरंत ही सोने के लिये उनके रूम में गया तो वो भी मेरे इंतज़ार में अपनी चुदाई के लिए जैसे तैयार ही बैठी थी और में उनके पास में जाकर बैठ गया।

में घर पर तो उन्हें चोदने के लिए उतावला हो रहा था और जब उनके पास बैठा तो मेरे मन में थोड़ी हिचकिचाहट होने लगी क्योंकि मैंने इससे पहले कभी भी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था और दूसरी बात यह कि सानिया आंटी मेरे से उमर में काफ़ी बड़ी थी।

उन्होंने मुझे शांत देखा तो वो बोली- कल तो मुझे देखकर तुम्हारा लंड बैठने को तैयार नहीं था और आज जब में तैयार हूँ अपनी चुदाई के लिए तो इतना क्यों शरमा रहा है?

सानिया आंटी के ऐसा कहते हुए मुझे छटे ही मेरे पूरे शरीर की नस-नस में उनकी चुदाई की आग सी लग गयी और मेरा लंड उनकी चूत में जाने के सपने देखते हुए एकदम तनकर निकर फाड़ने को तैयार हो गया।

आंटी ने जब मेरे लंड को जोश में आकर निकर को ऊपर करते हुए देखा तो मस्त और कामुक अदा के साथ बोली कि तेरे लंड को बहुत जल्दी लगी हुई है चूत में घुसने की।

मैं बोला कि हां आंटी, बेचारे ने आज से पहले सिर्फ आपकी चूत को ही देखा है एक बार जब आप उस दिन कमरे में कपड़े बदल रही थी और नंगी थी लेकिन अभी तक कभी चूत का मजा नहीं लिया है।

सानिया आंटी ने कहा आज इसको पूरे मजे मिलेगे और इसी के साथ मेरे पास आकर मुझे किस करने लगी तो  मैंने भी उत्तेजना के मारे सानिया आंटी के ब्लाउज़ में हाथ डाल दिए और उनके मस्त और कामुक बूब्स को दबाते हुए उनके रसीले होंठों को अपने होंठों में ले कर चूसने लगा।

सानिया आंटी एक बहुत ही कामुक औरत थी और वह बहुत ही बुरे तरीक़े से मेरे होंठों को चूस रही थी और उनके ऐसे मेरे होंठों को चूसने से मुझे बहुत मजा आ रहा था।

हम अगले कुछ मिनटो तक ऐसे ही एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे, और उसी के साथ मैंने उनके ब्लाउज़ के हुक खोल कर उनके बूब्स को आज़ाद क़ैद से आजाद किया तो उनके मोटे-मोटे बूब्स ऐसे लग रहे थे जैसे आज की वे पके हो और तुरंत ही मेरे सामने आ गए हो।

मैंने उनके जैसे बूब्स फ़िल्मों, और एडल्ट स्टोरी की नायिकाओ के भी नहीं देखे थे और बेकाबू होकर उनके एक बूब को अपने मुँह में लेने के साथ ही दूसरे को अपने हाथों से ऐसे दबाना शुरू किया की कहीं वे ख़राब ना हो जाए मेरे दबाने से।

सानिया आंटी मेरे बूब्स चूसने से मस्त होकर सिसकियाँ ले रही थी और मेरा मन कर रहा था की इनके बूब्स को खा जाउं और कुछ देर बाद सानिया आंटी मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ते हुए बोली अकेले ही चूसते रहोगे क्या, कुछ मुझे भी चूस लेने दो।

मैं सानिया आंटी के हाथों की पकड़ और उनके शब्दों के इशारे को समझ गया और मैंने अपनी निकर को नीचे करना शुरू किया तो निकर के नीचे होते ही मेरा लंड एक झटके से बाहर आकर कुतुब मिनार बन गया।

मेरे मदमस्त और पूरे खड़े लंड को अपने हाथ में लेते हुए सानिया आंटी बड़ी ही मस्त और कामुक अदा के साथ मेरी आँखो में झकते हुए बोली कि मैं तो यूँ ही तुझे अब तक बच्चा समझती थी पर तेरा लंड तो पूरी तरह से जवान हो गया है और चूत की सेवा के लिए तैयार है।

इसी के साथ वो मेरे लंड को अपने मुँह मेँ लेकर ऐसे चूस रही थी जैसे की वो आइस-क्रीम को चूस रही हो। मैं भी कहा पीछे रहने वाला था अब और मैंने भी अपना लंड उसके मुँह में अंदर बाहर करना शुरू किया, मुझे भी उनसे लंड चुसवाने में जिंदगी का अब तक सबसे ज़्यादा मजा आ रहा था।

मुझसे अब रुका नहीं जा रहा था तो मैंने उनसे कहा कि अब इस लंड को खा कर ही छोड़ोगी क्या?

मेरे कहते ही उन्होंने मेरा लंड छोड़ दिया तो मैंने तुरंत ही उन्हें अपनी बाँहो में लेकर बेड पे लेटाया और उनके ऊपर आते हुए उनके बूब्स को फिर से चूस-चूसकर उन्हें गरम करने लगा, बूब्स चूसते-चूसते हुए में कब अपने होश से बाहर हो गया और मैंने उनके बूब्स पे जोर से काट लिया।

मेरे बूब्स को काटते ही वो जोर से चिल्ला पड़ी और मेरे बालों को पकड़कर उनसे दूर कर बोली क्या खा ही जायेगा इन्हें, मैंने भी जोश में आकर कहा कि तुम्हारे बूब्स हैं ही इतने सफेद और रसीले की दिल तो यही कर रहा है कि इन्हें खा जाउं और इनका पूरा रस पी जाऊ।

सानिया आंटी ने मेरे लंड को पकड़कर अपने हाथों से मेरे लंड को अपनी चुत पर रगड़ना शुरू किया और अपनी टांगे फ़ैला कर मेरी कमर और गांड के बीच में उन्हें लपेट कर नीचे से अपनी चूत को मेरे लंड पर दबाते हुए बोली कि अब क्यों तड़पा रहा है मुझे, अपने इस लंड को अब मेरी चूत में डाल और शांत कर दे मेरी गरमी!

मेरे लंड का सूपड़ा उनकी चूत की दरार के बीच में था तो मैंने भी उन्हें चोदने के लिए अपना पूरा दम लगा कर एक झटका मारा, मेरे झटका मारने के साथ-साथ सानिया आंटी ने भी नीचे से उसी समय अपना जोड़ लगाते हुए झटका मारा तो मेरा पूरा लंड उनकी चूत में एक बार में ही घुस गया।

लंड के चूत में घुसते ही सानिया आंटी को तो जैसे स्वर्ग मिला गया था और वे मदमस्त होकर मुझे चूमते हुए मेरी जीभ को अपने दोनों होंठों में लेकर उसे चूसते हुए अपने दाँतो से काटकर ही मानी। उनके जीभ पर काटने से उसमे से हल्का ख़ून आने लगा और हम दोनों ही एक दूसरे में समाने लगे।

मैं भी अब जोश में आ रहा था लेकिन मुझे मेरे लंड में हल्की-हल्की जलन हो रही थी तो मैंने उसे बाहर निकालकर देखने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मुझे ऐसा नहीं करने दिया और नीचे से मुझे झकड़े रही तो में भी धीरे-धीरे उनकी चुत में झटके मारने लगा।

जब में ऐसा करने लगा तो वो भी नीचे से अपनी गांड उठा-उठाकर झटके मार रही थी, और जब उन्होंने किस करना बंद कर मेरे मुँह को आजाद किया तो उनके मुँह से आह्हह्ह ऊह्हहह्ह की आवाजें आना शुरू हो गई।

सानिया आंटी मेरे धक्को के साथ कदमताल करते हुए आँहे भरकर मुझे और भी ज़्यादा कामुक कर रही थी और मुझे अपनी स्पीड बढ़ाने का इशारा करने लगी तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर-2 से झटके मारने लगा, और 5-7 सेकंड में ही पूरे रूम में फ़च-फ़च और उनकी आँहो की आवाज आने लगी।

थोड़ी देर ऐसे ही झटके लगाते हुए हम दोनो डिस्चार्ज हो गये और कुछ मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे एक दूसरे से चिपककर और फिर हम दोनो अलग हो गये और अपने-अपने कपड़े पहन लिये।

कपड़े पहनकर हम दोनों ही बिस्तर पर लेटे हुए थे तो वो बोली क्यों मेरे छोटे आशिक़, चूत को चोदने में मजा आया या नहीं। मैं बोला सानिया आंटी आज तो सच में बहुत मजा आया, छुड़ाइ करते हुए ऐसे लग रहा था जैसे कि मैं स्वर्ग में आ गया हूं। मन तो कर रहा है की आज सारी रात आपको चोदता ही रहू, ऐसा कहते ही सानिया आंटी बोली नहीं सोचना भी नहीं एक दिन में सिर्फ एक बार ही।

उसके बाद तो हमारे बीच में चुदाई का सिलसिला ही चल पड़ा लेकिन वे एक दिन में सिर्फ एक बार ही चुदाई करवाती थी उससे ज़्यादा नहीं इसका मुझे पता नहीं चल पाया आज तक।

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