नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम रूमी है और मैं 18 साल की हूँ. में पिछले कुछ समय से freesexstory.online पर स्टोरी पढ़ रही हूँ। इन्हें पढ़कर ही मुझे आज से दो महीने पहले मेरे साथ मेरे पापा के द्वारा की गई चुदाईं की रियल सेक्स स्टोरी को आपके साथ शेयर करने के लिए प्रेरित किया है।
हमारे घर में में मैं और मेरे पापा दो लोग ही रहते हैं, मेरे पापा की उम्र करीब 44 साल है और मेरी मम्मी की आज से करीब 12 साल पहले बीमारी के कारण से मृत्यु हो गई। मेरी मम्मी की मृत्यु के बाद मेरे पिता ने मेरे कारण घरवालों के दबाव के बावजूद भी शादी नहीं की।
मैंने 12 वीं कक्षा के बाद में कॉलेज शुरू किया ही था और अभी मेरी जवानी शुरू ही हुई थी और मेरे शरीर के साथ ही नई और कोमल, मखमली झांटों का मेरी चुत पर अभी आना ही शुरू हुआ था.
एक दिन मेरे पापा कहीं बाहर गए हुए थे, में घर पर अकेली थी तो मैंने सोचा की क्यों ना आज अपनी यह मखमली झांटें साफ़ कर ली जाएं। मैं अपने कमरे में अपने पापा के शेविंग किट से कैंची लेकर आ गई और नंगी होकर अपनी झांटें काटने लगी।
झाँटे काटने की उत्सुकता और जल्दबाज़ी में मैं अपने कमरे का गेट बंद करना भूल गई और झांटें काटते समय कैंची और हाथ के मेरी चूत से छुने के कारण मुझे अपनी चुत के आस पास बहुत ही जोर से खुजली होने लगी.
मैं इससे कामुक होकर अपनी आखें बंद कर अपनी झांटें सहलाने में मस्त थी और अपने हाथों की उँगलियों से अपनी चुत को खुजलाने के साथ में सहला रही थी कि तभी अचानक से मुझे मेरी प्यारी छूत पर किसी के हाथ फेरने का अहसास हुआ।
मैं इस एहसास से अचानक से बुरी तरह से चौंक कर उठी तो मैंने देखा कि मेरे सामने कोई और नहीं बल्कि मेरे पापा ही हैं जो मेरी चूत को अपने मर्दाना हाथों से सहला रहे है…. अचानक से पापा के सामने ख़ुद को इस अवस्था में देखकर मैं शरमा गई.
पापा मुझे शर्माता देखकर बोले- अरे मेरी रूमी अगर तुम्हें अपनी झाँटे काटनी थी तो मुझको बोल दिया होता. तुम्हें तो कुछ मालूम ही नहीं है कि चुत के बाल को कैंची से नहीं बल्कि रेजर से साफ़ करते हैं.
इतना कहने के साथ ही पापा ने अपने किट में से रेजर निकाला और मेरी दोनों टांगो को चौड़ा कर शेविंग क्रीम लगाकर मेरी प्यारी सी मुनिया को बालों से अलग कर दिया. बालों के हटते ही अब मेरी चूत बहुत ही चिकनी और खूबसूरत लग रही थी और मर्द के हाथ लगने से उसमे से हल्का हल्का पानी आ रहा था.
मेरे पापा ने मेरी गीली चूत को देखा तो झुक कर मेरी और देखते हुए उसे अपने दोनों होंटो से चूम लिया, पापा के इस हरकत से तो में शरम के मारे पानी-पानी हो गई.
मैंने तुरंत ही होश में आते हुए कहा- आप बाहर जाओ, मैं कपड़े पहन लूँ.
पापा का तो शायद कुछ और ही इरादा था और वे बोले- नहीं बेटी, आज मैं तुमको कुछ सिखाना चाहता हूँ. अब तुम जवान हो गई हो.
मैंने कहा- क्या सिखाना है?
पापा बोले- जीवन का असली पाठ चुदाई करना.
मैं बोली- लेकिन पापा.. में आपकी बेटी हूँ और आप मेरे पापा क्या यह सही होगा.
पापा ने कहा -बेटी चूत और लंड में एक ही रिश्ता होता है और वह है चुदाई का. और इसी के साथ उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे पूरे बदन को हर जगह से बुरी तरह चूमने और चाटने लगे. में तो पहले से ही गरम थी और पापा की इन हरकतों से मेरा बदन पिघलने लगा और मेरे ऊपर एक अजीब सा नशा छाने लगा था.
पापा भी शायद इतने सालों बाद में किसी लड़की को अपने सामने नंगी देखकर अपने क़ाबू में नहीं थे और कामुकता के आगोश में मेरी गोरी-गोरी और गोल-गोल चूचियों को इतनी जोर से मसल रहे थे कि मैं चीख पड़ी- आआअह्ह.. इतनी जोर से नहीं पापा.. थोड़ा तो आराम से करो ना.
मेरी कामुक और मनमोहक सिसकारियां पूरे कमरे के साथ घर में भी गूँज रही थीं- आअह सीईईए ओव्व.. पाप्पपा.. आह.. पाप्पाआहह.. क्या कर रहे हो आप.. उखाड़ ही…. डालोगे…. क्या ई…न्हे….
तभी पापा ने मेरी मेरी और प्यार से देखते हुए मेरी एक चूची की गुलाबी और कड़क हो चुकी घुंडी को अपने मुँह में भर लिया और बच्चों की तरह से मेरे चुचे के उस अंगूर के दाने को चूसने लगे.
पापा के ऐसा करने से मैं तो जैसे आसमान में ही उड़ने लगी थी. मेरे पापा मेरी दूसरी चूची को अपने हाथों से हल्के-हल्के से घुमाकर उसे मसल रहे थे. और इधर में उनकी इन हरकतों के चलते अपना होश खोती जा रही थी.
अब मेरा मन अपने क़ाबू में नहीं रहा और मेरे हाथ अपने आप ही पापा के पेंट की ज़िप पर चले गए. मेरे हाथों ने वहाँ पर स्पर्श किया तो मुझे वह जगह कुछ सख्त और उभरी हुई सी महसूस हुई. मैंने तुरंत ही पापा के पेंट की ज़िप खोल दी. जीप के अंदर हाथ डाला तो मुझे लगा जैसे अन्दर कोई सांप फन उठा रहा है बाहर आने के लिए. ऐसा एहसास होते ही में अचानक से उछल कर बैठ गई.
पापा बोले- रूमी क्या हुआ?
मैं बिना कुछ सोचे बोल उठी- पापा आपकी पेंट में सांप है, जल्दी से पेंट निकाल दो.
पापा ने पेंट खोल दी और अंडरवियर में हो गए.
मैंने देखा कि पापा का अंडरवियर आगे से फुला हुआ था और उसमें कुछ हिल रहा था.
मैंने अनाड़ीपन से पापा से कहा- पापा सांप आपकी अंडरवियर में घुस गया है, इसको भी निकालो.
पापा ने तुरंत ही एक झटके के साथ उसको भी निकाल दिया. अब पापा मेरे सामने एकदम नंगे थे, और उनका लम्बा मोटा गुलाबी लंड मेरी आँखों के सामने हवा में लहरा रहा था.
मैं पापा से बोली- ये क्या है?
पापा बोले- अरे रूमी इसको इंग्लिश में पेनिस और हिंदी में लंड कहते हैं. इसकी सबसे मजेदार बात तो ये है कि तुम इसी लंड की वजह से पैदा हुई हो.. और आज यही तुम्हें देखकर बेकाबू हो रहा है. मेरे करीब आओ और इसको छूकर देखो और इसे महसूस करो, तुम्हें अच्छा लगेगा।
मैंने पापा के बड़े से लंड को अपने मुलायम हाथों में पकड़ा.. तो मुझे उसको सहलाने का मन करने लगा और मेरे हाथ लगाने से उसमे आने वाले करंट को देखकर अच्छा लगा. मैंने अपने हाथों से लंड की चमड़ी को पीछे की और खींचा तो उसकी चमड़ी अलग होने के कारण पापा के लंड का सुपारा दिखने लगा.
पापा ने कामुक होते हुए कहा- क्या तुम इसके मज़े लेना चाहती हो?
मैंने कहा- सिर से इशारा करते हुए हाँ.. कहा
पापा बोले- इसका असली मजा लेना है तो इसको आइसक्रीम की तरह से चूसो.
मैंने पापा की बात को मानकर उनके मोटे लंड को चूसना शुरू किया तो पापा के मुँह से आहें निकलने लगीं, ‘आआह्ह.. मेरी… बेटी सीईईई.. क्या जादू… है तु…म्हारे… गुलाबी होंठों में.. आह.. मजा आ गया और जोर से चूसो.. पूरा लंड मुँह में ले लो.. सीईई.. ऊऊफ़ फ़्फ़..’
मैं भी पापा की उत्तेजना से और ज़्यादा गरम होकर लंड को और ज़्यादा चूसने लगे, में जितना ज्यादा उनके लंड को चूसती, वो उतना ही ज़्यादा तनता जा रहा था.
में पापा के लंड का मजा ले ही रही थी कि तभी अचानक से पापा ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाल लिया. मुझे उस समय पापा पर सबसे ज़्यादा गुस्सा आया क्योंकि उन्होंने अचानक से मुझसे मेरी सबसे प्यारी चीज़ बिना पूछे छीन ली थी.
पापा ने मेरे मन को भाँपते हुए कहा- अरे मेरी रूमी क्या सिर्फ़ तुम ही मजे लोगी क्या… अब मुझे भी मजे लेने दो… मैं भी तेरी चुत को चूसकर तुम्हें मजे देना चाहता हूँ.
पापा ने जब यह कहा तो-मैं शरमा गई.. पापा ने मेरे मन को पढ़ लिया और तुरंत ही मुझको गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा कर मेरी टांगें चौड़ी करते हुए मेरे होंठों पर किस किया और धीरे धीरे चूमंते हुए नीचे पहुचकर मेरी गुलाबी और प्यारी मुनिया (चूत) को चाटने लगे.
मेरी चूत पर चल रही उनकी जीभ मुझे कामुक कर तड़पा रही थी. में अब मेरे क़ाबू में नहीं थी और मेरे मुँह से सिसकारियां फिर शुरू हो गईं. ‘अह्हह.. उफ़्फ़.. सीईईईई औऊऊ.. मम्मीईईई.. ओह्हह्ह.. आह्हह्ह.. सीईईई.. पापापप.. क्या मस्त मजा आ रहा है..’
पापा भी मेरे साँप की तरह से लहराते हुए बदन को देख रहे थे और जोश में आकर और जोर-जोर से मेरी चुत को चूसने और चुबलाने लगे. अचानक से उन्होंने मेरी चुत को चूसना बंद करने के साथ ही मुझे थोड़ा सा उठा कर मेरी टांगों को अपनी कमर से बंध लिया और अपना मोटा लंड मेरी चुत पर रगड़ कर मेरी आँखो में देखते हुए बोले- अब तेरी चुत को चोदूँगा.
में पापा के कहे हुए शब्दों का कुछ जवाब देती और कुछ सोच पाती उससे पहले ही मेरे पापा ने अपने लंड से एक जबरदस्त और पावरफ़ुल झटका मेरी चूत पर दे मारा.
इस झटके का असर यह हुआ कि उनका पूरा लंड मेरी चूत में एक ही झटके में समा गया और मेरी सांस मेरे गले में ही अटक गई. मैं मेरे पापा के इस अचानक से हुए हमले से दर्द से चिल्ला पड़ी और उन्हें अपने नाखूनों से नोचते हुए बोली- ऊ.. माँ.. म्मम्मार डाला रेईईई.. मेरी चुत फट गई उफ़्फ़.. पापा मुझको नहीं सीखनी कोई चुदाई.. वुदाई… अह.. जल्दी… से अपनी….लंड… को… बाहर निकालो..
मेरी कहीं हुई किसी भी बात का मेरे पापा पर कोई असर नहीं हो रहा था और उन्होंने मेरी एक भी नहीं सुनी और मेरी चूचियों को मसलते हुए अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल करते हुए धीरे-धीरे अपने लंड को मेरी चूत में आगे-पीछे करने लगे.
कुछ पलों बाद मेरे ऊपर भी कामवासना ने फिर से डेरा डालना शुरू कर दिया और मुझे आराम के साथ हर पापा के हर एक झटके पर मजा भी आने लगा तो मैंने भी उन्हें नीचे से जवाब देना शुरू किया.
पापा ने मुझे नीचे से उनका साथ देने पर कहा- बेटी मजा आ रहा है कि नहीं?
मैं बोली- आह.. पापा आज तो बहुत मजा आ रहा है.. जरा जोर से चोदिए ना मुझे अब.. मेरी चुत में अपने लंड अन्दर तक डाल कर मजे लो.
पापा ने जैसे ही मेरे मुँह से यह सुना तो तुरंत ही अपने लंड से जबरदस्त और मस्त लंबे-लंबे झटके मारने शुरू कर दिए. पापा के लंड के हर झटके के साथ में मेरी चूत को पूरा भर देना और अगले ही पल उसे सिर्फ़ सूपड़े तक बाहर निकाल देना मुझे बहुत मजा दे रहा था, मैं अब अपनी चुदाइ का आनंद लेते हुए जोर-जोड़ से सिसकारियां ले रही थी.
में मजे में आकर बोलने लगी ‘पाप्पपा.. आआह.. आअ..आज तक आपने मुझे क्यों नहीं चोदा.. मुझे चुदाई के इस सुख से क्यो… दूर रखा… बताओ… ना पापा. चोदो पापा चोदो.. आज… आज… आह.. आअह्ह.. इतने… दिनों.. का.. सुख एक साथ दे… दो… फाड़ दो सीईईईइ ऊउफ़्फ़.. और ज़ोर से.. मारो झटके मेरी… छूत में… आह… आ…. सी…ई… आआअह..’
पापा ने जब मेरी इस वासना को देखा तो अपने झटको की रफ्तार बढ़ा दी, उधर में भी बेकाबू होकर उनका साथ देते हुए नीचे से अपने चूतड़ों को हवा में उछाल रही थी कि तभी अचानक से मेरी चुत से कुछ निकलने को हुआ.
मैं पापा से बोली- आह.. पापा मेरी चुत से कुछ निकलने जैसा लग रहा है.
पापा बोले- मेरी प्यारी रूमी वो तुम्हारी चुत का चुतरस है जो कह रहा है कि तुम संतुष्टि की और बढ़ रही हो.. मैं भी झड़ने ही वाला हूँ.. अगर तुम्हें पूरा मजा लेना है तो मेरा सारा रस पी जाओ और अगर तुम्हें यह पसंद नहीं तो फिर में तुम्हारी चुत में ही झड़ जाऊं?
मेरे मुँह से अचानक से निकल गया – चुत में फिर कभी निकाल देना पापा, आज तो मुझे अपना माल पिला दो.
मेरा इतना कहना था और तभी मेरी चुत ने एक जोर की पिचकारी मारी. इसी पिचकारी के साथ मेरे मुँह से मजे में डूबी हुई आवाज निकली- सीईईईई आआआह्ह.. पापा.. मैं तो गईई पापा.. मुझेईई सम्भा…लोऊओ..
पापा ने जब देखा की में झड़ने लगी हूँ तो उन्होंने मेरे होंठ को चूसते हुए मेरी चूचियों को मस्ती से मसलना शुरू कर दिया. मेरे झड़ते ही पापा अचानक से उठे और अपने लंड को मेरी चुत से बाहर निकाल लिया और लंड को आगे पीछे करते हुए उसकी मूठ मारने लगे.
कुछ ही समय में पापा ने एक जोड़ की आँह भरने के साथ मेरे मुँह पर अपने वीर्य की एक जोरदार पिचकारी छोड़ दी. मैं मेरे पापा के उस गरमा-गरम रस को पीने लगी. मुझे सच में उनका वीर्य पीकर मजा आ गया, बहुत ही मजेदार रस था उनके लंड का एकदम फेविकॉल के जैसा सफेद और गाड़ा
मैं पापा के लंड नी निकले हुए वीर्य की एक एक बूंद पी गई.. और उनके लंड को पूरा चूस लिया. ऐसा करने से मुझे मजा ही आ गया.
पापा अपने लंड को साफ़ करवाने के बाद उठे और मेरी और देखकर बोले- मेरी प्यारी रूमी आज मजा आया या नहीं?
मैं बोली- हाँ पापा आज तो मुझे बहुत मजा आया पर.. आप मुझसे एक वादा करो.
पापा बोले क्या वादा- मेरी रूमी आज जो कुछ भी माँगोगी वह दुगा तुम्हें ?
मैं बोली कि आज के बाद में आप हर रोज मुझको ऐसे ही चोदेंगे ना.
पापा ने मेरी हाँ में हाँ मिलाई और मेरे बदन से लिपट कर उसे सहलाने लगे और कुछ देर बाद हम दोनों एक साथ नहाने के लिए चले गए. तो दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी और मेरे पापा की यह रियल चुदाई की कहानी. मैं आप सभी से यह उम्मीद करती हूँ कि आपको मेरी यह आपबीती ज़रूर पसंद आई होगी. बाय माय हॉट फ्रेंड्स.. मुझे आपके गरमा गरम प्रतिक्रिया वाले कमेंट और mail का इन्तजार रहेगा.
seema_chopra83@yahoo.com
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