हावड़ा की कामुक हसीना की अपने सौतेले बाप के साथ में हुई जबरदस्त चुदाइ की इस कहानी में आप पढ़ेगे की कैसे मेरी माँ ने चुदाईं के लिए एक जवान लड़के से शादी की और उसके बाद में भी उसके जबरदस्त लौड़े से अपनी चुदाइ करवाकर मजे लेने लगी।
नमस्कार मेरे दोस्तों मैं freesexstory.online की रेग्युलर पाठिका हूँ क्यूंकि मुझे इस से प्यार हो गया है। मैं हर दिन पब्लिश होने वाली हर-एक कहानी को आराम से बैठ कर पढ़ते हुए अपनी चूत में उँगली करके उसके रस से सराबोर अपनी उँगलियों का स्वाद लेती हूँ। आज मैं भी अपनी पहली चुदाईं की कहानी को प्रकाशित कर रही हूँ।
मेरा नाम मौनी है, मैं हावड़ा में रहती हूँ और बहुत ही कामुक और कमसिन हसीना हूँ, मेरा बदन भरे हुए यौवन का पिटारा है जिसको हर मर्द अपने नीचे लिटाकर मस्त चुदाई करना चाहता है, मेरी हेराइज पांच फ़ुट पांच इंच लंबी, और जलेबी जैसे बदन और अपनी ओर खींचने वाले मेरे वक्ष, पतली सी कमर, मस्त गद्देदार गांड और गुलाबी होंठ के साथ गोरा रंग है।
मैंने इसी साल बारहवीं क्लास की पढ़ाई के बाद नर्सिंग के तीन साल के कोर्स में दाखला लिया है। मेरी माँ की शादी सोलहवें साल में ही हो गई थी और पिताजी की मेहनत के द्वारा बीस साल तक पहुंचने तक वह दो लड़कियो की माँ बन गई थी, मेरी माँ एक सुन्दर औरत है और पांच बच्चे के बाद भी उनका जिस्म अभी तक कसा हुआ है।
मेरी माँ के शादी के बाद भी कई गैर मर्दों के साथ रिश्ते होने के कारण मेरा बाप माँ के साथ झगड़ा करता था। मेरे पापा ने काफी जायदाद मेरी माँ के नाम से ख़रीद रखी थी और अंत में दोनों में तलाक हो गया, मेरे तीनों भाई पापा के साथ रहने लगे और हम दो माँ के साथ रहने लगीं।
माँ को जवान लड़कों से चुदाईं कराने का शौक था और इसी कारण से वह हमारे पीछे जवान लड़को को बुलवा कर चुदवाती थी और उसका असर हम पर होने लगा। मेरी बड़ी बहन ने भी मेरी माँ के नक्शे कदम पर चलना शुरू कर दिया और मेरा भी एक लड़के के साथ चक्कर चलने लगा.
एक दिन मेरी माँ किसी काम से दिल्ली गई हुई थी और मैं घर में अकेली थी। उस रात मेरी दीदी का फ़ोन आया तो मैंने दूसरी और से उठाया और कुछ समय बाद वह अपने किसी बॉय-फ्रेंड के साथ चुदाईं कराने के लिए चली गई।
मैं और मेरा प्रेमी भी कई बार छुपकर सिनेमा और पार्कों में मिलते और चूमा चाटी करते और सिनेमा में में उसके लौड़े को सहलाती उसकी मुठ मारती, और उसके लौड़े को चूसती थी।
उस रात मुझे भी मौका मिला तो मैंने मेरे प्रेमी को घर बुला लिया, और रात के दस बजे वह आया और उसके आते ही हम मेरे कमरे में एक दूसरे से लिपट गए। में आज उससे कुछ ज्यादा ही लिपट रही थी। उसने मेरा हर एक कपड़ा उतार कर मुझे पूरा नंगा कर दिया!
कुछ देर चुम्मा चाटी से गर्म होकर मैंने नीचे झुकते हुए उसके लौड़े को अपने मुँह में ले लिया। उसने भी जोश में आकर मेरी चुचियाँ दबाई और चुचूक चूसकर लाल कर दिए और 69 में आकर चूत चाटी।
उसने गर्म होकर जब अपना लौड़ा मेरी टांगों के बीच में बैठते हुए मेरी चूत पर रखा तो में बोल पड़ी-हाय डालो न राजा!
उसने कहा- पहले ज़रा मुँह में लेकर इसे पूरी तरह से गीला कर दे!
उसने फिर से रखा!
मैंने कहा-अब डालो भी!
उसने तुरंत ही एक झटका दिया और मेरी चीख निकल गई- छोड़ो ऽऽ! निकालोऽऽ!
उसने मेरी चीख के साथ ही अपने शिकंजे में कसते हुए बिना कुछ कहे अगले ही क्षण अपना पूरा लौड़ा मेरी चूत में डाल दिया।
में चीख पड़ी-हाय मर गई ईईईईइ माँ! फट गई!
कुछ पल के दर्द के बाद मैं खुद अपनी गांड उठा कर उससे चुदाइ करवाने लगी तो उसने मेरे ऊपर से अपनी पकड़ ढीली की।
हाय राजा मारते रहो!
करीब पंद्रह मिनट की जबरदस्त चुदाईं के बाद हम दोनों ही एक साथ झड़ गए। उस रात मैंने मेरी चूत की सील तुड़वाकर पूरी रात चुदवाती रही, और इस तरह से मैं कली से फूल बन चुकी थी।
जब तक मेरी माँ दिल्ली से वापस नहीं आई तब तक वह हर रात मुझे जबरदस्त छोड़ता और एक रात उसने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर भी मेरी चूत मारी।
एक दिन मेरी माँ दिल्ली से वापस आई तो उसके साथ एक हट्टा कट्टा जवान लड़का था और मेरी माँ की मांग में सिंदूर और गले में नया मंगल सूत्र भी!
मेरी माँ ने हम दोनों बहनों को बुलाकर बताया कि उन्होंने दूसरी शादी कर ली है।
उस व्यक्ति की उम्र पैन्तीस-छत्तीस साल के करीब होगी जबकि मेरी माँ की उम्र चवालीस साल थी!
हर रात वे दोनों कमरे में घुस जाते, और उसके बाद उनकी चुदाई का समरोह चलता!
एक दिन मैंने दिन में माँ के कमरे का पर्दा सरका दिया था। रात को मैंने अन्दर का नज़ारा देखा- मेरी माँ बिस्तर पर बिल्कुल नंगी लेटी हुई अपनी चूत मसल रही थी और दूसरे हाथ से अपना मम्मा दबा रही थी। कुछ देर बाद मेरी माँ ने ऊँगली से इशारा कर मेरे सौतेले बाप को अपने पास बुलाया और उसके सिर को अपने हाथों से नीचे की ओर दबाकर अपनी चूत पर दबाव देते हुए अपनी चूत चटवाने लगी।
अंदर का नजारा देखकर मेरी चूत गीली होने लगी और कमरे के बाहर मैं अपनी चूत में ऊँगली करते हुए सब कुछ देख रही थी।
चूत चटवाने के बाद मेरी माँ ने उसका मोटा लौड़ा मुँह में लिया और उसे कुतिया की तरह चाटने लगी- हाय मेरे राजा! तेरे लौड़े को देखकर ही मैंने तुझे अपना खसम बना लिया है।
वह बिस्तर पर सीधा लेट गया, माँ ने उसके लौड़े पर थूक लगाया और उस पर बैठ गई।
मैं उन दोनों की जबरदस्त चुदाईं देखकर वहाँ से अपने कमरे में जाकर अपनी चूत में ऊँगली करने लगी।
घर में आने के एक महीने बाद ही मेरा सौतेला बाप मेरी जवानी पर ध्यान देने लगा जबकि मैं उससे उस समय तक ज्यादा बात नहीं करती थी। जब भी वो मेरे सामने आता तो मेरी आँखों के सामने उस रात देखें उसके लौड़े की वह तस्वीर घूमने लगती।
मेरी माँ को सिर्फ़ रात में अपनी जबरदस्त चुदाई से वास्ता था। उसने यह कभी भी नहीं सोचा कि उसके इस फ़ैसले से उसकी दो जवान बेटियों पर क्या असर होगा। मेरी बड़ी दीदी तो माँ से मिली इस आजादी से बहुत ज़्यादा खुश थी।
मेरी माँ का बहुत बहुत बड़ा बूटीक है और पैसे की कमी नहीं है इसलिए उसने मेरे सौतेले बाप को पैसे देकर वर्कशॉप खुलवाने के साथ ही एक नई कार भी खरीद कर दी। जबकि वह हमें पैसे देते वक्त चिल्लाती- इतने पैसे का क्या करती हो?
मैंने भी अपनी माँ की इस बात से आहत होकर उसे सबक सिखाने की सोची।
अगले दिन से जब भी मेरा सौतेला बाप खाना खाने के लिए दोपहर को घर आता तो मैं उसके साथ धीरे-धीरे घुलमिल सी गई, अब में उससे पहले से ज्यादा बात करती! वो भी किसी प्यासे भंवरे की तरह मेरी जवानी का रस चूसने के लिए बेताब हो रहा था।
एक दोपहर मैंने अपने कमरे के ए.सी की तार को काट दिया और मेरे सौतेले बाप के आने से पहले उनके कमरे का ए.सी चालू कर एक जालीदार और पारदर्शी गाऊन पहन, उसके नीचे गुलाबी और काली कच्छी-ब्रा डाल उलटी तकिये से लिपट कर सोने का नाटक करने लगी।
आज से पहले तक मैं उसके सामने ऐसे नहीं आई थी। जब वो घर आये और मुझे मेरे कमरे में ना पाकर मायूस से होकर अपने ही कमरे में आया तो मैंने थोड़ी से आंख खोल रखी थी, मुझे इस अवस्था में देख वो खुश हो गया, बाहर गया, सारे लॉक लगा वापस आया।
दूसरे बेड पर बैठते हुए उसने अपना हाथ मेरी रेशम जैसी मस्त संगमरमी गांड पर फेरा। मैं उसके ऐसा करने से गर्म होने लगी, वहाँ से उसका हाथ मेरे पेट तक गया, उसका वह मरदाना हाथ मेरे बदन पर अपना पूरा रंग दिखा रहा था।
उसने मेरा गाऊन नीचे खिसका दिया। मैंने उसके ऐसा करते ही पलट कर उसको अपने ऊपर गिरा लिया। वह तो पहले से ही आज मुझे चोदने के लिए सिर्फ कच्छे में था जो की आगे से फटने को हो रहा था।
उसने मुझे तुरंत ही नंगी कर दिया और बोला- रानी! क्या जवानी है तेरी! तुम दोनों बहनें साली बहुत बड़ी वाली रंडियाँ हो! तेरी माँ ने जब मुझे अपने परिवार की तस्वीर दिखाई थी, तो मैंने तुम दोनों बहनों को देख कर ही उससे शादी की थी।
मैंने भी उसे कहा जिस दिन से मैंने भी तुम्हारा लौड़ा देखा है, मैं तो तभी से चुदवाने को तैयार थी!
हम दोनों एक दूसरे को अब पागलों जैसे चूमने लगे, और इसी के साथ कमरे में हमारी कामुकता का तूफ़ान आ चुका था।
ओह मेरी जान!
मैंने उसका मदमस्त लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और कुतिया की तरह अपनी पूरी जुबान बाहर निकाल कर उसे चाटने लगी। उधर वो भी मेरी मस्त चुत को चूस-चूसकर मेरा साथ देने लगा, वो जब भी अपनी जुबान मेरे दाने पर फेरता तो मैं उछल उठती- और अह अह करने लगती!
मेरा सौतेला बाप चुदाईं के मामले में बहुत ज़बरदस्त मर्द खिलाड़ी था! उसकी चुदाईं की कला में एक हर एक ढंग था लड़की चोदने के लिए!
वह चोदते हुए बोला-साली कितनों से चुदी है?
काफी चुदी हूँ! लेकिन मुझे अब तड़पाओ मत और मेरी चूत मारो! आह मसल दे मुझे! कमीने रगड़ दे! मेरे जिस्म को पेल डाल अब बहन के लौड़े!
मेरा सौतेला बाप-छिनाल, कुतिया, गली की रंडी! तेरी माँ चोद दूंगा!
आज तेरी हूँ मैं तेरी! जो मन में आये वह करो मेरे साथ में! आह!
उसने मुझे चोदते हुए अचानक से अपना लंड मेरी चूत से निकाला और मेरे बालों को पकड़ मेरे मुँह में लौड़ा घुसा कर उसे निकलने नहीं दे रहा था। मैं खांसने लगी और अपनी टांगें खोल ली और ऐसा करते ही वह बीच में आया।
मैंने हाथ से उसके लौड़े को पकड़ कर अपनी चूत पे टिकाया, उसने जोर से झटका मारा और उसका आधा लौड़ा घुस गया। मेरी चूत में थोड़ा सा दर्द हुआ लेकिन मैंने चिल्लाने का काफी नाटक किया। सांस खींचकर अपनी चूत को कसा, उसके दूसरे झटके में पूरा लौड़ा उतर चुका था।
और आह फक मी! चोद और चोद साले, दिखा दे दम!
ले कुत्ती कहीं की!
आठ-दस मिनट ऐसे चोदने के बाद वह बोला- कुतिया की तरह झुक जा!
वो मेरे पीछे आया, उसने लौड़े पर थूक लगाया और पेल दिया। उसके पेलते ही मेरे मुँह से निकला-हाय मेरे राजा! मेरे सांई!
उसने चुदाईं की रफ्तार पकड़ ली। हाय, उसने मेरे बदन का एक एक अंग खड़का दिया अपनी जबरदस्त चुदाईं से। नीचे से मेरे कसे हुए बड़े-बड़े टेनिस बॉल जैसे मम्मों को इस तरह मसल रहा था जैसे कोई गाय का दूध निकाल रहा हो।
मैं उसकी इस जबरदस्त सांड जैसी चुदाइ से झड़ गई लेकिन वो उसके बाद अभी भी मस्ती से मेरी चूत मार रहा था। मैंने कहा- मेरा काम तमाम हो गया!
मेरे ऐसा कहते ही उसने बिना कुछ कहे लौड़े को मेरी चूत से खींचा और मेरी गांड पर रख झटका मारा। मैं उसके इस वार के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी! और लौड़े के जबरदस्त झटके के साथ ही-दर्द से कराह उठी!
वो नहीं माना और मेरी कोरी गांड में अपना पूरा लौड़ा घुसा के ही दम लिया और तेजी से झटके मारने लगा। जैसे ही कुछ समय में मुझे थोड़ी राहत मिली तो मैं अपनी चूत के दाने को चुटकी से मसलने लगी।
पांच मिनट बाद उसने अपना पूरा माल मेरी गांड के अन्दर छोड़ दिया और बाहर निकाल कर उसे मेरे होंठों से रगड़ दिया। मैंने मुँह को खोलकर जुबान निकाल कर उसके लौड़े को साफ़ कर दिया।
उस दिन शाम तक उसने मुझे दो बार चोदा। उसके बाद तो हर रोज़ दोपहर में वह मुझे जबरदस्त तरीके से चोदता।
अब वह मुझे सोने का सेट, पायल का जोड़ा, खुला खर्चा भी देता था चुदाइ के बदले में।
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