जवान लड़की की सेक्स स्टोरी-1 (Jawan Ladki Ki Sex Story-1): इस कहानी में मीशा के साथ में घटी सेक्स की अलग-अलग घटनाओं के बारे में बताया गया है कि कैसे उसने सबसे पहले अपने भाई के साथ में सेक्स किया.
हाय, दोस्तों मेरा नाम रूमी है. आज मैं आप सबको अपनी एक सहेली मिशा की स्टोरी बता रही हूं. मेरी सहेली ने ही अपने साथ घटी यह स्टोरी मुझे बताई. अब आप यह स्टोरी उसी के शब्दों में पढ़िए.
मेरा नाम मिशा है. मेरी उम्र 24 साल है. मेरा फिगर 36-26-36 है. मेरी शादी दो साल पहले एक सिविल इंजीनियर से हुई थी. मेरे पति मुझे शादी के बाद से ही हर तरह से खुश रखते हैं. अभी वो पिछले डेढ़ साल से काम की वजह से अमेरिका में रह रहे हैं और मैं यहां मुम्बई में हूं.
मेरा मायका नासिक में है और मैं वही पर ही पली-बढ़ी हुई हूं. मेरे साथ छोटी उम्र में ही कुछ ऐसी घटनाएं हुई थीं जिनके बारे में मुझे उस वक्त पता नहीं और ऐसा लगता था जैसे यह सब केवल एक खेल का हिस्सा है.
जैसे-जैसे मैं बड़ी हो रही थी वैसे ही मेरे जीवन में भी अलग-अलग सेक्स पार्टनर आये. जब मैं 19 साल की थी तो मेरी लाइफ में पहला लड़का मेरा भाई आया, उस वक़्त में सेक्स के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं जानती थी.
उस वक्त मेरे भाई की उम्र 22 साल थी जब मेरे फर्स्ट ईयर के एग्जाम खत्म हुए और मैं अपने घर आ गयी थी.
मेरी मां हर समय घर के काम में लगी रहती थी. पापा भी सुबह-सुबह ही अपने काम पर चले जाते थे. और मेरा भाई घर में टीवी देख कर अपना टाइम पास करता रहता था.
घर पर मेरे लिए करने को कुछ नहीं था तो मैंने मां से एक दिन कहा- मुझे बाहर घूमने के लिए जाना है.
माँ बोली- क्यों, अभी 5 दिन पहले तो आई है हॉस्टल से तू.
मैं बोली- मैं पढ़ाई करके थक गयी हूं और अभी तो एग्जाम खत्म हुए हैं. मैं एक महीने से पढ़ाई के कारण कहीं भी बाहर घूमने के लिए नहीं गयी हूं.
मां बोली- तो तुम एक काम करो, अपने भाई को कहो और उसके साथ में पास वाले तालाब तक घूमने के लिए चली जाओ.
माँ की बात सुनकर मैं खुश हो गयी. मैंने दौड़कर एक बेग में अपने नहाने के लिए कपड़े लेकर अपने भाई के साथ साइकिल पर बैठ कर चल दी. तालाब हमारे घर से थोड़ा ज़्यादा ही दूर था मगर भाई ने जल्दी जाने के लिए शार्टकट ले लिया.
यह रास्ता काफी पथरीला था तो झटके लग रहे थे. रास्ते में हमारी साइकल एक बड़े से गड्ढे में घुस गयी तो भैया ने मुझे बचाने के लिए झट से पकड़ लिया. उनके अचानक से पकड़ने के कारण उनके हाथ मेरे सीने पर थे.
हम दोनों ही बहुत डर गये लेकिन भैया ने किसी तरह से सम्भालते हुए साइकिल निकाल ली. मगर उनके हाथ अभी भी मेरे सीने पर ही थे और वो धीरे-धीरे मेरे बूब्स को दबा रहे थे.
उस वक्त मेरे बूब्स का साइज 31 का था और मुझे ऐसा लगा कि वो मेरा भाई नहीं बल्कि कोई और ही मर्द है. मैंने भैया को टोकते हुए अपने बूब्स पर से अपना हाथ हटाने के लिए कहा और हम तालाब के लिए चल दिये.
हम शार्टकट से आने के कारण आधे घंटे में ही तालाब पर पहुंच गये. वहां पर जाकर हमने खूब मस्ती की और भाई के साथ मैंने वहां हसीन नजारों के मजे भी लिए और उसके बाद हमने नहाने के लिए तालाब में जाने का फैसला किया.
उस वक़्त दोपहर हो गई थी और 1 बजने वाला था तो हमने नहाने से पहले कुछ खाने के बारे में सोचा. हल्का-फुल्का खाने के बाद हम दोनों तालाब में जाने लगे. अन्दर जाने से पहले मैंने बेग चेक किया तो पता चला की जल्दबाजी में मैं अपना स्विमिंग सूट ही लाना भूल गई.
मेरा दिमाग खराब हो गया और मुझे ख़ुद पर ही बहुत ज़्यादा गुस्सा आ रहा था. मेरा भाई तो कभी का अपनी शर्ट-पैंट उतार कर अपनी निक्कर में तालाब में कूद गया था और मुझे भी आने के लिए कहने लगा तो मैंने उसको सारी बात बताई.
वो तुरंत ही बोला- कोई बात नहीं. तुमने अपने कपड़ो के अंदर ब्रा और निक्कर तो पहना ही होगा?
मैं बोली- हां भैया.
वो बोला- तो फिर तुम तौलिया से भी काम चला सकती हो. चलो जल्दी से नहाने के लिए अंदर आओ.
मैं बोली- लेकिन भैया, मुझे ऐसे पानी में आने में शर्म आ रही है.
वो बोला- शर्म कैसी, यहां पर हम दोनों ही तो हैं और मौसम भी कितना अच्छा हो रहा है.
मैंने सोचा- मैं किसी भी पराये मर्द के सामने इस तरह से कैसे आधी नंगी हो सकती हूं! फिर अचानक ही मेरे मन में आया कि यह तो मेरे ही भैया हैं. इनके सामने क्या शर्माना.
मैं अपनी ब्रा और निक्कर में ही नहाने के लिए तालाब में अंदर चली गयी. तालाब में जाकर मैंने और भैया ने पानी में तैरने के साथ-साथ खूब मस्ती भी की.
नहाने के दौरान ही जब मैं पानी के बाहर आने लगी तो मेरी ब्रा के पीछे से कुछ अटका और मैंने आगे की और बढ़ना चाहा तो उसका हुक टूटकर वह पानी में ही निकल गयी.
जब मुझे ब्रा के निकलने का एहसास हुआ तो में उसे पानी में ही ढूँढने लगी लेकिन तालाब का पानी होने के कारण उसमें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था मुझे लगा कि शायद मेरी ब्रा बहकर पानी में अंदर चली गयी.
मैं अब बाहर नहीं जा सकती थी और अपनी चूचियों को छिपा कर वहीं पर पानी में ही बैठ गयी.
भैया को इस बारे में कुछ नहीं पता था तो वो बोले- चल खेलते हैं. मैं तुझे पकडूंगा.
जब वो मेरे पास आये तो मैं पानी में ही बैठी रही.
वो बोले- क्या हुआ? तुम्हें खेलना नहीं हैं क्या- अचानक से तुम्हें क्या हो गया.
तालाब में बैठे हुए ही नीचे गर्दन किये हुए मैंने कहा- मेरी ब्रा पानी में चली गयी है.
वो बोले- तो ऐसा क्या हो गया इसमें?
मैं बोली- मैं पूरी नंगी हूं भैया.
वो बोले- हां, तो क्या हो गया, कुछ नहीं होता. और फिर यहाँ पर हमारे सिवा है ही कौन, चल खेलते हैं.
भैया ने कहा- अगर तुम्हें शर्म आ रही है तो चल मैं भी अपनी निक्कर उतार देता हूं और तू भी अपनी निक्कर उतार ले. फिर तुम भी पूरी नंगी हो जाओगी और मैं भी. फिर तुमको शर्म नहीं आयेगी.
मैंने भैया की बात मान गयी. पहले भैया ने अपनी निक्कर पानी के अंदर ही अंदर उतार दी और तैर कर किनारे पर डाल दी तो मैंने भी उन्ही की तरह अपनी निक्कर उतार दी.
भैया बोले- हम एक दूसरे को पकड़ते है, अब मैं भागता हूं और तू मुझे पकड़.
इस तरह से हम पानी के अंदर खेलने लगे.
फिर भैया खेलते हुए ही अचानक से तालाब के बाहर की ओर भागने लगे. मैं भी उनके पीछे दौड़ने लगी लेकिन ये भूल गयी कि मैं पूरी नंगी हूं.
खेल खेल में अचानक से बाहर निकल निकली तो मुझे ध्यान आया कि मैं पूरी नंगी हूं. जैसे ही मुझे एहसास हुआ तो मैं वहीं पर अपनी चूचियों और चूत को छिपाने लगी. इतने में ही भाई ने मुझे देख लिया और वो मेरी ओर आने लगा.
भैया की टांगों के बीच में उसका लम्बा सा लंड लटका हुआ था. मैं ध्यान से उनके उस लंड को देख रही थी. फिर भाई मेरे पास आ गये और मैंने उनसे कहा- भैया ये क्या है लम्बा सा?
उस वक्त भैया भी मेरे पूरे शरीर को गौर से घूरकर देख रहे थे क्योंकि मैं भी उनके सामने पूरी नंगी थी. मैंने देखा कि भैया की जांघों के बीच में वो लम्बा सा लटकता हुआ अंग अब अपना आकार बढ़ा रहा था.
भैया बोले- ये जो लम्बा सा लटक रहा है इसको सब लोग लंड या जादुई छड़ी कहते हैं.
मैंने कहा- क्या? जादुई छड़ी, वो भला कैसे.
भैया बोले- हां. अगर तुम्हें यकीन नहीं होता तो इसको अपने हाथ में लेकर एक बार मसल कर देखो यह बड़ा होने लगेगा.
उनके कहने पर मैंने उसको हाथ में ले लिया और मसला तो वैसा ही हुआ. देखते ही देखते उनका वो लंड मेरे हाथ की मुठी में से बाहर जाने लगा और अपना आकार बढ़ाते हुए कुछ ही पल में लोहे के जैसा सख्त हो गया.
मैंने पूछा- भैया, लेकिन इससे क्या करते हैं?
वो मेरी चूत पर हाथ लगा कर बोले- इसको यहां पर चूत के अन्दर डालते हैं. लड़कियों के मुंह में और उनके पीछे वाले छेद में भी डालते हैं.
मैं शरमा गई और मुड़कर जाने लगी तो भैया बोले- किधर जा रही हो?
मैंने कहा- अपने कपड़े पहनने के लिए, क्यों घर नहीं चलना है क्या.
भैया बोले- लेकिन लंड को ऐसे ही गर्म छोड़कर नहीं चला जा सकता है.
मैंने कहा- मैंने कहा तो फिर कैसे चलेगे घर?
भैया बोले- ये जो तुमने अभी मुझे गर्म किया है, इसको पहले ठंडा करना होगा फिर ही घर जा सकते है.
इतना कहने के साथ ही भैया मेरे पास आये और मुझे पकड़ कर मेरे होंठों को किस करने के साथ में मेरे बूब्स को दबाने लगे. मुझे भैया के ऐसा करने पर थोड़ा अच्छा लगने लगा. इससे पहले किसी ने मेरे बूब्स को ऐसे नहीं छेड़ा था.
फिर भैया ने थोड़ी देर चूमने और बूब्स दबाने के बाद कहा कि अब तुम घूम कर झुक जाओ. मुझे अपना लंड तुम्हारे छेद में डालना है इसको, तभी ये शांत होगा.
मैं बोली- नहीं भैया. ऐसा मत करो, मुझे डर लग रहा है.
वो बोले- तुम्हें कुछ भी नहीं होगा. तुम देखना थोड़ी ही देर में तुम्हें कितना मजा आएगा जिसकी की तुमने कल्पना भी नहीं की होगी. मैं तो पिछले दो साल से इस दिन का इंतजार कर रहा था.
भैया ने मेरे जवाब का इंतज़ार किए बिना ही मुझे पलटा और मेरी पीठ को झुका कर मेरी गांड के बीच में अपने लंड को रगड़ने लगे.
थोड़ी देर बाद ही वो अपने लंड को नीचे लाकर मेरी चूत पर रगड़ने लगे. मेरी चूत के हिसाब से भैया का लंड काफी बड़ा लग रहा था मुझे तो मैंने कहा- यह मेरे इस छोटे से छेद में नहीं जायेगा भाई.
वो बोले- चुप रह साली रंडी, अब तू मुझे समझायेगी कि क्या छोटा है और क्या बड़ा है? तू बस देखती जा यह कैसे तेरे इस छोटे से छेद में जाकर उसे बड़ा करता है.
ऐसा बोल कर उन्होंने आहिस्ता-आहिस्ता से मेरे छेद में अपने लंड को अंदर डालना शुरू किया. भैया ने एक जोर का झटका लगाया तो मेरी चूत में उनका आधा लंड घुस गया. मैं ख़ुद को आगे करके छुड़ाने लगी लेकिन भैया ने मुझे पकड़ लिया और मेरी चूचियों को ज़ोर-जोड़ से मसलने लगे.
मैं बोली- इसे बाहर निकालो मेरे इस छेद में से भैया, बहुत ज़्यादा दुख रहा है.
वो अपनी मर्दाना आवाज़ में बोले- कुछ नहीं होगा. एक बार दर्द होता है फिर बहुत मजा आता है.
उसके बाद भैया ने थोड़ी देर रुकने के बाद एक बार फिर से अपना पूरा जोर लगा कर पूरा 9 इंच का लंड मेरी चूत में घुसा दिया.
दर्द से मैं चिल्लाने लगी. मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा था लेकिन भैया ने इसकी परवाह ना करते हुए धीरे-धीरे मेरी चूत में लंड को चलाना शुरू किया. पहले शूर में तो मुझे बहुत दर्द हुआ लेकिन फिर धीरे-धीरे मुझे मजा आने लगा.
अब मैं ही भैया से कहने लगी- मारो, और जोर से झटके भैया… आह्ह … आई … वाह … डालो भैया… और… जोर… से आह्ह मजा आ रहा है.
भैया भी मेरी मस्ती और कामुक आवाजों से जोश में आकर जोर से फूल स्पीड में मेरी चूत में चुदाई करने लगे.
ऐसे ही कुछ देर मुझे जबरदस्त चोदने के बाद उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत से बाहर निकालते हुए मेरे मुंह में देकर मुझसे उनका लंड चूसने को कहा. मैं भैया का लंड मुंह में लेकर बड़े मजे से उसे चूसने लगी.
और इसी के साथ उनके दोनों टट्टो को सहलाने लगी और थोड़ी ही देर में भैया का पानी मेरे मुंह में निकल गया. मैंने भैया के लंड का रस अच्छा लगा तो मैंने उसे पूरा गटक लिया और उसके बाद हम घर चले गये.
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