नौकरानी की चूत में मेरा लंड-2 (Naukrani Ki chut Me Mera Lund-2): नौकरानी की चुदाई पिछले भाग में आपने पढ़ा की कैसे मैंने मेरी नौकरानी सुधा को अपने बातो से प्रभावित कर उसके साथ बात कर उसे अपने क़रीब लाया और जब मेरी पत्नी अपने मायके गई तो मौका देखकर उसे अकेले में सेक्स के लिए उत्तेजित किया और आज उसके आगे की कहानी में सुधा को गरम करने के बाद में मैंने कैसे उसे कामोत्तेजित कर उसकी चुदाई करके उसे पूरी तरह से संतुष्ट किया और अब वह मेरे साथ चुदाईं को हर वक़्त तैयार रहती है इस बारे में पढ़ेगे.
सुधा खड़ी-खड़ी शरमा रही थी लेकिन उसके बावजूद मेरे कहने पर वहीं पर चुपचाप खड़ी हुई थी. उसने अपने दोनों हाथों को आगे की और अपनी जवान और हसीन चूत के सामने लाकर उसे छुपाने की कोशिश करते हुए बांध रखा था.
मैंने अब आगे बढ़ते हुए सबसे पहले सुधा के माथे पर हल्का सा चुम्बन किया और उसके बाद उसकी पलकों पर हल्के से चुम्बन किया लेकिन इसके बावजूद मैंने अभी तक उसको अपने हाथों से नहीं छुआ था और वह चुपचाप आंखें बंद करके खड़ी हुई थी.
उसका मन तो हो रहा था आँखे खोलने का लेकिन वह अपने मन को मारकर आँखे बंद किए हुए मेरी अगली हरकत का अनुमान लगा रही थी. फिर मैंने उसको मूड में लाने के लिए आहिस्ता से उसकी आंखों को चूमते हुए नीचे आते हुए उसके गालों को भी धीरे से चूम लिया.
अब मेरा भी मूड बन रहा था और मेरा लंड मानने को तैयार नहीं था और पूरी तरह से तन गया था और मेरे कपड़ों के अंदर भी लोहे की तरह सख्त होकर खड़ा हो गया था.
अब मैंने सुधा की ठुड्डी पर अपने होंठों को हल्के से टच किया और फिर दोनों होंठों से ठुड्डी को ऊपर नीचे से अपनी गिरफ्त में लेते हुए उसपर किस कर दिया.
सुधा से अब कंट्रोल नहीं हो रहा था और वह आँखे खोलने को आतुर हो रही थी लेकिन मैंने उसको पहले ही बोल दिया कि अगर उसने आंखें खोलीं तो वह शर्त हार जाएगी और इसलिए उसने फिर से उन्हें बिना मन के झट से जोड़ से बंद कर लिया.
अब में उसकी शारीरिक गतिविधियो को देखते हुए यह जान गया था कि उसको तैयार करने के लिए मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.
अब मुझे बस उसको ऐसे ही धीरे-धीरे तड़पाते हुए कामुक करना होगा और उसके तैयार होते ही उसकी चूत की चुदाई का मजा लेना था. अबकी बार मैंने हिम्मत की और उसके कांपते हुए होंठों पर एक किस कर दिया.
मैंने उसके होंठों पर किस करने के बावजूद भी उसको अपने हाथों से टच नहीं किया था. इस बार सुधा हार गई और अपनी आंखें खोल ली लेकिन मैंने तुरंत ही अपने हाथों से उसकी पलकों को बंद कर दिया.
अब मैं उसको चुदाई के लिए तैयार करने के लिए उसके हाथों को अपने हाथों में लेते हुए उसके दोनों हाथों को अपनी कमर के दोनों तरफ रखवा कर उसे इशारा किया कि वह मुजसे लिपट जाए.
जब उसने कुछ संकोच किया तो मैंने पहल करते हुए सुधा को अपनी बांहों में लपेट लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रखकर उसको चूसने लगा. उसके होंठ बिल्कुल शराब के प्याले की तरह नशीले और रस से सराबोर थे.
उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर फिरने लगे थे.
जैसे ही मैंने उसके गुलाबी होंठों को चूसकर उनका रस पीना शुरू किया तो सुधा ने भी अपने दोनों हाथों को मेरी कमर पर लाते हुए उन्हें मेरी पीठ पर फिराना शुरू कर दिया और अपने दोनों हाथों को पीछे से ही मेरे कंधों पर दबाते हुए मुझे अपने में समाने की असफल कोशिश करने लगी.
उसने जब अपने हाथों से मेरे बदन को अपने बदन में समाया तो उसकी चूचियां मेरे सीने पर अपना दबाव बनाने लगी और उसकी चूचियां भी उसकी ही तरह से तनकर टाइट हो चुकी थीं.
फिर मैंने उसको चूमते हुए उसकी साड़ी के पल्लू को धीरे से अपने एक हाथ से नीचे गिरा दिया और पल्लू के गिरते ही अपने एक हाथ से सुधा को अपनी तरफ खींचते हुए उसके होंठों को जोर से चूसना शुरू कर दिया.
उसकी चूचियां ऐसी थी जैसे की दो मस्त गेंदे बिल्कुल परफेक्ट आकर में तनी हुई. अब मेरा लंड उसको चोदने के लिए लालायित होने लगा था. फिर मैंने सुधा के चूतड़ों को अपने दोनों हथेलियो को खोलकर उनपर जमाती हुए अपनी तरफ खींच कर पहले सहलाना और फिर मस्ती से दबाना शुरू कर दिया.
उसको चुतड़ो को दबाते ही मेरा लंड उसके आगे बदन से सट गया और उसकी चूत को अपने में समाने की गुहार करने लगा. मैं सुधा की चूत पर अपने लंड को अच्छे से महसूस करवा कर उसे चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार कर रहा था.
दोस्तो, शादीशुदा लड़की को अगर आपके ऊपर विश्वास हो जाए और उन्हें आपके साथ होने पर ख़ुद का सुरक्षित और सही व्यक्ति के साथ होना महसूस हो जाए तो उन्हें चोदना बहुत आसान होता है.
इसका एक कारण यह है कि उन्हें सब कुछ पहले से ही पता होता है और वे नई लड़कियों की तरह से सेक्स करने से डरती नहीं हैं और आपके साथ में चुदाई का खुलकर मजा भी लेती है.
सुधा ने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी और उसके ब्लाउज के बटन पीछे की तरफ थे. मैंने धीरे से अपने हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर उसके ब्लाउज के बटन आराम से खोलना शुरू कर दिया.
मैंने कुछ ही पलों में अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हुए उसके ब्लाउज के बटनों को खोलकर उसके ब्लाउज को उतार कर एक कौने में फैंक दिया. उसकी चूचियां तनी हुई थीं ब्लाउज के आगोश से आजाद होते ही उछल कर मेरे हाथों में आ गईं.
उसकी चूचियां क्या कड़क थीं ऐसा लग रहा था जैसे अभी अभी कोई लड़की जवान हुई है और ऊपर से मलाई की तरह मुलायम भी थी. अब मैंने उसको आँखो से ही इशारा करते हुए उसकी साड़ी को उतारना शुरू कर दिया.
मैंने हल्के से उसकी साड़ी को खींचते हुए एक हाथ से इशारा करते हुए सुधा को अपने बेड की तरफ ले गया और बेड के पास पहुंच कर मैंने उसको वहां पर आराम के साथ लिटा दिया.
मैंने कहा- सुधा, अब तुम अपनी आंखें खोल सकती हो.
सुधा ने कहा- आप बहुत ही मस्त और रसीले हो साहब, इतना कहने के साथ ही सुधा ने मुझे एक बार जी भर कर देखा और फिर से शर्म से अपनी आंखें बंद कर लीं.
मैं तो उसकी इस अदा पर मर मिटा और जल्दी से अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये और कुछ पलों के बाद अब में सुधा के सामने नंगा खड़ा था.
मेरा लंड कपड़े खोलते ही चूत से अपने मिलन की उत्सुकता में उछल-उछल कर दर्द करने लगा था. मैंने अब अपने हाथों से उसके पेटीकोट के नाड़े की गाँठ खोली तो उसने अपने चुतड़ो को ऊपर किया और मैंने उसे नीचे खीच लिया तो उसकी चूत बिल्कुल नंगी मेरी आँखों के सामने थी.
मैंने आश्चर्य से कामुकता में भरकर कहा- सुधा, तुम्हारी चूत तो बिल्कुल नंगी है. क्या तुम कच्छी नहीं पहनती हो?
उसने शर्माते हुए मेरी इस बात का जवाब देने की जगह कहाँ- साहब, कमरे में बहुत रौशनी आ रही है. पर्दे बंद कर दो ना.
मैंने उसकी इस शर्म की इज्जत की और उठकर पर्दों को खींचकर खिड़की को कवर किया तो रूम में थोड़ा अंधेरा हो गया. अब मेरे लिए और रुकना मुमकिन नहीं था तो मैं तुरंत वापस आकर सुधा के ऊपर लेट गया.
मैंने सुधा के होंठों को कस कर चूम लिया और उसकी चूचियों को दबाने के साथ नीचे अपने हाथों से उसकी चूत पर अपना हाथ फिराना शुरू किया तो मुझे उसकी चूत पर घुंघराले बाल महसूस हो रहे थे.
मुझे उसकी चूत को छुपाये हुए यह बालों का जंगल अच्छा लग रहा था और में उसपर अपनी उँगलियों के जादू के साथ-साथ उसकी रेशमी चुचियों को मुंह में ले लेकर उसको अपने होंठों से चुबलाने लगा तो सुधा को तो जैसे जन्नत ही मिल गई.
अब मैंने अपनी एक उंगली को उसके बालों दूर करते हुए चूत की दरार में पर लगा दिया और उसे सहलाते हुए एक उगली को उसकी गीली हो रही छूत में डाला तो वह ऐसे गयी जैसे मक्खन में किसी ने छुरी डाल दी हो.
उसकी चूत अब अंदर से बहुत ही ज़्यादा गर्म और गीली हो चुकी थी और उसके मुंह से सिसकारियाँ बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी और उसकी इन मधुर और कानों में मिश्री घोल रही सिसकारियाँ मुझे और भी मस्ती से भरने लगी.
मैंने अब सुधा की और देखते हुए कहा- सुधा रानी, अब तुम ही बताओ की आगे क्या करना है?
वह बोली- साहब, आप जानबूझकर मेरे से कोई बदला ले रहे है क्या, इतना कुछ कर दिया और अब पूछ रहे है की आगे क्या करना है, अब और मत तड़पाइये और मेरी इस अंतर्वासना को किसी भी तरह से शांत कर दीजिए बस.
मैंने कहा- नहीं, ऐसे कैसे मेरी रानी पहले तुम मुझे जान कहकर सही से बताओ तब कुछ हो सकता है.
उसने मुझे गर्दन से पकड़कर अपने करीब खींचते हुए कहा- साहब कर दीजिए ना मेरा काम, अब और मत तड़पाओ.
मैंने कहा- ऐसे नहीं रानी, ऐसे मजा नहीं आएगा जब तक तुम ख़ुद नहीं बताओगी की क्या करूँ.
वह कामुकता के साथ अपने चेहरे पर गुस्सा लाते हुए बोली- साहब डाल दो न.
मैंने भी शरारत के साथ उसे तड़पाते हुए कहा- क्या डाल दूँ?
मुझे उसका यूँ शर्माना और चुदाई के लिए तड़पना देखकर मजा आ रहा था. वह बार-बार डालने की बात कह रही थी लेकिन इसके बावजूद उसके मुँह से चुदाई का शब्द नहीं निकल रहा था और मैं उसके मुंह से पूरी बात सुनना चाहता था.
वह बोली- यह लंड मेरे अंदर अपना लंड डाल दो ना और मेरी चूत को चोद दो साहब… अब और सहन… नहीं… हो.. रहा… है… जा…नू…
इतना कहने के साथ ही उसने अपने हाथों से मेरे सिर को पकड़ते हुए ज़ोर से मेरे होंठों से अपने होंठ चिपका दिये. उसके इतना कहते ही मैंने भी उसकी चूचियों को दबाते हुए उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उसमे अपनी जीभ डालकर उसकी जीभ को चूसने लगा.
मैंने कहा- हाँ, मेरी रानी, अब यह मेरा लंड तुम्हारी चूत में अंदर जाएगा और तुम्हारी इस प्यासी चुत को चोद कर इसकी प्यास बुझा देगा मेरी रानी?
वह बोली- हाँ साहब, मुझे चोद दीजिए और मेरी इस चूत की सारी गरमी निकाल दीजिए.
सुधा अब पूरी तरह से गर्म होकर जंगली बिल्ली की तरह से मेरे होंठों को खा रही थी तो मैंने भी उसे और तड़पाना उचित नहीं समझा और उसकी चूत के ऊपर अपने लंड को रख एक झटका दिया और लंड को उसकी चूत के अंदर घुसा दिया.
इसी के साथ अपने हाथों से उसकी चूचियों को भी मस्ती से दबाने के साथ कभी उसके होंठों को, तो कभी उसके गालों को चूमते हुए उसको पहले धीरे-धीरे मस्ती के साथ और जब उसने साथ देना शुरू किया तो थोड़ी देर में ज़ोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया.
मैं सुधा को चोद रहा था और मेरा मन कर रहा था कि ऐसे ही सारी उम्र उसको चोदता ही रहूँ. वह भी मेरे लंड से नीचे से उछल-उछल कर पूरी मस्ती के साथ चुदवाते हुए क्या मस्त लग रही थी.
उसने मेरी और मस्ती से देखते हुए बड़ी ही मस्त अदा के साथ कहा- साहब, आप तो बड़ी ही मस्त चुदाई कर रहे हैं. आह्ह् … आप… बस… मु..झे… ऐसे ही चोदते रहिए. आपकी इस जबरदस्त चुदाईं से तो मेरी चूत मस्त होकर और भी ज़्यादा प्यासी हो रही है. ओह्ह… आ…ह… चो…दो… ऐस…से… ही…
इसी के साथ सुधा के हाथ मेरी पीठ पर कसने लगे और उसने अपनी टांगें मेरे चूतड़ों पर लपेट दी थीं. अब वह और भी ज़्यादा जोश के साथ नीचे से अपनी गांड को उछाल रही थी. जैसे में उसको नहीं बल्कि वह नीचे से मुझे चोद रही हो.
उसकी इस तड़प और मस्ती को देखकर मैंने कहा- सुधा, तुम्हारी यह चूत तो मेरे लंड से चुदने के लिए ही बनी है मैंने तुम्हारी चूत जैसी मस्त चूत नहीं देखी जिसने मेरे लंड को इतना मजा दिया हो.
एक बात तो बता ना, तुम्हें भी कैसी लग रही है मेरी चुदाई. जितना मजा मेरे लंड को तेरी चूत में झटके मारकर आ रहा है क्या उतना ही मजा तेरी चूत को भी झटके खा खाकर आ रहा है क्या मेरी रानी?
वह मस्ती के साथ मुझे चूम रही थी और बोल रही थी- आप बस ऐसे ही चोदते रहिए मुझे. बहुत मजा आ रहा है. आह्ह् … ओह्ह .. उफ्फ … उम्म …
इस तरह से हम ही एक दूसरे की आँखो में देखते हुए एक दूसरे को अपनी-अपनी बातो से उत्साहित करते हुए बहुत देर तक चुदाई का मजा लेते रहे. और ऐसे ही चुदाई करते हुए ही अचानक दोनों ही एक साथ झड़ गए. लेकिन मेरा मन उसकी इतनी चुदाई करने के बाद भी अभी तक नहीं भरा था.
में उसकी इस जबरदस्त चुदाई करने के बाद भी उसके बदन को नहीं छोड़ रहा था और उसे अपने हाथों से सहला रहा था और क़रीब 15 मिनट तक उसका ऐसे ही सहलाने के साथ-साथ उसकी कामुक अंगों को अपने हाथों से सहलाने के साथ-साथ चूमकर फिर से गर्म कर दिया.
अब वह भी मेरा साथ देने लगी और मेरी किस का जवाब अपने किस से देते हुए मुझे अपने बाहुपाश में लेकर अपने बदन से मेरे बदन को रगड़ने लगी तो मैंने अपना लंड फिर से उसके मुंह में डाल दिया और उसको चुसवाने लगा और उसी के साथ में हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए थे.
अब वह मेरा लंड चूस रही थी तो मैं नीचे से उसकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था. वैसे दोस्तों एक बात में आपसे पूरे मन से कहना चाहुगा की अगर आपकी फीमेल पार्टनर अगर कामुक हो और उसके ऊपर से उसका बदन भी मस्त हो तो उसे छोड़ने का मन ही नहीं करता है.
थोड़ी ही देर में सुधा मेरे ऊपर आ गई और अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चुत के छेद से अपनी चुत का मिलन कराते हुए उसके ऊपर बैठकर अपने चुतड़ो को मस्ती के साथ आगे-पीछे और गोल-गोल घुमाकर छुड़वाने लगी, इस बार उसको चोदने में और भी ज्यादा मजा आया मुझे.
इस बार मुझे चुदाई में वह मजा आया था जो मुझे आज तक किसी के साथ की गई चुदाई में नहीं आया था और इस बार मेरे लंड ने भी मेरा बहुत देर तक साथ दिया. मैं सुधा को उसको भरपूर मजा देता रहा.
जब हम चुदाई करके थक गए तो थोड़ी देर ऐसे ही एक दूसरे को सहलाने के बाद वह खड़ी हुई और अपने कपड़े पहनने लगी.
मैंने कहा- सुधा रानी, आज की चुदाईं में मरते दम तक नहीं भूलुगा और इस याद में आने वाले समय के साथ में तुम नए-नए अध्याय जोड़ती रहना.
वह बोली- आपने भी आज बहुत मस्त चुदाई की है साहब. अगर आज के बाद आप मुझे पैसे भी नहीं देगें तो भी में आपसे ही चुदवाऊगी.
जब सुधा ने अपने कपड़े पहन लिए तो मैंने एक बार फिर से सुधा की और हाथ ले जाते हुए उसके हाथों को पकड़ लिया और खड़े होते ही उसकी चूचियों को हल्के से दबाते हुए उसके हाथों को सहलाने लगा.
मेरा मन अभी तक भी नहीं भरा था तो मैंने फिर से सुधा को अपने पास बेड पर लेटा लिया और बहुत देर तक उसके होंठों को चूसता रहा लेकिन इसके बाद में मैंने उसको उस दिन नहीं चोदा. अब हम दोनों को जब भी मौका मिलता है तो सुधा ख़ुद ही आगे से अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है.
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