नौकरानी की चूत में मेरा लंड (Naukrani Ki chut Me Mera Lund): नौकरानी की चुदाई की इस कहानी में मेरे और मेरी नौकरानी सुधा के बीच हुई चुदाई की सच्ची घटना के बारे में पढ़े.
दोस्तो, मुझे किसी भी लड़की को सिड्यूस (कामोत्तेजित) करने में बहुत ही ज़्यादा मजा आता है. बस आपका उसे कामोत्तेजित करने का तरीका सही होना चाहिए. मैंने ऐसे ही अपने घर में काम करने वाली नौकरानी को कामोत्तेजित करके चुदवाने पर मजबूर कर दिया.
आज मैं आप सब को मेरे और मेरी नौकरानी के बीच की चुदाईं की कहानी सुनाने जा रहा हूँ. मेरा नाम अजय है. मेरे घर में काम करने के लिए एक दिन बहुत ही सुन्दर नौकरानी आई. वह दिखने में बहुत ही खूबसूरत और आम नौकरानियों से बहुत ज़्यादा अलग थी.
उसकी सुंदरता के बारे में बात करे तो उसकी हाइट मीडियम और बदन भरा हुआ यानी की अगर उसके फिगर की बात करे तो 34-26-36 का होगा और शादीशुदा होने के बावजूद भी उसे देखकर कोई नहीं कह सकता था कि उसकी शादी हो चुकी है.
वह हर रोज़ मेरे घर में काम करने के लिए आती और वह 2-3 घंटे मुझे उसको देख-देखकर मन ही मन उसके पति की क़िस्मत पर जलन होती की ऐसी सेक्सी बीवी उसके पास है और वह उसे काम पर भेजता है.
मुझे उसका भरा हुआ बदन देखकर यह तो पक्का यकीन हो गया था कि इसका पति उसको खूब मजे से चोदता होगा. क्योंकि उसके बूब्स था ही ऐसे की देखते ही मन करता था की उसे मस्ती से अपने हाथों में लेकर मजे से दबाऊ और चूस-चूसकर उसका सारा रस पी जाऊ.
वह जब भी काम करती थी तो हर तरह से ढकने की कोशिश के बावजूद भी उसकी प्यारी और मस्त गोरी-गोरी चुचियाँ उन्हें बाहर आने से नहीं रोक पाते थे और उन्हें देखकर मेरा दिन बन जाता था.
वह अपनी इन भारी भरकम गेंदों को बहुत छिपाती लेकिन उसके बावजूद उनके बीच की वह लंबी दरार मेरी आँखों के आगे आ ही जाती और में अपनी तिरछी नजर से देखता रहता था.
मैंने एक बात नोटिस की थी की वह अंदर ब्रा नहीं पहनती थी हो सकता हो की उसके पास पैसों की कमी होने के कारण वह सोचती हो कि ब्रा पर बेकार ही पैसे क्यों खर्च किए जाएं.
जब वह घर में काम करते हुए इधर से उधर ठुमकती हुई चलती थी तो उसके चूतड़ हिलते हुए ऐसे लगते थे जैसे कह रहे हों कि कोई तुरंत आओ और मुझे पकड़ो और मस्ती से दबा दो.
वह पतली सी साटिन की साड़ी को घर में पौंछा लगाने के बाद जब अपनी चूत के पास से पकड़ कर पैरों के निशान बनने से बचने के लिए संभालती हुई चलती थी तो मन करता, कि काश मैं भी इसकी चूत को छू सकूँ और इसके मम्मों को दबा और चूस सकूँ.
जब-जब में उसको पसीने से लथपथ देखता तो मेरा बहुत दिल करता था कि मैं इसकी चूत को चूसते हुए जन्नत का मजा लू और उसकी चूत में अपना लंड डालकर उसको मस्त गरम करके चोद सकू.
मेरा लंड उसके घर में आते ही उसकी चूत में घुसने के लिए बेकरार हो जाता था. मगर वह तो साली मेरी तरफ देखती भी नहीं थी और सिर्फ़ अपने काम तक ही मतलब रखती थी.
जैसे ही उसका काम ख़त्म होता वह बिना कुछ कहे ठुमकती हुई वापस घर से चली जाती. मैंने भी अपनी हरकतों से उसको कभी इस बात का अहसास नहीं होने दिया कि में मन ही मन उसकी चूत को चोदने के लिए हद से ज़्यादा बेताब रहता हूँ.
थोड़े दिनों में ही मैंने पक्का मन बना लिया की मुझे किसी तरह भी उसकी चूत को चोदना ही है. लेकिन यह सब जबरदस्ती नहीं हो सकता था और यह सब उसको भी चुदाई के लिए गर्म करके ही संभव हो सकता था.
मैंने अपने मन को समझाया की यह सब मुझे धीरे-धीरे और परफ़ेक्ट प्लान के साथ करना होगा क्योंकि अगर वह नाराज हो गई तो मेरा उसको चोदने का सारा प्लान फेल हो जाएगा और वह मेरे हाथ से निकल जाएगी.
उसका नाम सुधा था और मैंने उसको पटाने के लिए अब उसके साथ किसी न किसी बहाने से बातें करना शुरू कर दिया और कुछ दिनों में वह मेरे अच्छे व्यवहार की वजह से मेरे ऊपर विश्वास करने लगी.
मैंने अब आगे का प्लान बनाते हुए एक दिन उसको चाय बनाने के लिए कहा. जब उसने मुझे चाय का कप दिया तो उसके हाथों का मेरे हाथों पर स्पर्श पेट ही मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया.
मैंने ख़ुद पर क़ाबू रखा और चाय पीते हुए उसकी तारीफ़ करते हुए कहा- सुधा तुम तो चाय बहुत अच्छी बना लेती हो.
उसने मेरे मुँह से तारीफ़ सुनकर ख़ुश होकर कहा- हां, बाऊजी, चाय तो मैं बहुत अच्छी बना लेती हूँ.
मैंने तुरंत ही कहा आज से हर रोज तुम ही चाय बनाना, मुझे पिलाना और ख़ुद भी पीना और इसी के साथ अब मैंने सुधा से हर रोज ही चाय बनवाना शुरू कर दिया.
फिर एक दिन जब मैं ऑफिस जा रहा था तो लेट होने के कारण में स्नान करने के लिए जाते हुए सुधा से अपनी शर्ट को प्रेस करने के लिए कह दिया और वापस आया तो मेरी शर्ट प्रेस की हुई थी.
मैंने फिर से तारीफ़ करते हुए कहा- तुम तो प्रेस भी अच्छी कर लेती हो.
अब जब भी घर पर मेरी बीवी मेरे आस-पास नहीं होती थी तो मैं सुधा से बातें करना शुरू कर देता था और बात बात पर उसकी तारीफ़ करना शुरू कर देता.
मैंने एक दिन उससे पूछा- सुधा, तुम्हारा पति क्या करता है?
सुधा बोली- मेरा पति एक मिल में काम करता है साहब.
मैंने फिर पूछा- कितने घंटे की नौकरी होती है उसकी?
उसने कहा- 10-12 घंटे तो लग ही जाते हैं साहब, और कई बार काम ज़्यादा होने पर रात को भी ड्यूटी लगा देते हैं.
मैंने कहा- तुम्हारे बच्चे कितने हैं?
उसने शर्माते हुए जवाब दिया- अभी तो मेरी सिर्फ़ एक दो साल की लड़की ही है.
मैंने पूछा- तो तुम उसको घर में अकेली ही छोड़कर क्यों आ जाती हो?
उसने कहा- नहीं, अकेली नहीं छोड़ती मेरी बूढ़ी साल है वह उसको संभालती है.
मैंने पूछा- तुम इसके अलावा कितने घरों में काम करती हो?
उसने कहा- साहब, आपके घर के अलावा सिर्फ़ आपके नीचे वाले एक और घर में काम करती हूँ.
मैंने आगे पूछा- क्या इतनी से कमाई से तुम दोनों का गुजारा हो जाता है?
उसने कहा- साहब हो तो जाता है लेकिन कई बार बड़ी मुश्किल होती है क्योंकि मेरा आदमी शराब में ही अपनी ज्यादातर कमाई बर्बाद कर देता है.
यह जवाब सुनकर मुझे कुछ संभावना दिखाई दे की अब में सुधा को कैसे सेट कर सकता हूँ.
मैंने उसका इरादा जानने के लिए सुधा से पूछा- यह तो ग़लत है लेकिन अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ.
सुधा ने मुझे अजीब सी शक भारी नजरों से मेरी और देखा.
उसने कहा- क्या मतलब है आपका? आप कैसे मेरी मदद कर सकते है!
मैंने बहुत ही चतुराई से कहा- अरे, क्यो नहीं कर सकता, तुम अपने आदमी को मेरे पास लेकर आओ, मैं उसको समझाऊगा शराब छोड़ने के लिए.
उसने थोड़ा अपनापन से कहा- ठीक है साहब, और एक लम्बी और गहरी सांस लेते हुए कहा- आप भी कोशिश करके देख लो क्या पता वह आपकी बात मन ले.
इस तरह हम दोनों के बीच गुज़रते वक़्त के साथ बातो का सिलसिला भी बढ़ता रहा और धीरे-धीरे बातों के सहारे मैंने सुधा के मन के बारे में जानने के साथ ही उसकी झिझक को भी बिल्कुल ख़त्म कर दिया.
एक दिन ऐसे ही उसे छेड़ते हुए कहा- तुम्हारा आदमी तो मुझे किसी काम का नहीं लगता, इतनी सुंदर बीवी के होते हुए भी वह शराब का नशा करता है.
सुधा बहुत ही ज़्यादा समझदार थी और मेरा इशारा समझने के बावजूद उसने अपनी नाराजगी या उसकी भावनाओं का मुझे बिल्कुल भी अहसास नहीं होने दिया.
मुझे भी उसके कुछ भी ना कहने से थोड़ा हिन्ट मिल गया था हो सकता है थोड़ी तैयारी से कोशिश की जाए तो यह भी तैयार हो जाए.
अब में उसकी बातो से अनुमान लगाते हुए मन ही मन सोचने लगा कि अगर किसी दिन अकेले में मुझे मौका मिले तो हो सकता है कि यह भी शायद चुदवा लेगी मेरे साथ में.
कुछ दिनों बाद ही एक दिन रविवार को मायके में काम होने की वजह से मेरी बीवी शनिवार शाम को ही मेरे दोनों बच्चो को लेकर मायके चली गई और मुझे कहा कि अगर कल सुधा आए तो घर का काम ठीक से करवा लेना.
रविवार को सुबह से ही मेरे मन में चुदाई के लड्डू फूटने लगे थे और मेरा लंड भी उत्सुकता में फुदकने लगा था. मैं उठने के बाद से ही बार-बार लगातार सुधा के बारे में ही सोच रहा था.
उस दिन 10 बजे के लगभग सुधा घर में आ गई और हर दिन की तरह दरवाजा बंद कर दिया और अपने काम पर लग गई. इतने दिनों से आपस में बात-चीत करते हुए हम दोनों ही अब आपस में काफी खुल भी गए थे.
सुधा को मेरे ऊपर हर तरह से भरोसा हो गया था शायद इसी वजह से उसने मेरे बिना कहे ही दरवाजा बंद कर दिया था. मैंने आज सुबह से ही यह सोच लिया था की अगर आज मैंने पहल नहीं की तो यह फिर कभी भी मेरे हाथ नहीं आएगी.
मैंने उसे काम करते हुए सोचा कि लेकिन में पहल कैसे करूं? कुछ देर सोचने के बाद ख्याल आया कि इसको पैसी की कमी है तो इससे पैसे की बात ही कर लेता हूँ.
मैंने कहा- सुधा, अगर तुम्हें कभी पैसों की जरूरत हो तो मुझे बिना किसी झिझक के बता देना मदद के लिए.
सुधा ने कहा- क्यों साहब, आप क्या इस महीने मेरी पगार काटने वाले हैं?
मैंने कहा- अरे नहीं, मेरे कहने का मतलब है की कभी भी पैसों की किसी भी प्रकार की जरूरत पड़ जाए तो मुझे बता देना. मैं तुम्हारी मदद कर दिया करूगा.
और हाँ मैं इस बारे में अपनी पत्नी को भी कभी कुछ नहीं बताऊंगा. लेकिन तुम भी वादा करो की तुम भी इस बारे में मेरे बीवी से कुछ नहीं कहोगी.
सुधा ने जवाब में कहा- मैं क्यों बताने लगी आपकी बीवी को इस बारे में भला?
उसका यह जवाब सुनकर मैं खुश हो गया और मुझे लगा कि मेरा तीर एकदम सही निशाने पर जाकर लगा था.
मैंने कहा- अब तो तुम खुश हो जाओ.
वह बोली- हां साहब, आज में खुश हूँ, इससे मुझे घर चलाने में काफी आराम हो जाएगा.
मैंने अगला कदम बढ़ाते हुए कहा- सुधा, मैंने तुम्हें खुशी दे दी. क्या तुम चाहती हो कि मैं भी खुश हो जाऊं? मगर उसके लिए तुमको भी मेरा साथ देना होगा और अपना मुंह बंद रखना होगा.
इतना कहने के साथ ही मैंने अपनी जेब में से निकालते हुए, सुधा के हाथ में एक पांच सौ रुपये का नोट थमा दिया.
सुधा ने पूछा- लेकिन मुझे करना क्या होगा साहब?
मैंने कहा- वह में तब बताऊगा जब तुम अपनी आँखे बंद करोगी, अगर तुमने अपनी आंखें खोल दीं तो तुम यह शर्त हार जाओगी.
मेरे कहने पर सुधा ने मेरे सामने खड़े हुए ही तुरंत अपनी आंखें बंद कर लीं. मैंने उसको गौर से देखा तो सुधा के गाल लाल हो रहे थे और उसके होंठ कांप रहे थे.
मैंने फिर से उसके मन की चाहत जानने के लिए कहा- जब तक मैं ना कहूँ तब तुम्हें अपनी आंखें नहीं खोलनी हैं. उसने गरजती हुई जबान में कहा- ठीक है साहब.
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