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घर में ताई की चुदाई

by freesexstory.co.in
August 5, 2026
in Aunty Sex, Family Sex
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घर में ताई की चुदाई (Ghar Me Tai Ki Chudai): दोस्तों यह स्टोरी मेरे और मेरी कामुक ताई की चुदाई की कहानी है जिसमे मेरे मालिश करने से गरम हुई ताई को मैंने चोदकर कैसे संतुष्ट किया उसके बारे में विस्तार से बताया है।

दोस्तो, मेरा नाम जयदीप है, और मेरी उम्र 20 साल और मेरी लंबाई 5 फिट 9 इंच है और मेरा शरीर एवरेज है ना ही ज़्यादा पतला और ना ही पेट आगे आया हुआ”। में सामूहिक परिवार में अपने दादा,दादी, ताऊ,ताई, चाचा, और बुआ के साथ एक ही घर में अपने मम्मी पापा के साथ में रहता हूँ।

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बात कुछ इस प्रकार से है कि में 16 साल से ही सेक्स के बारे में जानने लगा था और जैसे जैसे इसके बारे में जानता रहा और जानकारी मिलती रही वैसे-वैसे ही में कामुक स्टोरी पढ़ने लगा और ब्लू फ़िल्में देखकर अपना लंड हिलाकर उसे शांत करता था।

में हर समय अपने आस-पास की मस्त माल भाभियों और मेरे साथ में पढ़ने वाली लड़कियों से सेक्स की कल्पना करते हुए सेक्स के लिए तड़पता रहता था।

मेरी रियल लाइफ में भी मेरे साथ में पहले सेक्स की घटना भी किसी सेक्सी फ़िल्म के जैसे ही अचानक से घटी जिसकी की मैंने कभी कल्पना तक भी नहीं की थी की मुझे बिना मांगे सामने से चुदाई का सुख मिलेगा।

यह बात उस समय की है जब में 20 साल का था और हमारा पूरा परिवार हमारे दादा के चाचा के बच्चे की शादी में गांव से शहर गया हुआ था और मेरा आख़िरी एग्जाम होने के कारण में नहीं जा सका।

में जब एग्जाम देकर घर आया तो घर पर मेरे सिवा कोई नहीं था। शाम को अचानक से मेरे घर का दरवाज़ा बजने की आवाज़ आई तो मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने ताई जी खड़ी थी। मैंने ताई जी से आने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि शादी के खाने के कारण मेरे पेट में मरोड़े आने लगे।

हमारे ही गली में रहने वाले अंकल का परिवार वहाँ से वापस आ रहा था तो में भी उन्ही के साथ में पेट दर्द के कारण से वापस आ गई। और वैसे भी तू घर पर अकेला है तो सबने कहा की हम आज रात को शादी अटेंड कर कल दोपहर तक आ जाएगे।

मेरी ताई की उमर 42 साल और लम्बाई 5 फिट 8 इंच है और उनका फिगर 37 -30 -38 के लगभग होगा मेरी नजर से देखे तो से बड़ी ही सेक्सी नज़र आती है।

जब कभी भी घर पर आदमी नहीं होते तो ताई घर में बिना चुनरी लिये ही काम किया करती थी मैंने भी कई बार उनके झुक कर काम करते समय उनकी गोरी-गोरी और गोल-गोल सुदृढ़ चुचियों को देखा था और उनके बड़े-बड़े बूब्स की कल्पना करके कई बार अपना लंड भी हिला चुका था।

ताई घर आई और थोड़ी देर बाद सलवार कमीज पहनकर घर का काम करने लगी. आप लोगो को तो पता ही होगा की अप्रैल में कितनी ज़्यादा गरमी होती है और उस दिन बादल के कारण से उमस भी ज़्यादा थी।

उमस के कारण कारण से ताई जी को काम करने के दौरान बहुत ज़्यादा पसीना होने के कारण उनके सलवार कमीज लगभग पूरे ही गीले हो गए और उनके अंदरूनी कपड़े उनकी ब्रा और चड्ढी साफ़ नज़र आ रही थी।

जब ताई जी काम कर रही थी तो मैं टीवी देख रहा था लेकिन उनके पसीने से भीग चुके कपड़े के कारण से उनके अंदर का सामान साफ़ नज़र आ रहा था और मेरा पूरा ध्यान ताई की गांड और बड़े-बड़े बूब्स पर बार-बार जा रहा था।

कुछ देर बाद ताई जी ने रात को भोजन बनाने के बाद मुझे खाने को कहा और हम दोनों उसके बाद अपने-अपने कमरों में सोने के लिये चले गये। उस दिन एग्जाम खत्म होने के कारण से में रात को 11 बजे तक टीवी देखता रहा।

टीवी देखने के बाद सोने से पहले मैं पेशाब करने के लिये जा रहा था तो मैंने देखा कि ताई जी अभी भी पेट को पकड़े हुए है और जाग रही है।

मैं पेशाब करके जब वापिस आया तो ताई जी के कमरे में जाकर उनसे पूछा कि आप पेट पकड़कर क्यों बैठी है और क्या आपको नींद नहीं आ रही है क्या- ताई जी जवाब दिया, उनके पेट में बड़ा दर्द हो रहा है।

मैंने उनसे पूछा कि अभी मेडिकल की दुकान तो बंद हो गई होगी, आप ही बताओ में कैसे और क्या करूँ उनके पेट दर्द को सही करने के लिए। मेरे पूछने पर ताई ने कहा- तुम रसोई में जाओ और मुझे सरसों का तेल थोड़ा गरम कर के लाकर दे दो।

मैं रसोई में गया और तेल गरम कर लाया और ताई जी से पूछा कि अगर आपको ज़्यादा दर्द हो रहा है तो अगर आप कहे तो- क्या मैं आप के पेट की मालिश कर दूं?

वे तो दर्द से परेशान थी तो उन्होंने कहा ठीक है और इसी के साथ उन्होंने अपने पेट से कमीज़ को उठाकर ऊपर चुचियों तक कर दिया तो मैंने क़रीब 8-10 मिनट तक उनके बताये अनुसार उनके पेट की मालिश की तो उन्हें कुछ आराम मिलने लगा।

अब पेट पर मालिश करने के बाद भी कटोरी में कुछ तेल बच गया था तो मैंने उनसे पूछा की इस तेल का क्या करे तो उन्होंने कहा कि एक काम करो इसको मेरी पीठ पर लगा कर उसकी भी मालिश कर दो।

ताई जी ने पहले मुझे टॉवल लेन को कहा ताकि वह उसे बिछाकर उसपर पेट के बल लेट सके ताकि चद्दर तेल से खराब ना हो और उसके बाद अपनी कमीज़ को उतारकर ब्रा में ही पेट के बल लेट गई।

मैं उनकी कमर पर तेल लगाने लगा लेकिन सही से नहीं मालिश नहीं कर पा रहा था तो ताई जी से पूछकर उनके दोनों और पर करके उनके नितंबों से नीचे जाँघो पर बैठकर उनकी पीठ की मालिश करने लगा।

ताई जी मालिश का मजा ले रही थी और तेल लगा होने के कारण से मालिश करते हुए कई बार मेरा हाथ नीचे की और फिसल जाता और उनके बूब्स से भी टच हो जाता लेकिन वे कुछ न बोली।

जब भी मेरा हाथ उनके बूब्स के पास जाता या उसके नीचे की और टच होता तो उनके बदन में सिहरन होती जिसे कि में अच्छे से महसूस कर रहा था और इसकी वजह से मेरा लंड खड़ा हो रहा था और थोड़ा-थोड़ा उनके पीछे लगने लगा तो मैं डर गया और ताई जी से नींद आने का कहकर अपने कमरे में चला गया।

में कमरे में आकर लेट गया लेकिन अभी भी मेरे हाथों को उनके बदन का स्पर्श याद आ रहा था और मेरा लंड खड़ा था तो मैंने अपनी आँखे बंद करके ताई जी को याद करते हुए अपने लंड को सहलाना और उसकी मुट्ठ मरना शुरू किया।

में यह सब कर रहा था की तभी ताई जी पता नहीं कब मेरे कमरे में आई और मुझे इस हालत में देखकर ख़ुद पर से क़ाबू खो बैठी और मेरे ऊपर आकर बैठ गयी, अब में अपना लंड पकड़े हुए सही पर भूत बन गया और मेरा दिमाग़ काम ही नहीं कर रहा था।

ताई जी ने मेरी हालत को समझते हुए अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ते हुए कहा तूने आज इतने सालो बाद मेरे बूब्स को हाथ लगा कर कई सालों से मेरे अंदर की सोई हुई औरत की प्यास को फिर से को जगा दिया है, अब इसकी गरमी को भी तुम्हें ही ठंडा करना पड़ेगा।

इतना कहते हुए ताई जी मेरे कुछ सोचने से पहले ही मेरे ऊपर बिछ सी गई और अपने हाथों से मेरी कमर के नीचे से कंधों को सहलाते हुए मुझे पागलों की तरह से चूमने लगी तो में उनके नीचे पड़ा हुआ सोच रहा था कि जिनके साथ नंगा सोने की कल्पना करता था आज वो ख़ुद मेरे ऊपर बिना कमीज के बैठी हुई है।

कुछ सेकंड में ही में सपने से निकलकर हकीकत की दुनियां में आया और ताई जी के होंठों से अपने होंठों को मिलाकर उनका साथ देते हुए उन्हें चूमना शुरू किया तो उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी जिसे की में अपने होंठों से चूसने लगा आइस क्रीम की तरह से।

ताई जी तो मेरे अनुमान से भी काफ़ी ज़्यादा तड़प रही थी अपनी चुदाई के लिए और उन्होंने मुझे चूमते हुए ही कब अपनी सलवार उतार दी इस बात का मुझे पता भी नहीं चला और अब में उनके पूरे बदन को अपने हाथों से सहला रहा था।

कुछ देर की चुम्मा-चाटी के बाद ताई जी कमर के बल बिस्तर पर लेट गयी और मुझे अपने ऊपर खीच लिया तो में उनके ऊपर से उनके बूब्स को तो कभी उनकी गर्दन और कान को चूमता और इसी तरह से नीचे आकर उनकी नाभि में जीभ डाली तो वो नागिन की तरह तड़पने लगी।

इसी के साथ उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ते हुए अपने पैरों में फँसाते हुए अपनी नाभि में दबाते हुए नीचे चूत की और दबाने लगी तो मैंने अपना मुँह नीचे करते हुए चड्डी के ऊपर से ही उनकी चूत को अपने होंठों से किस करना शुरू कर दिया।

अब मेरे होंठों और उनकी चूत के बीच में आ रही उनकी चड्डी भी ताई जी से बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने उसे भी उतार दिया और मेरे बालों को पकड़कर मेरे होंठों को अपनी चुत से लगा दिया।

मैंने देखा कि ताई जी की चूत बहुत बड़ी थी लेकिन रोशनी कम होने के कारण उस समय मुझे उसका कलर पता नहीं चला और मैंने बिना कुछ सोचे उसको चाटना शुरु कर दिया।

मेरी जीभ के चूत से टच होते ही ताई जी अपनी चूत को मेरे मुँह पर रगड़ते हुए आह…आह.. ओह.. चूस… और… जो…र… से कहने लगी और मेरे मुँह को अपनी चुत से चोदने लगी और कुछ ही देर में झटके खाते हुए मेरे मुँह में ही जड़ गई।

ताई जी ने मुश्किल से 10 सेकंड का ब्रेक भी नहीं लिया और फिर से मेरे ऊपर आ गई और किस करते हुए नीचे होते हुए मेरे बड़ा सा लंड अपने मुंह में डालकर उसको जोर-जोड़ से ब्लू फिल्मों में जैसे चुस्ती है वैसे ही चूसने लग गयी।

ताई जी के ऐसे लंड को चूसना मुझसे ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने भी अपने पैरों की कैंची बनाई और उनके मुंह में पूरा लंड ठूसने के साथ ही उनके मुँह में ही पिचकारियों की बौछार कर दी।

ताई जी तो पता नहीं आज क्या खाकर आई थी जो अभी भी नहीं थकी और मेरे पूरे रस को चूसने के तुरंत बाद ही कहा बहुत खेल लिया अब तक अब चलो और असली काम पर लग जाओ और अपने पैरों को खोल कर बिना किसी शर्म के मेरे सामने सीधी लेट गयी।

मैंने ताई जी से कहा कुछ देर तो रुको अभी तो लंड ने अपना पानी निकाला है तो ताई जी ने मुझे अपने ऊपर खींचते हुए मुझे चूमना शुरू कर दिया।

करीब 5 मिनट में ही ताई जी की मेहनत रंग लाई और मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा तो उन्होंने अपने हाथों से आगे पीछे करके उसे पूरा खड़ा किया और अपना थूक लगाकर उसे अपनी चुत से भिड़ाकर अपनी टैंगो को मेरे नितंबों पर कसते हुए झकड़ लिया।

में तो ताई जी की इस चुदाई की इस प्यास को देखकर हैरान रह गया और तुरंत ही अपना लंड ताई की चूत में डाल दिया तो वो बिना किसी रुकावट के उसमे आराम से पूरा अंदर तक चला गया।

मेरे लंड के चूत में जाते ही ताई जी ने मुझे चूमने के साथ ही जोर से खुश होते हुए आँह भरी और थोड़ी देर मेरे लंड को अंदर तक डाले हुए ही उसको महसूस करने लगी और मुझे अपने आगोश में लेते हुए मेरे सीने पर अपनी गर्म साँसे छोड़ने लगी।

कुछ देर में ही ताई जी फिर से जंगली बन गई और नीच से चूत में अंदर तक घुसे हुए लंड को भी झटके देने लगी तो मैं समझ गया की यह अब अपनी चुत में मेरे लंड के झटके माँग रही है और मैंने तुरंत ही अपने लंड को उनकी चूत में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

ताई जी भी नीचे से मुझे झटके देते हुए मेरे लंड को पूरा जड़ तक अंदर लेती और फिर उसको सूपड़े तक बाहर निकलते ही रुक कर फिर से अंदर तक ले लेती और साथ में आआअ ईए ऊऊह माआ हाआ हाअ की आवाज़ें निकलती हुई चुदाई करवाने लगी।

4-5 मिनट तक झटके लगाने के बाद ताई जी मुझे रोक देती और अगले 4-5 मिनट तक मुझे चूमती रहती और मुझे भी ऐसे ही करने का इशारा करती, इस तरह से मैं करीब १ घंटे तक ताई की चूत चोदता रहा और अंत में उनकी चूत में अपना पूरा रस भर दिया।

थोड़ी देर आराम करने के बाद ताई ने मुझे चूमते हुए कहा आज मुझे मेरी चुदाई का असली सुख मिला है। तुम्हारे ताऊ तो सिर्फ़ ऊपर आते है और 2-3 मिनट तक झटके देकर ख़ाली होकर सो जाते है और में तड़पती रहती हूँ।

आज रात को तुम मेरे मन की चुदास को अच्छे से खत्म कर दो और आज मेरी गांड को भी चोद दो जय. ताई ने इतना कहा और मुझे फिर से अपने में समाते हुए चूमकर अपनी गांड की चुदाई के लिए तैयार करने लगी और जैसे ही मेरे लंड ने अँगड़ाई ली तो उसे अपने मुँह में लेकर उसे गिला किया और तुरंत ही घोड़ी बन गयी।

अब मैंने ताई जी का इशारा समझते हुए अपने लंड को उनकी गांड में डालना शुरू किया लेकिन वह अंदर जाने को ही राजी नहीं था तो ताई जी ने कहा कुछ भी करो लेकिन इसे मेरी गांड में डालो और चोद दो मस्त मेरी गांड को आज।

ताई का इतना कहते ही मुझे ज़बरदस्त जोश आ गया और मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी कमर को पकड़ा ताकि वे आगे नहीं हो सके और लंड के सूपड़े को उनके तंग छेद में थोड़ा सा डालते हुए एक जोरदार झटका लगाया।

मेरा यह झटका इतना ज़्यादा जोरदार था कि ताई जी आगे खिसकते हुए बेड पर पेट के बल घिर गई और उनके ऊपर में और ऐसा होते ही मेरा पूरा लंड एक ही बार में उनकी गांड की जड़ तक पूरा घुस गाया और उनकी गांड और मेरी जांघो के बीच में बाल की भी जगह नहीं बची।

ताई की गांड बहुत ही ज़्यादा तंग थी, और लंड के घुसते ही उन्हें बहुत ही ज़्यादा दर्द हुआ और वो चिल्ला दी- आऐईईईईए माआआअ, लेकिन मैंने तुरंत ही उनका मुँह बेड में दबा दिया जिससे उनकी वह चीख कमरे से बाहर नहीं निकली।

और थोड़ी देर मैंने उनके ऊपर लेटे हुए ही उनकी पीठ से लेकर उनकी गर्दन को चूमना जारी रखा और कुछ देर बाद पहले हल्के-हल्के और जब ताई जी भी रंग में आ गई तो उसके बाद जोर-जोर से लंड आगे पीछे करने शुरु कर दिया और लगभग 6-7 मिनट तक ताई जी को चोदकर उनकी गांड को अपने रस से भर दिया।

उस सारी रात हमने खूब चुदाई की और नंगे ही सोये रहे और सुबह उठ कर ताई जी ने घर वालो के आने से पहले फिर से मुझसे अपने बूब्स चुसवाये और चूमने के बाद अपनी चुदाई करवाई।

उसके बाद तो जब भी हम दोनो घर में अकेले होते हैं तो बिना किसी परवाह के पति-पत्नी की तरह एक दूसरे को पूरे घर में जहाँ भी मूड हो वहाँ पर चुदाई करने लग जाते है।

मैंने उस दिन से लेकर अब तक क़रीब 4 अलग-अलग औरतों और लड़कियों को चोदा है लेकिन मुझे आज तक ताई जी जैसी गरम औरत कभी ना तो मिली है और ऐसा लगता है कि भविष्य में भी नहीं मिलेगी।

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