आज की कहानी में आप पढ़ेगे की कैसे मेरे दोस्त की माँ ने मालिश से गर्म होकर मेरे साथ चुदाई की और मुझे चुदाई करना सिखाया और हम दोनों ने कैसे एक दूसरे को चुदाई से संतुष्ट किया।
कहानी का पिछला भाग :
दोस्त की बहन, बुआ और माँ की चुदाई-1
दोस्त की बहन, बुआ और माँ की चुदाई-2
माँ ने मुझको चोदने को बोला
माँ ने मुझसे चिपके हुई मेरे लण्ड को मसलते हुए अपनी बाईं टांग को मेरे दाईं टांग पर चढाकर मेरे लण्ड को अपनी जाँघों के बीच में रख लिया.
अब मेरे लण्ड का सुपाड़ा उनकी झांटो के बीच में घूम रहा था और उसके मुलायम रेशमी अहसास से मेरा सब्र का बांध टूट रहा था.
मैंने बेकाबू होकर उनसे कहा, मुझे कुछ हो रहा है और मेरा ख़ुद पे क़ाबू नहीं है, मैं क्या करूं?
माँ बोली- तुमने आज तक कितनों को चोदा है आज तक?
मैंने बोला- एक को भी नहीं?
उन्होंने मुझे चूमते हुए कहाँ – अपनी दोस्त की माँ को चोदोगे?
मैंने तुरंत ही कह दिया, क्यों नहीं.
मेरा जवाब सुन उन्होंने मादक अन्दाज़ मे मुस्कुराते हुए मेरे लण्ड को आजाद किया और कहा तुम अभी अनाड़ी हो, मुझे ही सब कुछ सिखाना पड़ेगा.
मैं खड़ा हुआ और अपनी लुंगी खोल कर साईड में फेंक कर अपने तने हुए लण्ड को लेकर नंगा उनके सामने खड़ा हो गया.
अब उन्होंने भी अपने रसीले होंठों को अपने दांतों मे दबाते हुए पेटीकोट का नाड़ा खींच कर ढीला करने के साथ ही उतार कर नंगी गई.
उन्होंने नंगे होते हुए अपनी टांगो को फ़ैलाया तो मुझे रेशमी झांटो के घने जंगल के बीच छिपी हुई उनकी रसीली गुलाबी चूत के साथ में नाईट लेम्प की हल्की रोशनी मे उनके चमकते हुए नंगे जिस्म का दीदार करते ही मेरा लण्ड खुशी से झूमने लगा.
मैं बेकाबू होकर उनके ऊपर लेट गया और उनकी मस्त और उठी हुई चुचियों को मसलते हुए उनके रसीले होंठ चूसने लगा तो उन्होंने भी जवाब देते हुए अपनी जीभ मेरे मुँह मे डाल दी .
में उनकी स्वादिष्ट और रसीली जीभ को चूसते हुए उसका रस पीने लगा तो उन्होंने अपने हाथों से मेरा सर पकड़ उसे नीचे की तरफ़ कर दिया. मैं उनका इशारा समझते हुए अपने होंठ उनके होंठों से उनकी ठुड्डी पर लाया और चूमते हुए चूची पर पहुँचा.
मैं अब फिर से उनकी चुचियों को को मसलने के साथ उनसे खेलते हुए काटने और चूसने लगा. तो वे मेरा लण्ड पकड़ कर उसे मुठ्ठी मे बाँध कर सहलाते हुए अपने बायें हाथ से मेरे दाये हाथ को पकड़ कर अपनी टांगो के बीच में पहुचा दिया.
उनके ऐसा करने पर ही मेरा हाथ उनकी चूत पर पहुँच गया और उन्होंने अपनी चूत के दाने को ऊपर से रगड़ दिया. अब मैं ऊपर उनकी चुचियों को चूसता हुआ नीचे उनकी चूत को रगड़ने लगा.
उन्होंने आहे भरते हुए अपने हाथों से मेरी उंगली अपनी चूत के मुँह पर दबाई तो मैंने उसे चूत के दरार मे घुसा दिया और वो पूरी तरह अन्दर चली गई. अब में अपनी उंगली उनकी चूत के अन्दर बाहर कर रहा था मेरा मज़ा बढता गया!
ऐसा करते हुए मेरी उंगली जैसे ही उनकी चूत के दाने से टकराई, उन्होंने जोर से सिसकारी लेते हुए अपनी जाँघों से मेरे हाथ को कस कर बंद करते हुए अपने चूतड़ उठा उठा कर उसे चोदने लगी तो उनकी चूत से पानी बहने लगा.
थोड़ी देर बाद मैंने सीधा होकर उनके ऊपर लेटते हुए अपनी उंगली उनकी चूत से बाहर निकाल दिया तो उन्होंने अपनी टांगे फैलाते हुए लण्ड को पकड़ कर सूपड़े को चूत के मुहाने पर रख लिया.
अब उन्होने कहा, अपना लौड़ा प्यार से धीरे-धीरे बुर मे घुसाओ ध्यान रखना मैंने बहुत समय से चुदाईं नहीं करवाई है. मेरा पहली बार होने के कारण मुझे उनकी टाइट हो चुकी चूत में अपना लण्ड घुसाने मे काफ़ी परेशानी हुईं.
मेरी परेशानी को भांपते हुए उन्होंने अपने हाथ से लण्ड को रास्ता दिखाया तो रास्ता मिलते ही मेरा एक ही धक्के मे सुपाड़ा अन्दर चला गया.
इससे पहले कि वो संभल पाती, मैंने दूसरा धक्का लगाया और मेरा पूरा लण्ड उनकी मक्खन जैसी चूत में समा गया तो वो चिल्लाईं- उई! ईई! माआ! उहुहुह्! ओह! बेटा, कुछ देर ऐसे ही शांत रहो हिलना नही, हाय! मार ही डाला तुम्हें तो मुझे.
मैं उनकी चूत में अपना लण्ड घुसा कर थोड़ी देर चुपचाप पड़ा था. इस दौरान उनकी चूत फड़कते हुए, अन्दर ही अन्दर मेरे लौड़े को पकड़कर मसल रही थी. इसी के साथ उनकी चूचियाँ भी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी.
मैंने अपना हाथ बढ़ा कर दोनों चुचियों को पकड़कर चूसना शुरू किया तो थोड़ी देर में उन्हें कुछ राहत मिली और उन्होंने अपनी कमर हिलानी शुरु करते हुए कहा- बेटा अब शुरु करो और चोदो मुझे!
मैं चुदाईं में अनाड़ी था तो जैसे ही अपनी कमर को ऊपर किया तो लण्ड चूत से बाहर आ गया और जब नीचे किया तो चूत को रगड़ता हुआ फिसलते हुए नीचे गाण्ड मे जाकर फँस गया.
मैंने ऐसे ही दो तीन धक्के लगाए पर लण्ड फिसल कर गाण्ड मे चला जाता. अब उनसे रहा नहीं गया और तिलमिलाते हुए बोलीं- में भी किस अनाड़ी से चुदवाने के लिए तैयार हो गई.
अगले ही पल- बेटे सही से निशाना लगा कर लंड को अन्दर डालो, नहीं तो में चूत के ऊपर लौड़ा रगड़ते हुए ही झड़ जाऊँगी. मैं बोला- मैंने कहा आज आप ही मेरी गुरु है और मेरा यह लण्ड आपकी गुरु दक्षिणा!
उन्होंने लम्बी साँस लेते हुए कहा- मुझे ही कुछ करना होगा और ऐसा कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ अपनी चूची से हटाया और मेरे लण्ड पर रखवाते हुए बोलीं- इसे पकड़ कर मेरी चूत के मुँह पर रखो और अंदर की और धक्का दो.’
मैंने उनके बताए अनुसार लंड पकड़कर धक्का दिया तो मेरा लण्ड उनकी चूत के अन्दर तक समा गया. अब लण्ड को आधा बाहर निकालो और उसका सुपाड़ा अन्दर ही रहने दो और फिर से लण्ड अन्दर पेलते रहो!
उनके बताए अनुसार मेरा लण्ड धीरे-धीरे उनकी चूत मे अन्दर-बाहर होने लगा. थोड़ी देर में उनके जोश में आने पर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लण्ड को उनकी चुत में अन्दर-बाहर करने लगा.
वे भी पूरी मस्ती के साथ नीचे से अपनी कमर उठा-उठा कर हर शॉट का जवाब देने लगी. लेकिन ज्यादा स्पीड और चुदाइ का एक्सपीरियंस नहीं होने के कारण मेरा लण्ड बाहर निकल जाता.
आखिर उनसे रहा नहीं गया, और उन्होंने करवट लेते हुए मुझे उतारकर मेरे ऊपर चढ गईं और अपनी जाँघों को फ़ैलाते हुए अपने गद्देदार चूतड़ रखकर मेरे ऊपर बैठ गईं.
अपनी चूत को मेरे लण्ड पर करते हुए हाथों से मेरी कमर को पकड़ा और मेरे ऊपर लेटकर धक्का लगाते हुए बोलीं- मैं दिखाती हूँ कि, कैसे चोदते है? इसी के साथ उनकी चूत ने मेरे लंड को अपने अंदर ले लिया.
उन्होंने अपनी रसीली चुचियों को मेरे सीने पर रगड़ते हुए गुलाबी होंठों से मेरे होंठों को चूमते हुए मेरे मुंह मे जीभ डाली और कमर हिला-हिला कर जोर से शॉट लगाना शुरू किया.
इस अवस्था में में उनकी चूत मेरे लण्ड को अपने मे समाये हुए मस्ती से ऊपर नीचे हो रही थी और उनके ऐसा करने से में जन्नत में पहुच गया था! इस दौरान जैसे-जैसे माँ की मस्ती बढ़ रही थीं उनके शॉट भी उसी अनुपात में तेज़ होते जा रहे थे.
अब उन्होंने अपनी पोजीशन चेंज करते हुए मेरे कंधो को पकड़ा और घुटने के बल बैठ कर अपने चूतड़ों को हिला कर लण्ड को तेज़ी से अन्दर-बाहर लेने लगीं.
इस अवस्था में उनका सारा बदन उनकी तेज साँसो के साथ हिल रहा था और उनकी तेजी से ऊपर नीचे होती हुई चुचियों को देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनकी दोनों चुचियों को अपने हाथों से जोर-जोर से मसलना शुरू किया.
छुड़ाई के दौरान वे एक मंजे हुए खिलाड़ी की तरह मुझे कस-कस कर चोद कर झड़ने के करीब आ गई थी और इसी के साथ उनकी रफ़्तार भी बढती ही जा रही थीं.
अब जब उनकी साँस फ़ूल गईं तो वे नीचे उतरी और मुझे अपने ऊपर खींच अपनी टांगो को फ़ैला कर ऊपर उठा लिया और बोली- मैं थक गई हूँ मेरे राजा, अब तुम अपना मोरचा संभालो!
अब मैंने निशाना लगा कर झटके से अपने लण्ड को उसकी चूत के अन्दर डाला और उनके ऊपर लेट कर जोरदार शॉट लगाने लगा. उन्होंने भी अपनी दोनों टांगो से मेरी कमर को जकड़ लिया, और चूतड़ उठा-उठा कर चुदाईं मे साथ देने लगी.
वे अपनी कमर हिला कर चूतड़ उठा उठा कर चुदते हुए बोल रही थीं- अह्! आह! हउन! ऊओ! ऊऊह! हाहा! आ मेरे रजजा! उईई मीई माआ! मर गई री! लल्ला चूओद रे चूओद! आ आ आ गाईंई! रीईई आज तो मेरी चूत!
मैं भी उनका साथ देते हुए बोल रहा था- ले…ई…ए मेरी…ई रानी…ई, लेई लेईए लौ…रा अपनीई चूत में…ईए!!
वे जहाँ नीचे से गांड उछाल-उछाल कर मेरा लण्ड चूत मे ले रही थीं तो मैं भी ऊपर से जोश में उनकी चूचियों को मसलते हुए उनकी ज़बरदस्त चुदाई कर रहा था.
रा…ज्जा! मेरी चूत तो ते…रे लण्ड की दीवा..नी हो गई है, और जोर से और जोर से आई! मैं गई रेई! कहते हुए उन्होंने मुझे अपनी बाँहो में कस कर जकड़ लिया और, उनकी चूत ने अपना सारा लावा छोड़ दिया.
उनके मेरे लंड पर पानी छोड़ने ही मेरा भी लण्ड पानी छोड़ने के लिए तैयार हो गया, मैं बोला- मैं भी आ…याया! मेरी जा…आन! और मेरे लण्ड ने भी अपना पानी छोड़ दिया और मैं हाँफ़ते हुए उनकी चूची के ऊपर सिर रख कर लेट गया.
पहली छुड़ाई के बाद मुझे बहुत ज़्यादा थकान महसूस हो रही थीं.उन्होंने मेरी हालत को समझा और हाथ से मेरे सिर को धीरे-धीरे से सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरी पीठ को सहलाने लगी.
साथियो आगे की कहानी के लिए अगले भाग का इंतजार करिए और ऐसी ही मस्त स्टोरी के लिए पढ़िये freesexstory.online.
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