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दोस्त की बहन, बुआ और माँ की चुदाई-6

by mahesh srivastava
July 30, 2026
in Aunty Sex, Family Sex
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आपने अभी तक कहानी में पढ़ा की मैंने मेरे दोस्त की माँ को चोदने के अगले दिन बुआ मेरे लंड को देखकर गर्म हो गई और उसे चूसकर उसका रस पीने के बाद अपनी गांड मरवाने के लिए उसको तैयार करने लगी अब पढ़िए उससे आगे की कहानी…

कहानी का पिछला भाग :

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आगे की कहानी :

बुआ कमर हिला कर मजा आ जाओ राजा और मार लो अपनी बुआ की गांड.

मैंने घुटनें के बल बैठ कर अपने लण्ड को पकड़ कर बुआ की गांड के छेद पर रख दिया.

बुआ ने पीछे होकर लण्ड को टारगेट पर लिया तो मैंने उनके चुतड़ो को दोनों हाथों से पकड़ कर धक्का लगाया लेकिन मेरा लण्ड उनकी गांड में नहीं घुस रहा था.

बुआ ने अपने दोनों हाथों से चूतड़ों को खींच कर गांड के छेद को फैलाकर जोड़ से झटका मारने को कहा तो मेरा सुपाड़ा उनकी गांड की छेद में चला गया.

अब मैंने दूसरा झटका लगाया तो मेरा आधा लण्ड उनकी गांड में चला गया और बुआ जोर से चीख उठी- उ…ई माँ! दुख….ता है मे…रे रा…जा!

मैंने उनकी और ध्यान न देकर अपने लण्ड को थोड़ा पीछे खींच कर जोरदार शॉट लगाया और मेरा पूरा लंड गांड को चीरता हुआ अंदर तक समा गया और बुआ की चीख कमरे में फेल गई.

वो दर्द से बिलबिलाते हुए अपनी कमर को हिलाकर मेरे लण्ड को बाहर निकालने की असफल कोशिश करने लगी तो मैंने आगे को झुक उनकी दोनों चुचियों को सहलाना शुरू किया.

मेरे ऐसा करने से थोड़ी देर बाद बुआ कुछ नार्मल हुए और अपने चूतड हिलाना शुरू किया तो  उनका सिग्नल मिलते ही मैंने अपनी धीरे-धीरे कमर हिला कर लण्ड को उनकी टाइट गांड में अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.

अब बुआ भी धीरे धीरे अपना दर्द भूल गई और उन्हें मजा आने लगा तो उन्होंने सिसकारी भरते हुए एक उंगली अपनी चूत में डाल कर मेरे धक्को से ले मिलकर कमर हिलाना शुरू कर दिया.

मैंने जब बुआ को मस्ती में देखा तो धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ाते हुए अपने पूरे लण्ड को उनकी गांड में पिस्टन की तरह अन्दर-बाहर करने लगा तो हमारे चुदाई के इंजन की थप-थप कमरे में गूंजने लगी.

ऊपर से में उनकी गांड मार रहा था तो नीचे से जोश में तेजी से चूत में उंगली अन्दर-बाहर करती हुई पसीने से भरी हुई बुआ सिसकारी भर रही थी लेकिन हम दोनों ही रूकने का नाम नहीं ले रहे थे.

बुआ- आ…ज फाड़ डा…लो इसे. शाबा…श मेरे शेर, और मैं भी हुम…च हुम…च कर उनके ऊपर जोड़ लगाकर पूरा लंड बाहर खींच कर झटके से अन्दर डालता तो उनकी चीख निकल जाती.

बुआ उंगली से अपनी चूत को चोद चोद कर अपनी मंजिल के पास थी. तभी मैंने उनकी उँगली को बाहर निकाले बिना एक ही झटके में अपने लण्ड को उनकी चूत में पूरा ठूस कर उन्हें अपनी बाहों में समेट कर दनादन शॉट लगाने लगा.

हम दोनों अपनी फूली हुई साँसो के साथ एक दूसरे को चोदते हुए अपने-अपने रस को निकालते हुए झड़ गए और उसी अवस्था में एक दूसरे से चिपके हुए पलंग पर पड़ गये और थकान की वजह से नींद आ गई.

उस रात मैंने बुआ को चोद-चोदकर अपने और मेरे दोनों के माल से बिस्तर घर दिया और थक कर कब सो गया पता ही नहीं चला.

सुबह करीब 10 बजे सुमन ने मुझे उठा कर चाय दी तो मेरी आँख खुली. चाय पीकर फ्रेश होकर नाश्ते के लिए जब में नीचे पहुचा तो सिर्फ़ सुमन को देख कर कहा- माँ और बुआ दिखाई नहीं दे रहे? वो बोली वो तो सुबह कभी के खेत चले गए हैं.

मैंने नाश्ता किया और लुंगी बनियान में ही कमरे में बैठकर किताब पढ़ने लगा. लगभग एक घंटे बाद सुमन बाक़ी का काम निबटा कर कमरे की सफ़ाई के लिए आई और मुझसे बोली भैया आप बिस्तर से उठकर कुर्सी पर बैठ जाओ में बिस्तर बना देती हूँ.

मैं उठा और कुर्सी पर बैठ गया. सुमन बिस्तर सही करने लगी तो चादर पर मेरे लण्ड और बुआ और बुआ की चूत के रस के धब्बे के निशान रात की घटना की कहानी सुना रहे थे.

 

सुमन को शक हुआ तो वह झुक कर निशान वाली जगह को सूंघ रही थी. उसे ऐसा करते देख मेरी तो साँस ही रुक गई. थोड़ी देर बाद सुमन उठी और मेरी तरफ देखती हुई अलग ही अंदाज से मुस्कुरा दी.

काम निपटाने के बाद सुमन इठलाते हुए मेरे पास आई और आँख मार कर बोली- लगता है तुमने और बुआ ने मिलकर रात भर मस्त खेल खेला है.

मैंने अनजान बनते हुए कहा- क्या मतलब? वो मुझसे सटकर बोली- जानबूझकर इतने भोले और अनजान मत बनो. तुमने बुआ के साथ तो खेल लिया लेकिन मुझे छोड़ दिया- क्या मैं तुम्हें अच्छी नहीं लगती?

मैंने मुस्कुराते हुए उसकी और गौर से देखा तो मेरे सामने सुमन छरहरे बदन की साँवले रंग और उठी हुई मस्त चुचियों को मेरे सीने में गड़ाते हुए मुझसे चिपकते हुए खड़ी हो गई.

उसकी चुचियों के मेरे शरीर में धँसने के साथ ही मेरा लण्ड फड़फड़ा उठा. मैंने मन ही मन सोचा कि, सुमन जब सामने से चलकर आई है तो इस मौक़े को हाथ से मत जाने दे.



मैंने हिम्मत कर उसकी कमर को पकड़, खींच कर अपने से पूरा चिपकाते हुए कहा- तो चल सुमन आज दिन भर तेरे साथ खेल लेते है!

वो मेरे ख़ुद को चिपकाने से घबरा गई और ख़ुद को छुड़ाने और मुझसे दूर हटने की नाकाम कोशिश करने लगी, लेकिन मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसको चूमना शुरू किया तो खींचतान में मेरा तौलिया खुल गया और मेरा मोटा लंड बाहर आकर उसे सलामी देने लगा.

मैंने अपनी बाँहों में उठाकर बिस्तर पर कमर के बल लिटाते हुए सुमन से कहा- अभी तो कह रही थी कि मेरे साथ भी खेलो और साथ ही अपना लण्ड उसकी चूत पर दबाकर एक टांग उसकी टांग पर चढ़ा दिया और उसे दबोच लिया.

इतने नखरे क्यों दिखाती हो अगर ऊपर वाले ने हुस्न दिया है तो उसके मजे लो कहते हुए मैंने उसके ब्लाउज को खींच कर खोल दिया.

अब मैंने आगे बढ़ते हुए एक हाथ को उसके पेटीकोट के अन्दर घुसा कर उसकी चिकनी चिकनी जाँघों को सहलाने के बाद अपने हाथ को उसकी चूत पर ले गया तो उसने दोनों जाँघों को कस कर दबाया और मस्ती से सिसकारी भरने लगी.

मैं अब उसकी चूत को मस्ती से सहलाने लगा और किसी तरह से एक उंगली को चूत के अन्दर डाल दिया. उंगली अंदर जाते ही वह कमर हिलाकर छटपटाते हुए बाहर निकालने की कोशिश करने लगी.

वह जैसे जैसे उँगली निकालने के लिए कमर हिलाती वैसे ही मेरी उँगली उसकी चूत में अंदर बाहर होती और इस तरह से वह मेरी उँगली से चुदने लगी तो कमर के झटको से उसका पेटीकोट ऊपर उठ गया.

अब मैंने अपने लण्ड को उसके नंगे चूतड की दरार में फिट कर दिया. लुआ फूले हुए और जवान चिकने चूतड थे उसके. मैंने उसकी चूत को अपनी उंगली से चोदते हुए पीछे से गांड की दरार में लण्ड धंसा दिया!

कुछ देर की ज़ोर आजमाइश के बाद सुमन ढीली पड़ गई और अपनी जाँघों को ढीला कर कमर हिला हिला कर ऊपर नीचे होकर उँगली से चुत चुदाई का मजा लेने लगी.

मैंने धक्का लगाते हुए पूछा- मजा आ रहा है ना.



उसने अपनी मस्त जांघे फैलाते हुए मेरी अंदर बाहर हो रही उँगली से चुदासी होकर कहा- हाँ भैया, बहुत मजा आ रहा है.

अब सुमन ने अपना हाथ पीछे करके मेरे लण्ड को पकड़ा तो उसकी मोटाई को महसूस कर बोली- हाय रब्बा इतना मोटा लण्ड. मुझे सीधा होकर इसे देखने तो दो फिर चोद लेना.

उसके सीधा लेटते ही मैंने अपनी टांग उसकी टांग पर चढ़ाई और अपने लण्ड को उसकी जाँघ पर रगड़ते हुए उसकी पत्थर जैसी सख़्त चूचियों को मसलते हुए चूसने के साथ एक उंगली से उसकी चूत को चोद चोदने लगा.

मेरे इस तरह से मसलने से वो भी जोश में आकर मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी जाँघों पर घिसते हुए बोली- अब मुझे तडपाओ मत! जल्दी से चोद दो मुझे.

मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट को कमर तक उठाकर उसकी चूत को नंगा किया और उसकी टांगें अपनी कंधों के ऊपर रखी, उसने मस्ती के साथ मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के मुँह पर रखा और बोली- आ…ई…य! शु..रू हो जाओ.

मैंने कमर को झटका देते हुए जोरदार धक्का दिया, और मेरा आधा लण्ड उसकी गरम और कसी हुई चूत में धंस गया.

वो चिल्लाकर बोली भै…या आ..हि..स्ते! द..र्द हो रहा है और उसने अपनी चूत सिकोड़ ली, उसके ऐसा करते ही मेरा लण्ड उसकी चूत से बाहर आ गया.



मैंने सुमन को अपने पकड़ में लेकर उसकी सख्त चूचियों को मसलते हुए, एक और शॉट लगाया तो मेरे लंड का सूपड़ा उसकी चूत में घुस गया. मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया और मस्ती से  चूसने लगा.

में सुमन के ऊपर बिना हिले उसकी आँखों से निकल रहे आँसू देख रहा था. थोड़ी देर बाद जब वो थोड़ा शांत हुई तो मैंने दुसरा शॉट लगाया तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा धंस गया.

लंड के चूत में घुसते ही दर्द से उसकी चीख निकल गई और रोते हुए बोलने लगी- बड़े जालिम हो तुम और तुम्हारा लंड. इस तरह से किसी कुँवारी लड़की को चोदोगे तो वो मर जाएगी.

मैं उसकी रोते हुए निकलने वाली सिसकियों को सुनते हुए उसकी चूचियों को पकड़ कर मसलते हुए धीरे-धीरे लण्ड को उसकी टाइट चूत में अन्दर-बाहर करने लगा.

थोड़ी देर बाद सुमन भी खुलकर मेरा साथ देते हुए अपनी कमर से झटके देते हुए मेरे लंड को अपनी चुत में लेने लगी.

दोस्तों, यह थी मेरी बिल्कुल सच्ची कहानी! आशा करता हूँ कि मेरी यह कहानी आप लोगो को जरूर अच्छी लगी होगी.

ऐसी ही मस्त स्टोरी पढ़िए freesexstory.online पर.

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